MKT जिसके पैर की धूल को विभूति मानते थे फैन:इनकी कार के पहियों के निशान भी पूजते थे लोग, जर्नलिस्ट मर्डर केस में हुई थी उम्रकैद

2 महीने पहलेलेखक: ईफत कुरैशी

साउथ इंडिया के लोगों में रजनीकांत के लिए दीवानगी के बारे में तो आपने सुना ही होगा।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि तमिल फिल्म स्टार्स के लिए इस क्रेज की शुरुआत कहां से हुई थी?

हम बताते हैं। जो क्रेज रजनीकांत के लिए है, उससे कई गुना ज्यादा था MKT के लिए। MKT यानी मायावरम् कृष्णासामी त्यागराजन। ये तमिल सिनेमा के पहले सुपरस्टार थे। MKT साल 1934 में तमिल सिनेमा में आए, कुल 14 फिल्में कीं।

लेकिन लोगों में दीवानगी का आलम ऐसा था कि इनकी कार जहां से गुजर जाए, उसके पहियों के निशान की लोग पहले पूजा करते, फिर वो धूल घर ले जाते थे। इनको देखने भर के लिए ट्रेन रुकवा दी जाती थीं, फैंस ने अपने बच्चों के नाम इनकी फिल्मों के नाम पर रखे।

MKT तीन आलीशान बंगलों में रहते थे, उनके काफिले में कई गाड़ियां होती थीं और वे खाना हमेशा सोने की थाली में खाते थे, लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली कि पहले वो हत्या के आरोप में जेल गए। फिर छूटे तो सारी जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी। स्टारडम ऐसा गया कि फिर जिंदगी भर नहीं लौटा। फैंस की दीवानगी ने इन्हें स्टार बनाया, फिर मौत भी एक फैन के कारण ही हुई।

तो आज की अनसुनी दास्तानें में बात तमिल सिनेमा के पहले सुपरस्टार MKT की....

सिंगर बनने के लिए हो गए थे पिता के खिलाफ

MKT का जन्म 7 मार्च 1910 को मायावरम, तंजोर जिले में हुआ और उन्हें नाम दिया गया मायावरम कृष्णासामी त्यागराजन। ये सुनार कृष्णसामी आचार्य के बड़े बेटे थे। MKT को हमेशा से ही पढ़ाई में कम और गायिकी में ज्यादा दिलचस्पी थी। पुराने ख्यालों का होने के कारण पिता सिंगिंग के खिलाफ हो गए। पिता की नाराजगी ऐसी बढ़ी कि स्कूल से निकलवाकर MKT से सुनार की दुकान में काम करवाना शुरू कर दिया।

MKT ने कम उम्र में ही घर से भाग जाने का फैसला किया। घर से भागने के बाद छोटे-मोटे प्रोग्राम में गाना शुरू कर दिया। गायिकी का अंदाज ऐसा था कि उन्हें बड़े कार्यक्रमों में गाने का मौका मिलने लगा। उस समय उनकी उम्र महज 8-9 साल की रही होगी।

एक प्रोग्राम ने मिटा दीं बाप-बेटे की दूरियां

एक दिन आचार्य एक बड़े प्रोग्राम में पहुंचे। जब उनकी स्टेज पर नजर पड़ी तो उन्हीं का भागा हुआ बेटा MKT गाना गा रहा था। लोग वाह-वाह कर रहे थे। आचार्य ने बेटे के हुनर के आगे जिद छोड़ दी और उसे घर ले आए। अब उन्हें गाने से रोकने वाला कोई नहीं था।

हुनर से मिला फिल्मों में काम

साउथ इंडियन रेलवे के एक ऑफिसर एफजी नातेशा अय्यर ने एक प्रोग्राम में MKT को भजन गाते सुना। गायिकी से इम्प्रेस होकर अय्यर ने उनको हरिश्चंद्र प्ले में लोहितदास का रोल ऑफर किया। इसके लिए उन्होंने MKT के पिता से भी इजाजत ली। महज 10 साल की उम्र में MKT ने अपने अभिनय से लोगों की खूब तारीफें बटोरीं।

