इरफान की कहानी सुतपा की जुबानी:वो एक मुसाफिर थे, मौत से उनका अजीब सा अटैचमेंट हो गया था, वो जानना चाहते थे मरने के बाद होता क्या है

6 महीने पहलेलेखक: अमित कर्ण
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  • इरफान खान की पहली बरसी पर उनकी पत्नी सुतपा सिकदर से खास बातचीत
  • इरफान पांच वक्‍त के नमाजी नहीं थे, पर उन्‍हें अध्‍यात्‍म में गहरी दिलचस्‍पी थी
  • हम पति-पत्नी से ज्यादा दोस्त थे, उन्‍होंने मुझे कभी धर्म परिवर्तन करने को नहीं कहा

फिल्म अभिनेता इरफान खान की आज पहली बरसी है। 29 अप्रैल 2020 को इरफान ने दुनिया को अलविदा कहा था। इरफान की पहली बरसी पर उनकी पत्नी सुतपा सिकदर ने दैनिक भास्‍कर से खास बातचीत की। सुतपा ने इरफान के उन अनछुए पहलुओं को सामने रखा, जो उनकी अभिनय की दुनिया से बिलकुल अलग थे। पढ़िए, इरफान की अनछुई जिंदगी सुतपा सिकदर की जुबानी।

काला बैलबॉटम, मलमल की शर्ट और रैगिंग
इरफान से मेरी मुलाकात तो एनएसडी के दिनों की ही है। उन्‍होंने काला बेलबॉटम पैंट पहन रखा था। मलमल की शर्ट थी। हम दोनों का सिलेक्‍शन हो गया था। मेरी थर्ड ईयर के सीनियर्स से भी दोस्‍ती हो गई थी। सतीश कौशिक वगैरह से। उन्‍होंने रैगिंग की, तो हमने भी थोड़ी सी रैगिंग कर ली थी इरफान की। इरफान को पता ही नहीं चला कि हम बैचमेट हैं।

इरफान को फोटोग्राफी का बहुत शौक था।
इरफान को फोटोग्राफी का बहुत शौक था।

पहली क्लास में मैंने की थी भविष्यवाणी
एनएसडी को लेकर हमारे मन में यही परसेप्‍शन बना कि यह बड़ी सरकारी टाइप जगह है। वहां का सर्कुलेशन डिपार्टमेंट हमें बड़ा पसंद था। बहरहाल, जब ओरिएंटेशन क्‍लास शुरू हुई। मेरी बगल में ये भी आए। मुझे देख इन्‍हें बड़ा गुस्‍सा आया। नाराजगी इस बात की रही कि ये अपने आप को समझती क्‍या है। वह उनका रिएक्‍शन था। फिर म्‍यूजिक की क्‍लास में उन्‍हें ‘सारंगा तेरी याद में’ में गाते देखा। गायकी बड़ी बेमिसाल नहीं थी लेकिन अच्‍छा गाया, चेहरे पर पैशन था। शब्‍दों को महसूस कर रहे थे। उसी वक्‍त मैंने कहा था कि यहां कोई और एक्‍टर बने न बने, ये बंदा तो बनेगा।

अपनी ही दुनिया में मगन रहने का हुनर था इरफान के पास
मुझे उनमें जो चीज सबसे अच्‍छी लगी, वह यह थी कि मैंने उन्‍हें कभी किसी की बुराई करते हुए नहीं सुना। कभी कोई पॉलिटिक्‍स नहीं करते थे। इस दुनिया में रहते हुए भी वो अपनी ही दुनिया में मगन रहा करते थे। ये उनकी शख्सियत की एक बड़ी बात थी। मेरी लड़कियों से ज्‍यादा लड़कों से दोस्‍ती रही लेकिन हर कोई किसी न किसी की बुराइयों में लुत्‍फ उठाता ही था, मगर इरफान में वो बात मैंने नहीं पाई।

फिल्म करीब करीब सिंगल के सेट पर गंगटोक में।
फिल्म करीब करीब सिंगल के सेट पर गंगटोक में।

