मदद का हाथ / प्रवासी मजदूरों के लिए फरिश्ता बने सोनू सूद, बोले- ‘जब तक आखिरी मजदूर अपने घर तक नहीं पहुंचता, तब तक लगा रहूंगा’

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दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 02:59 PM IST

मुंबई (उमेश कुमार उपाध्याय). कोरोना वायरस के वारियर्स की कहानी जब-जब लिखी जाएगी, तब-तब एक नाम सोनू सूद का भी होगा। लॉकडाउन के दौरान सोनू सूद ने मेडिकल स्टॉफ को रहने के लिए मुंबई स्थित अपना होटल देने से लेकर हजारों जरूरतमंद परिवारों को खाना खिलाने, पंजाब में डॉक्टरों को 1,500 से अधिक पीपीई किट दान करने और अब माइग्रेंट्स वर्कर्स को उनके घर तक पहुंचाने का जिम्मा अपने कंधों पर उठाया है। हाल ही में भास्कर को दिए एक इंटरव्यू में सोनू ने अपने लक्ष्य के बारे में बातचीत की है।

कैसे आया मदद करने का विचार?

जरूरतमंदों की मदद करने का मेरे मन में जो ख्याल था, वह सिर्फ ख्याल ही नहीं, बल्कि वह बहुत बड़ी जरूरत थी। मजदूर भाइयों को देखा कि वे कितनी मुश्किलों से हाईवे पर पैदल चलकर जा रहे थे। कितने एक्सीडेंट हो रहे थे, कितनी जाने जा रही थी। इसके लिए आगे बढ़ना बहुत जरूरी था। एक विश्वास का हाथ, जो उन्हें बता सके कि आप बिल्कुल टेंशन मत लें, हम आपके और आपके परिवार वालों के साथ खड़े हैं। इसके लिए सारी परमिशन लेनी शुरू कर दी। फिर मजदूर भाइयों को विश्वास दिलाया कि आप रुकिए, आप सबको सही सलामत आपके घर भेजूंगा।
एक्सपीरियंस कैसा रहा?

ग्राउंड लेवल पर आना बहुत ज्यादा जरूरी था, क्योंकि जब आप बाहर आते हैं, तभी आपको पता चलता है कि लोग कितनी मुश्किल में हैं। इन लोगों से मिलकर इनकी मदद करने पर इनके बच्चों के चेहरों पर जो खुशी देखी, उसको शब्दों में बयां नहीं कर सकता। लेकिन हम सबको यह पता है कि यह वही लोग हैं, जिन्होंने आपके घर बनाए और जब आज यह जब अपने घर के लिए निकले हैं, तब हमें इनकी मदद किसी भी हालत में करनी है। इसलिए मैं ग्राउंड लेवल पर आया।
देश में मजदूरों के हालात पर क्या कहना चाहेंगे?

उन्हें देखकर बहुत दुख होता है। इतनी मेहनत करने वाले लोग आज हजारों किलोमीटर पैदल चलकर घर का सफर तय कर रहे हैं। वे दुखी हैं। मजदूरों और उनके परिवार वालों पर क्या गुजर रही है, यह इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा कि हमारे देश के जो मजदूर थे, उनकी ,स्थिति कोरोना वायरस के कारण बहुत दुखदाई रही। हम लोग कभी इस बात को भूल नहीं पाएंगे।
क्या सरकार मजदूरों की मदद करने में असफल रही है?

मुझे लगता है कि सरकार को आगे आकर मजदूरों और जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। सफर तय करने के लिए जो परमिशन लेनी पड़ रही है, उसे थोड़ा और आसान कर देना चाहिए। फॉर्म भरने के तरीके, मेडिकल जांच और आसान कर देना चाहिए, क्योंकि इसमें उनका बहुत समय जाता है। कई लोग इस प्रक्रिया को करना नहीं चाहते, इसलिए वह पैदल चल पड़ते हैं। और ज्यादा ट्रेन व बसें शुरू कर देनी चाहिए ताकि यह लोग पैदल न चलें और अपने घरों पर सुरक्षित पहुंचे। हालांकि सरकार ने काफी सुविधा देनी शुरू भी की है लेकिन यह थोड़ा-सा पहले हो जाता, तब इतना जो भागदौड़ मची है, उससे बच सकते थे। लेकिन देर आए दुरुस्त आए। मुझे लगता है कि सरकार भी इन लोगों की मदद कर रही है और तमाम चीजों में आगे बढ़ रही है।
खैर, किन सोच के साथ आप मदद करने के लिए आगे आए।

यह प्रेरणा कब और किससे मिली?

यह प्रेरणा माता-पिता से मिली है। मेरी मां इंग्लिश की प्रोफेसर थीं। उन्होंने ताउम्र लोगों को फ्री में पढ़ाया। मेरे फादर ने हमेशा अपने शॉप के सामने लंगर लगाया। माता-पिता से प्रेरणा मिली कि किसी की मदद करनी हो तो आगे बढ़कर उनका साथ देना चाहिए। उसी प्रेरणा से आज लोगों की मदद कर पाया हूं। मैं हर जरूरतमंद की मदद करना चाहता हूं। जब तक आखिरी मजदूर अपने घर तक नहीं पहुंचता, तब तक मैं लगा रहूंगा। 
आगे क्या-क्या करने वाले हैं?

आगे प्लान कर रहा हूं कि जो लोग इंजर्ड हुए हैं, जिन लोगों की जानें गई हैं, उनकी और उनके परिवार की  किस तरह से मदद कर सकते हैं। मैं मदद करने की पूरी कोशिश में हूं। प्लानिंग अभी कुछ भी नहीं है, लेकिन यह है कि जब तक सबको सही सलामत उनके घर नहीं पहुंचा देता और सबकी मदद नहीं कर देता, तब तक मेहनत करते रहना पड़ेगा। नहीं तो लोगों को बहुत तकलीफ होगी। यह जिम्मा मैंने अपने कंधों पर उठाया है। कोशिश है, सब तक मदद पहुंचे। सब अपने घरों में खुशी रहे। यह जो हालात है, वह वापस नॉर्मल हो पाए।

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