भास्कर इंटरव्यू:कंगना रनोट के बिना 'तनु वेड्स मनु' बन ही नहीं सकती, उनको ध्यान में रखकर अगली कहानी लिखूंगा-हिमांशु शर्मा

13 दिन पहलेलेखक: किरण जैन
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फिल्म 'तनु वेड्स मनु' (2011) और 'तनु वेड्स मनु रिटर्न्स' (2015) के लेखक हिमांशु शर्मा इस फ्रेंचाइजी को आगे बढ़ाना चाहते हैं। हिमांशु की मानें तो 2015 में रिलीज हुई कंगना रनोट और आर. माधवन स्टारर इस फिल्म का सीक्वल बिना किसी प्री-प्लानिंग के बना था। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान हिमांशु ने बताया कि इसका तीसरा वर्जन भी कुछ ऐसा ही होगा।

कंगना के बिना 'तनु वेड्स मनु' संभव ही नहीं
तनु वेड्स मनु एक प्लान्ड मूवी थी, जो ऑडियंस के बीच हिट रही। उस वक्त हमने बिलकुल नहीं सोचा था कि इस फिल्म का सीक्वल भी बनाएंगे। फिल्म के हिट होने के बाद भी हमने सीक्वल के बारे में नहीं सोचा था। हालांकि, जब कुछ साल बीते और मेरे जेहन में एक कहानी आई तो मैंने उसे इस फिल्म के सीक्वल के लिए लिखा जिसे भी ऑडियंस ने पसंद किया। अभी भी यदि कोई ऐसी कहानी मेरे दिल को छू जाए तो तनु वेड्स मनु का तीसरे वर्जन पर जरूर काम करूंगा।

कंगना के बिना तो ये फिल्म बन ही नहीं सकती, अगली कहानी भी उनको ध्यान में रखकर लिखूंगा। निश्चित रूप से, ऑडियंस की उम्मीदों को ध्यान में रखकर, हमें एक सक्षम प्रेम कहानी की जरूरत है। इसे हम अनदेखा नहीं कर सकते।

मियां-बीवी ने भाई-बहन की स्क्रिप्ट लिखी
अक्षय कुमार की आगामी फिल्म 'रक्षाबंधन' की कहानी हिमांशु और उनकी पत्नी कनिका ढिल्लन ने मिलकर लिखी हैं। इस बारे में वे कहते हैं, "मैंने और कनिका ढिल्लन ने पहली बार साथ मिलकर इस फिल्म की कहानी लिखी है। अक्षय सर कभी-कभी मस्ती में कह देते थे कि तुम मियां-बीवी ने बड़ी अच्छी भाई-बहन की स्क्रिप्ट लिखी है। फिल्म पुरानी दिल्ली के सेटअप की कहानी है जिसमें अक्षय और भूमि के अलावा हमने 4 नई लड़कियों को भी कास्ट किया है। फिल्म एक जरिए ऑडियंस को हम एक भाई-बहन की खूबसूरत भरी इमोशनल जर्नी दिखाने की कोशिश करेंगे।"

बहुत ईमानदारी से 'अतरंगी रे' लिखी, इस बात का गर्व है
बतौर लेखक, हिमांशु की हाल में रिलीज हुई अक्षय कुमार, सारा अली खान और धानुष स्टारर फिल्म 'अतरंगी रे' को मिक्स्ड रिव्यु मिले है। हिमांशु शर्मा की मानें तो उन्होंने अपना बेस्ट दिया था। उनके हिसाब से जैसे ऑडियंस नए सब्जेक्ट या नए कंटेंट देखना चाहती है, उसी तरह बतौर लेखक वे भी अब नई ऑडियंस की तलाश में हैं।

इस बारे में कहते हैं, "मैंने बहुत ईमानदारी से इस फिल्म की कहानी लिखी और मुझे इस बात का गर्व भी है। जो सब्जेक्ट हमने चुना वो आज तक किसी और फिल्ममेकर ने नहीं हाथ लगाया। अब कुछ 50-60 क्रिटिक के ओपिनियन से फिल्म का रिजल्ट तय नहीं करता। ये घिसेपिटे क्रिटिक अपने ओपिनियन दे देते हैं और उनके कहने के मुताबिक फिल्म का रिव्यू तय होता है जोकि गलत है। ऑडियंस को ये फिल्म अच्छी लगी और हम ऑडियंस के लिए ही फिल्म बनाते हैं। यह मेंटल इलनेस पर एक फिल्म है कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं। जैसे लोग हमसे एक्सपेक्ट करते हैं कि हम नए-नए कंटेंट के साथ उनका मनोरंजन करें, वैसे हम भी एक्सपेक्ट करते हैं कि हमारी ऑडियंस भी नई हो, नई सोच के साथ। खुशी है कि हमारी इस फिल्म से हमें ये देखने को मिला।"

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