इतनी साफगोई किसी और में नहीं
मुझे एक्टिंग नहीं करनी थी। मुझे वो कौम बड़ी नापसंद थी। एनएसडी के दिनों में दरअसल मेरे भीतर एक भाव भी आ गया था कि आखिर इस दुनिया में इतना बनावटीपन क्‍यों है। इस पर मुझे वो समझाया भी करते कि पूरी दुनिया को सुधारने का ठेका क्‍यों ले रखा है। इरफान दरअसल बड़े प्रैक्टिकल इंसान भी थे। उन्‍हें हाल ही के सालों में एक फिल्‍म ऑफर हुई थी। वह बड़े बजट की फिल्‍म थी। उस पर उन्‍होंने कहा भी था, "इतने भारी भरकम बजट में मेरे साथ फिल्‍म मत बनाओ। अच्‍छा होगा अक्षय कुमार के साथ बना लो। वहां मेकिंग के लिए सौ करोड़ तो क्‍या पांच सौ करोड़ तक आ जाएंगे। मेरे संग बनाओगे फिल्‍म उतना रिकवर नहीं कर सकेगी। फिल्‍म डूब जाएगी। मेरे नाम पर एक और फ्लॉप फिल्‍म आ जाएगी।" कहने का मतलब यह कि उन्‍हें अपनी वैल्‍यू पता थी।

इरफान की आदत ताउम्र बनी रही
उनकी एनएसडी से या उससे पहले की भी आदत ताउम्र बनी रही। यहां तक कि जब हम मुंबई भी आए और यहां जब वो स्‍टार बने तो भी कभी उनके मुंह से किसी की बैकबिचिंग नहीं सुनी। यहां तक कि लोगों से ही मुझे सुनने को मिला कि इरफान और नवाज के बीच एक ईगो हैजल है लेकिन हकीकत यह है कि मैंने कभी इरफान को हमारे सामने नवाज की बुराई करते नहीं पाया। नवाज को तो वो बहुत मानते थे।

क्रिकेट इरफान का पसंदीदा टाइम पास था।
क्रिकेट इरफान का पसंदीदा टाइम पास था।

नवाज से खराब रिश्ता सिर्फ पीआर स्टोरीज थीं
सुजॉय घोष ने ‘कहानी’ के लिए इरफान से पूछा भी था कि नवाज कैसे हैं। इरफान ने सुजॉय से नवाज को झट से कास्‍ट करने की बात की थी। अब दोनों के बीच संबंध खराब करने में पीआर स्‍टोरीज का भी हाथ हो सकता है। कभी उन्‍होंने इरफान से कहा होगा कि अरे नवाज तो आप के बारे में ऐसा कहा करते थे। उसके बाद भी इरफान ने तय ही कर लिया कि वो इस मसले पर कुछ बोलेंगे ही नहीं ताकि विवाद आगे बढ़े ही नहीं। पिछले सालों में जब हम लंदन में थे, तब नवाज का फोन आया था। इरफान से अपने जज्‍बात साझा किए। कहा कि वो तो इरफान को बड़े भाई की तरह मानता और इज्‍जत देता है।

हमेशा पत्नी से ज्यादा मैं दोस्त रही
लंदन में मैं पूरे ढाई साल इरफान के साथ साए की तरह रही। वह इस हैसियत से नहीं कि मैं उनकी पत्‍नी हूं। मेरा तो धर्म है। बल्कि इसलिए कि हम ताउम्र दोस्‍तों की तरह रहे। एक जिगरी दोस्‍त के लिए तो इंसान इतना करता ही है। उनकी एक और चीज मुझे बहुत पसंद रही है। वह यह कि उन्‍हें बेचारा बनकर रहना बिल्‍कुल पसंद नहीं था। वह अपनी अम्‍मी से भी कहा करते कि बेचारा बनकर मत रहा करो। वह अल्‍लाह मियां को भी पसंद नहीं। वह जब एनएसडी कर मुंबई आए और ऑडि‍शंस से लेकर स्‍ट्रगल का दौर चल रहा था तो भी उनके चेहरे पर शिकन नहीं होती थी। वो हमेशा कहा करते थे, बस जरा सा मौका, थोड़ी सी जगह मिल जाए, वह अपने लिए सारा जहां तैयार कर लेंगे।

