बबली बाउंसर से खास बातचीत:तमन्ना भाटिया बोलीं, पैसा तो बहुत है, अब प्यार मांगता है ये दिल

6 दिन पहलेलेखक: अमित कर्ण

इस वीक कई नैशनल अवॉर्ड जीत चुके मधुर भंडारकर पहली बार तमन्ना भाटिया के साथ 'बबली बाउंसर’ लेकर आ रहे हैं। इसमें फीमेल बाउंसर्स की दुनिया जाहिर की गई है। पेश है उनसे खास बातचीत-

आप दोनों के पास घर, गाड़ी, बंगला सब है, अब किन चीजों की तमन्ना है?

तमन्ना- पैसा तो वाकई बहुत है। अब प्यार मांगता है ये दिल।

मधुर- मुझे तो बस फिल्में बनाते रहने के लिए पैसे चाहिए। फिल्में बनाता रहूं। बस काम होता रहे। बाकी तो सिंपल लिविंग है मेरी।

मधुर की फिल्मों में महिला ही प्रधान रहा करती हैं। आपने तमन्ना को इस फिल्म के लिए क्यों चुना ?

मधुर- स्क्रिप्ट रेडी होने पर मेरी बातें जंगली पिक्चर्स और फॉक्स स्टार स्टूडियो से हुई। वहां से तमन्ना का नाम आया था। साथ ही मैंने ‘बाहुबली’ देखी थी। मैं जब इनसे मिला भी तो लगा कि बबली के लिए तमन्ना ही परफेक्ट हैं। मैं बतौर फिल्मकार हमेशा किरदार को सूट करने वाला चेहरा प्रेफर करता रहा हूं। हमारे राइटर अमित जोशी और आराधना भी साथ थे। नैरेशन सुन तमन्ना शॉक्ड थीं। उन्होंने कहा भी कि ऐसी स्क्रिप्ट पर आप फिल्म बनाएंगे भी? इनकी बस एक गुजारिश थी कि हम पिक्चर एक फ्लो में कंप्लीट करें ताकि वो कैरेक्टर में बनी रहें।

अपने किरदार के लिए कैसे तैयारियां की ?

तमन्ना- मेरे ख्याल से बाउंसर्स की दुनिया के तौर पर हमने बहुत ही नॉवेल सब्जेक्ट यानी अनोखा सब्जेक्ट पिक किया था। खासकर फीमेल बाउंसर्स की दुनिया। उनकी शारीरिक ताकत तो खैर वाकई ज्यादा होती ही है, मगर उनमें हाजिर जवाबी और जिंदा दिली सी होती है। वह दोनों चीज बहुत जरूरी होते हैं। ताकि काम के दौरान मुश्किल परिस्थितियों को वो अपनी हाजिर जवाबी और जिंदा दिली से हैंडल कर सकें। मेरे ख्याल से मधुर सर औरतों को औरतों के मुकाबले ज्यादा बेहतर समझते हैं। तभी जो इंप्रोवाइजेशन उन्होंने किए, वह तो मैंने सोचे भी नहीं थे।

क्या आप की पिछली नैशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म की तरह यह भी उस अवॉर्ड की हकदार है?

मधुर- देखिए यह सोच कर तो कोई फिल्म बनाता नहीं। मेरी पहली पिक्चर 'त्रिशक्ति’ फ्लॉप हो गई थी तो लोगों ने मेरी पेशेवर श्रद्धांजलि लिख दी थी कि इसका करियर तो खत्म हो गया। पर जब 'चांदनी बार’ रिलीज हुई तो वहां से मेरी एक नई जर्नी शुरू हुई। तो फिल्मों का सफर कस्टम मेड नहीं होता कि फिल्म नेशनल अवॉर्ड के लिए बनाऊंगा। उसको ऑस्कर के लिए भेजूंगा। वह काम जुरी का होता है। बेशक हमारा काम होता है कि पिक्चरें ओवर बजट न होने दें। संयोग से मेरा नाम बजट के भीतर फिल्में बनाने को लेकर रहा है। बाकी अवॉर्ड का मिलना बोनस है। हर कोई चाहता है कि उसके काम की सराहना तो हो ही।

तमन्ना ने शायद अब तक 65 फिल्में की हैं। उनमें से कौन से किरदार रहे, जिनसे मिली सीख को आपने असल जिंदगी में अपनाया है ?

तमन्ना- हम उन किरदारों को इंबाइब तो नहीं कर सकते। हम अपने जीवन के किसी फेज में उन किरदारों की तरह के इमोशन से गुजर सकते हैं। वरना कल को मैं अगर सीरियल किलर प्ले करूंगी तो जरूरी नहीं कि किसी का मर्डर करने का तरीका इस्तेमाल करू। बेशक बाहुबली के किरदार से महसूस हुआ कि मैं अपनी सोच से कहीं ज्यादा ताकतवर हूं। बबली से जरूर अपने बारे में एक्सप्लोर कर सकी कि बचपन से मुझमें एक 'दादा’ बसता रहा है, जो स्कूल में कभी एक समोसे के लिए भी साथियों से भिड़ जाता हो। साथ ही खुद में मासूमियत का भी एहसास हुआ। मेरा मानना है कि वह आपमें होता है आप उसे फेक नहीं कर सकते।

आपने राजामौली के साथ भी काम किया है। उनमें और मधुर भंडारकर में क्या सिमिलैरिटी महसूस कर पाई हैं?

तमन्ना- ये दोनों ही किसी कलाकार को इसलिए कास्ट नहीं करते कि वो स्टार हैं। बल्कि इसलिए कि वो कलाकार लिखे गए रोल में फिट बैठते हैं। दोनों बड़े सेक्योर फिल्मकार हैं। तभी इतनी सारी फिल्में बनाने के बावजूद मधुर सर में खुद को फिर से तलाशने और तराशने की आदत कायम है। दोनों में रूटेड कहानियां कहने की फितरत है। तभी उनकी कहानियों में मास अपील है। मधुर सर की महिला प्रधान फिल्में तभी चल सकीं कि वो रूटेड कहानियां थीं। किसी की रीमेक नहीं थीं। राजामौली सर तो खैर विजनरी हैं। उन्होंने 'बाहुबली’ से पहले ही वीएफएक्स का टूल यूज करना शुरू कर दिया था।

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