प्ले कामयाब रहा और उन्हें दिग्गज कलाकारों द्वारा ट्रेनिंग दी जाने लगी। MKT को गायिकी में ज्यादा दिलचस्पी थी, तो उन्होंने एक्टिंग के साथ 6 सालों तक मदुराई पोन्नू अयंगर से संगीत सीखा।

फिल्मों में लाने के लिए एक प्रोड्यूसर ने बना दी फिल्म

1934 में MKT ने माइथोलॉजिकल प्ले पावलाक्कोड़ी में अर्जुन का रोल निभाया। बिजनेसमैन लक्ष्मण चेत्तिर उनके अभिनय से इस कदर खुश हुए कि उन्होंने इस टाइटल के साथ MKT को लीड रोल देकर फिल्म बनाने का फैसला किया। ये फिल्म जबरदस्त हिट साबित हुई।

इनके पास एक खूबसूरत सफेद घोड़ा (जो फिल्म हरिदास में भी नजर आया) भी था और हर नई लग्जरी कार इनके काफिले में हुआ करती थी। ये सोने की थाली में खाना खाते थे।
इनके पास एक खूबसूरत सफेद घोड़ा (जो फिल्म हरिदास में भी नजर आया) भी था और हर नई लग्जरी कार इनके काफिले में हुआ करती थी। ये सोने की थाली में खाना खाते थे।

राजाओं की तरह जिंदगी जीते थे MKT

MKT अपने जमाने के सबसे अमीर एक्टर थे, जो लग्जरी लाइफ जीते थे। MKT मद्रास में 3 आलीशान बंगले बनवाए, जहां वो राजाओं की तरह रहते थे और सोने की थाली में खाना खाते थे।

चिंतामणि एक साल तक थिएटर में लगी रहने वाली पहली तमिल फिल्म थी

1937 में रिलीज हुई MKT की फिल्म चिंतामणि एक साल तक रायल थिएटर में लगी रही। एक साल तक थिएटर में लगी रहने वाली ये पहली तमिल फिल्म थी। फिल्म से इतनी कमाई हुई कि इससे रायल थिएटर के मालिक ने मदुरई में एक और थिएटर बनाया, जिसका नाम ही उन्होंने चिंतामणि रखा।

एक झलक देखने के लिए गार्ड ने रुकवा दी थी ट्रेन

MKT जहां कदम रखते उस मिट्टी को फैंस चूमते और घर ले जाते। एक बार कार से पुदुकोट्टाई रवाना हुए MKT को रेलवे क्रॉसिंग पर रुकना पड़ा। वहां इन्हें देखने वालों की भारी भीड़ जुट गई। जब ट्रेन करीब से गुजरी तो गार्ड की नजर MKT पर पड़ी। गार्ड ने ट्रेन रुकवा दी और MKT के पास जाकर उनका गाना सुनने की गुजारिश की। जब उन्होंने इनकार किया तो गार्ड ने बिना गाना सुने ट्रेन आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। MKT ने गाना सुनाया तो ट्रेन रवाना की गई।

इन्हें देखने पहुंचे बच्चे को लगा करंट तो खुद पहुंचे उसके घर

MKT के कॉन्सर्ट में इतनी बड़ी तादाद में लोग पहुंचते थे कि हमेशा जगह कम पड़ जाती थी। कई लोग पेड़ पर चढ़कर इन्हें देखते तो कई बिजली के खंभे पर। एक बार खंभे पर बैठकर इनका कॉन्सर्ट देखते हुए एक बच्चे को करंट लग गया। जैसे ही MKT को इसकी जानकारी मिली, वो खुद उस बच्चे के घर पहुंचे। MKT ने परिवार को 5,000 रुपए की आर्थिक मदद दी, जो उस जमाने में एक बड़ी राशि थी।

फैंस की भगदड़ से डर जाते थे पंडाल लगाने वाले

एक मंदिर में होने वाले कुछ दिनों के प्रोग्राम में MKT को पहले ही दिन परफॉर्मेंस देनी थी। पंडाल वाले ऑर्गेनाइजर के पास पहुंचे और गुजारिश करने लगे कि पहले दिन की बजाय MKT की परफॉर्मेंस आखिरी दिन रखी जाए। असल में, MKT को देखने आए लोगों में अक्सर भगदड़ मच जाती है और पंडाल टूट जाता था। पंडाल टूटने से खर्चा दोगुना हो जाता था। आखिरी दिन कॉन्सर्ट रखने का एक कारण ये भी था कि मजदूरों को पंडाल तोड़ने में मेहनत नहीं करनी पड़ती।

