खास बातचीत:ताहिर राज ने बताया-'83' में मैच फिल्माने के लिए 5 से 6 कैमरा सेट अप लगे, क्लोज अप शॉट में स्टेडी कैमरा यूज हुए थे

मुंबईएक महीने पहलेलेखक: अमित कर्ण
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इस क्रिसमस पर रिलीज हो रही रणवीर सिंह की '83' स्पोर्ट्स जॉनर की फिल्म है। इसमें सुनील गावस्कर प्ले कर रहे ताहिर राज भसीन ने इसकी मेकिंग से जुड़ी दिलचस्प जानकारियां शेयर की हैं। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने बताया, "क्रिकेट मैच फिल्माने होते थे, तो ग्राउंड पर पांच से छह कैमरा सेट अप होते थे। पिच पर जब बैट्समैन आपस में बात करते तो वैसे सीन के लिए स्टेडी कैमरा यूज होते थे। वो क्लोज अप शॉट लेते थे। लिहाजा बतौर एक्टर मुझे, रणवीर, हार्डी समेत सबको अलर्ट रहना पड़ता था कि आप के 360 डिग्री कैमरा हैं। सभी एक्टरों पर प्रेशर था कि वो 1983 वाले मैच रीक्रिएट कर रहे हैं। ऐसे में उन सभी रीक्रिएटेड मैचेज की तुलना रियल इवेंट से होंगी। यह सब आसान होता, अगर शूटिंग इनडोर में ग्रीन स्क्रीन पर हो रही होती तो।"

सभी कलाकारों को 12 घंटे ग्राउंड पर मौजूद रहकर शूटिंग करनी पड़ती थी
ताहिर और भी चुनौतियां गिनाते हैं, वो कहते हैं, "आम शूट में आप के अगेंस्ट का को-एक्टर अपने हिस्से की शूट करता है, तो आप वैनिटी में जाकर आराम फरमा सकते हैं। यहां ऐसा नहीं था। यहां हमारी अपोजिट टीम का बैट्समैन बैटिंग करता था तो हमें भी ग्राउंड पर रहना होता था, क्योंकि हम मैच के सीन शूट कर रहे थे। फिल्म के सारे मैच डेढ़ महीने तक शूट हुए। ऐसे में सभी कलाकारों को 12 घंटे ग्राउंड पर मौजूद रहकर शूटिंग करनी पड़ती थी। चारों तरफ कैमरे भी लगे थे तो एक मोमेंट नहीं था कि रेस्ट भी कर सकें।"

सबने शूट पर जाने से पहले चार से पांच महीने की क्रिकेट कैंप की ट्रेनिंग ली
एक्टरों ने अपने अपने किरदारों की स्किन में जाने के प्रॉसेस को गंभीरता से लिया। सबने शूट पर जाने से पहले चार से पांच महीने की क्रिकेट कैंप की ट्रेनिंग ली। ताहिर ने पर्सनली सात महीने की ट्रेनिंग ली। ताहिर के शब्दों में, "हम सबों के कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी थी। सनी गावस्कर बहुत बाय द बुक खेला करते थे। क्रीज पर वह कैसे बैट करते थे? स्टांस लेते वक्त वो कौन सा पांव पहले आगे रखते थे? साथ ही उनकी खास वॉक क्या थी? इन सबसे लेकर उनके फेवरेट क्रिकेटिंग शॉट्स और स्लिप में फील्डिंग तक को बड़ी बारीकी से मैंने लर्न किया। सनी सर ने अपनी टिपिकल वॉक की वजह जाहिर की थी। उन्होंने कहा कि वो चूंकि टीम के ओपनिंग बैट्समैन थे। ऐसे में अपोजिशन टीम पर मेंटल प्रेशर और अपनी टीम के कॉन्फिडेंस को बिल्ट अप करने के लिए वो अपनी चाल वैसी रखते थे। उनके रोल के लिए मैंने सात किलो वेट गेन किया था।"

मेकर्स ने कलाकारों के बीच टीम बॉन्डिंग लाने के लिए प्रयोग किया। इंग्लैंड में उन्हें होटल से स्टेडियम अलग अलग गाड़ियों में ले जाने के बजाय एक बस में साथ ले जाया जाता था। इससे उनमें बॉन्डिंग स्थापित हो गई थी। खाना खाने का वक्त तक सभी कलाकारों का सेम रखा गया। वर्ल्ड कप फायनल मैच का सीन सबसे आखिर में फिल्माया गया। ताकि कलाकारों को भी एक ग्रेट जर्नी के पूरा होने का एहसास हो सके।

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