स्विटजरलैंड में अनूप सिंह के साथ
स्विटजरलैंड में अनूप सिंह के साथ

बॉलीवुड को लेकर चिंता भी थी
करियर की शुरुआत में उन्‍होंने टीवी किया। उसके वो शुक्रगुजार रहे, मगर वो लगातार फिल्‍मों के लिए ही प्रयासरत रहे। हमेशा कहते रहे कि उन्‍हें फिल्‍में ही करनी हैं। मेरे ख्‍याल से ‘वॉरियर’ उनकी टर्निंग पॉइंट फिल्‍म थी। उनमें समय को महसूस कर लेने वाली खूबी थी। वो जब ‘जुरासिक पार्क’ कर रहे थे, तब से ही कहा करते थे कि अगर बॉलीवुड नहीं सुधरा तो हॉलीवुड हमें डकार जाएगा। वो हमेशा कहानी को किंग के तौर पर पेश करने की बातें करते थे।

अध्यात्म में गहरी दिलचस्पी थी
वो पांच वक्‍त के नमाजी नहीं थे, मगर उन्‍हें अध्‍यात्‍म में बहुत गहरी दिलचस्‍पी थी। वो न सिर्फ इस्‍लाम, बल्‍क‍ि बाकी धर्मों के बारे में भी जानने की कोशिश किया करते थे। देखकर बड़ी खुशी होती थी, जब वो शूजित सरकार से रामकृष्‍ण परमहंस के बारे में जानने की कोशिश किया करते थे। उन्‍हें रिचुअल्‍स से नफरत थी, लेकिन रिलीजन से बेपनाह मोहब्‍बत।

लंदन में इलाज के दौरान इरफान खान
लंदन में इलाज के दौरान इरफान खान

मौत के बाद की दुनिया जानना चाहते थे
मौत से उन्‍हें एक अजीब तरह की अटैचमेंट हो गई थी। वो हमेशा जानना चाहते थे कि मौत के बाद आखिर क्‍या होता होगा। घंटों मेडिडेट करते थे। उनका अध्यात्म से नाता अजीब था। उन्‍होंने कभी मुझे नहीं बोला कि कन्‍वर्ट हो जाओ। इरफान टिपिकल मुस्लिम फैमिली से आते थे। वहां से उनकी ओपन माइंडेड इंसान होना, एक स्पिरिचुअल जर्नी है। इरफान के साथ जीना जिंदगी को देखना था। जिंदगी क्‍या करिश्‍मा कर सकती है, वह उनके साथ रहकर जाना। चाहे हम लड़े, झगड़े, प्‍यार से रहे, मगर हमने जिंदगी को भरपूर जिया।

आखिर में हुए ट्रीटमेंट से खफा थे इरफान
मुझे दुख इस बात का नहीं है कि मेरा पति साथ छोड़ कर चला गया। बल्‍क‍ि इसका है कि वो लगातार इवॉल्‍व हो रहे थे। मेरे बच्‍चों के लिए वो एक मैच्‍योर दोस्‍त थे। मेरे बच्चों से सच्‍चा, समझदार दोस्‍त छिन गया। अपनी अंतहीन जिज्ञासाओं में से कुछ के जवाब उन्‍हें मिले थे। वो ये कि इंसान जो चाहता है, वो उसे मिलता है। बस चाहत दिल की गहराइयों से होनी चाहिए। वो और भी जवाब ढूंढना चाहते थे, मगर वे अधूरे रह गए। आखिरी दिनों में हमने लंदन में खूब अच्‍छे प्‍ले देखे। फिल्‍में एक्‍सप्‍लेार कीं। वो बस आखिर में हुए ट्रीटमेंट से जरा नाराज थे।

अपनी आखिरी फिल्म अंग्रेजी मीडियम के शूट के दौरान इरफान।
अपनी आखिरी फिल्म अंग्रेजी मीडियम के शूट के दौरान इरफान।
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