तीन किलोमीटर की भीड़ ने किया MKT का स्वागत

देवाकोट्टाई में एक कॉन्सर्ट के लिए MKT को लेने ऑर्गेनाइजर देवाकोट्टाई रोड रेलवे स्टेशन पहुंचे। महाराजाओं की बग्घी के साथ 3 किलोमीटर तक खड़ी हुई भीड़ ने उनका जोर-शोर से स्वागत किया।

ट्रेन में सफर करते तो खत्म हो जाते थे प्लेटफॉर्म टिकट

MKT जब भी ट्रेन में सफर करते थे तो उन्हें फैंस की गुजारिश पर हर स्टेशन पर उतरना पड़ता था। लिहाजा स्टेशन के प्लेटफॉर्म टिकट खत्म हो जाया करते थे और ट्रेन को डेस्टिनेशन तक पहुंचने में कई घंटों का डिले होता था।

सोने के कवर में रखा कंघा लेकर हर साल आता था एक फैन

MKT की हेयरस्टाइल साउथ में इतनी पॉपुलर थी कि लोग उन्हें खूब कॉपी करते थे। सालाना उनका एक फैंस इस इच्छा के साथ उनसे मिलने आता था कि उसे सिर्फ एक बार MKT के बालों में कंघा फेरने का मौका मिलेगा। वो हर बार कंघा फेरकर उसे सोने के कवर में रखता था।

एक अंगूठी निकालने के लिए कुएं में कूद गया फैन

काराइक्कुड़ी में रहने वाले सत्यसीलन MKT को एक तस्वीर में देखते ही ऐसे दीवाने हो गए कि उन्होंने अपना घर छोड़कर इन्हीं के साथ नौकर बनकर रहना शुरू कर दिया। सत्यसीलन ने अपना नाम ही MKT गोपाल रख लिया। एक बार नहाते हुए MKT की हीरे की अंगूठी कुएं में गिर गई। गोपाल ने ये देखते ही बिना कुछ सोचे कुएं में छलांग मारी और अंगूठी ढूंढ निकाली। ये देखकर MKT खुद भी शॉक हो गए। गोपाल ताउम्र MKT की सेवा करते रहे। उन्होंने अपने बच्चों के नाम भी MKT की फिल्मों पर चिंतामणि और शिवगामी रखा है। गोपाल का MKT से ऐसा गहरा रिश्ता बन गया कि नौकर होने के बावजूद MKT उनकी बेटी की शादी में पहुंचे और गाना भी गाया।

कॉन्सर्ट में हुई भगदड़ में लाठी पड़ी तो ताउम्र खुश रहा एक फैन

नागर्जन नाम का तिप्पिराजापुरम में रहने वाला MKT का एक फैन ऐसा भी था, जो लाठी चार्ज से बने जख्म को देखकर ताउम्र खुश रहा। त्रिची में MKT का एक कॉन्सर्ट हुआ था, जहां भीड़ का पागलपन देखकर पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इस लाठीचार्ज में नागर्जन के हाथों पर खूब लाठियां पड़ीं। उन्होंने जख्मी हाथ के साथ पूरा कॉन्सर्ट देखा।। अपने इस जख्म को नागर्जन गर्व समझते थे।

इंटीमेट सीन देने पर हुआ विवाद

1937 में ही MKT अमेरिकन फिल्म डायरेक्टर एलिस आर दुंगन की फिल्म अंबिकापाथी में नजर आए। ये फिल्म हिट जरूर हुई, लेकिन फिल्म में MKT और हीरोइन शांतनलक्ष्मी के बीच दिखाए गए इंटीमेट सीन पर खूब विवाद भी हुआ।

एक हत्या के आरोप से दागदार हुई पूरी जिंदगी

1944 में MKT, एक्टर एन.एस. कृष्णन और मूवी स्टूडियो के मालिक श्रीरामलू नायडु को पत्रकार लक्ष्मीकांत की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। लक्ष्मीकांत एक फिल्म जर्नलिस्ट था, जो आए दिन तमिल सेलेब्स की निजी जिंदगी पर आर्टिकल लिखता था। कई लोग मोटी रकम देकर लक्ष्मीकांत को आर्टिकल छापने से रोक दिया करते थे।

MKT उन लोगों में से थे, जिन्होंने मद्रास सरकार को शिकायत कर उस जर्नलिस्ट का लाइसेंस कैंसिल करवाया था। जब 8 नवंबर को लक्ष्मीकांत पर धारदार हथियार से हमला किया गया तो वो जख्मी हालत में अपने वकील दोस्त के पास गया और उसे पूरी घटना बताई।

अस्पताल ले जाते हुए उसका काफी खून बह चुका था, इसके बावजूद उसने रास्ते में जिद कर पुलिस स्टेशन में अपनी शिकायत दर्ज करवाई। उसकी शिकायत के अनुसार ही MKT को अन्य लोगों के साथ हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया गया। हत्या के आरोप में उन्हें उम्रकैद मिली। फिर 3 साल बाद दोबारा नए सिरे से केस की सुनवाई हुई और उन्हें हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया।

12 फिल्में छोड़कर 3 साल तक काटी जेल की सजा

जिस समय 1944 में MKT को गिरफ्तार किया गया, उस समय उनके पास 12 फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट था। जैसे ही वो जेल गए तो उनकी कई फिल्में दूसरे कलाकारों के पास चली गईं।

जब 1947 में उन्हें जेल से छोड़ा गया तो उनका आत्मविश्वास पूरी तरह खत्म होने लगा था। राजा की तरह जिंदगी जीने वाले MKT को मिली उम्रकैद की सजा ने उन्हें अंदर से तोड़ दिया। उन्होंने कई फिल्में करने से इनकार कर दिया और जो बची हुई फिल्में कीं उनमें से लगभग सारी फ्लॉप हो गईं।

फिल्में चलना बंद हो गईं, लेकिन अपने स्टारडम से MKT अपने कॉन्सर्ट में खूब भीड़ इकट्ठा कर लिया करते थे। कई राजनीतिक पार्टियों के लीडर उन्हें अपनी पार्टी में लेने की कोशिश करते रहे, लेकिन MKT ने हमेशा खुद को राजनीति से दूर रखा।

जेल से निकलने के कुछ समय बाद ही MKT ने हर तरह का मोह त्याग दिया और अध्यात्म की राह पकड़ ली। कई तीर्थ यात्राएं कीं और पूरी तरह से पैसों और कामयाबी से दूरी बना ली। अपना ज्यादातर समय MKT घर से दूर मंदिरों और आश्रमों में गुजारते थे।

स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान इंसुलिन लेकर करते थे परफॉर्म

MKT डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज थे। डायबिटीज ऐसी कि स्टेज परफॉर्मेंस के दौरान ही उन्हें इंसुलिन लेनी पड़ती थी।

फैन की दी हुई दवाई से मौत

अक्टूबर 1959 में MKT पोलाची में कॉन्सर्ट करने पहुंचे थे। स्टेज पर उन्हें इंसुलिन लेते देख एक फैन उनके पास पहुंचा। उस फैन ने उन्हें ये कहते हुए एक आयुर्वेदिक टॉनिक दिया कि इससे डायबिटीज पूरी तरह ठीक हो जाएगी। दवाई लेते ही MKT की तबीयत ऐसी बिगड़ी कि उन्हें 22 अक्टूबर 1959 को मद्रास के एक अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा। एक हफ्ते तक चले इलाज के बाद MKT ने 1 नवम्बर 1959 को शाम साढ़े 6 बजे दम तोड़ दिया। MKT की उम्र उस समय महज 49 साल थी।

MKT का अंतिम संस्कार त्रिची के पास संगीलियांदापुरम में हुआ था। MKT के अंतिम दर्शन में ऐसा जनसैलाब आया कि उनकी यात्रा को घर से श्मशान घाट तक पहुंचाने में 4 घंटे लग गए।

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