दिलीप कुमार का निधन:डॉक्टर्स की कोशिश थी कि दिलीप साहब उम्र के सौ साल पूरे करें, लेकिन लंग्स में इंफेक्शन बहुत ज्यादा हो गया था

3 महीने पहलेलेखक: अमित कर्ण
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  • दिलीप साहब के करीबी दोस्त फैजल फारूखी ने दैनिक भास्कर से की खास बातचीत

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार के करीबी दोस्त फैजल फारूखी ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की और उनके आखरी समय की कुछ खास बातें शेयर की हैं। फैजल ने बताया कि अस्पताल में एडमिट होने के लिहाज से इस बार की बात करें तो उनके निधन से 5-7 दिन पहले से उनकी तबीयत नासाज तो हो रही थी। हालांकि डॉक्टर्स का कहना था कि इस बार भी वो डिस्चार्ज हो करके अपने घर चले जाएंगे। डॉक्टर को पूरी उम्मीद थी कि दिलीप साहब उम्र का शतक तो जरूर लगाएंगे। उनके लंग्स में कफ जमा हो जाता था, इसे एक किस्म का निमोनिया कहा जाता है। उसकी वजह से उनके लंग्स काफी कमजोर हो गए थे। इस बार भी उसी रीजन से वह हॉस्पिटल में एडमिट हुए थे मगर इस बार वो ठीक नहीं हो पाए। हॉस्पिटल में उनका ब्लड प्रेशर बहुत ड्रॉप हो गया और इस वजह से वो चल बसे।

ट्वीट वर्ड को प्रिंट बोलते थे दिलीप कुमार

फैजल फारूखी बताते हैं, "मुझको बहुत मुश्किल हुई है। दिलीप साहब के लिए मैं ट्वीट किया करता था। शुरू-शुरू में साहब तो खुद ही बोला करते थे कि यह लिखकर मैसेज भेज दो, वह ट्वीट वर्ड नहीं बोला करते थे। वह प्रिंट बोलते थे, इसको प्रिंट कर दो। उस पर जो मैसेज बहुत इमोशनली टचिंग होते थे तो उसको वह कहा करते थे कि जवाब दे दो तो मैं उनके साथ बैठ कर जवाब दे दिया करता था, वो बहुत परफेक्शनिस्ट आदमी थे।"

दिलीप साहब के कपड़ों पर छोटा सा स्पॉट भी नहीं रहने देती थी सायरा बानो

फैजल फारूखी ने आगे बताया, "शुरूआत में जब ट्विटर के बारे में उन्हें लाइनअप करके बताया जाता था, तो मैं और दिलीप साहब टेरेस पर अक्सर बैठा करते थे। उनको भी एक खुशी रहती थी कि वो लोगों से बात कर पा रहे हैं। जब उनकी तबीयत थोड़ी नासाज रहने लगी तब सायरा जी मैसेजेस पोस्ट किया करती थीं। सायरा जी अगर कहा करतीं कि कुछ फोटोग्राफ लेने हैं तो उस पर वह कहा करते थे, क्यों फोटोग्राफ्स लेनी हैं? तो उन्हें समझाया जाता था कि लोग आपको देखना चाहते हैं। उम्र के साथ बदलाव तो आते ही हैं, लेकिन सायरा जी उनके आखिरी पलों में उनकी महबूबा थीं, उनकी केयरटेकर थीं, नर्स थीं और डॉक्टर थीं और ऑफकोर्स बीवी भी थीं। सायरा जी उनकी देखभाल बिल्कुल परफेक्शन के साथ करतीं थीं अगर दिलीप साहब के कपड़ों पर कोई स्पॉट आ जाते थे तो सायरा जी परफेक्शनिस्ट की तरह उनके साथ रहती थीं। अगर दिन में 10 बार कपड़े बदलने पड़ते थे तो वह भी सायरा जी किया करती थीं।"

टेंपरेचर कंट्रोल करने के लिए घंटों मशक्कत करती थीं सायरा

फैजल फारूखी कहते हैं, "अगर दिलीप साहब के गले में एक नैपकिन भी लगा होता था तो सायरा जी उस पर डीके नाम से सिग्नेचर मार्क लगाती थीं। सायरा जी ने वह कमी कभी किसी को महसूस नहीं होने दी। हम और आप अपनी मां के लिए पिता के लिए शायद उतना नहीं कर पाएंगे, जितना सायरा जी ने दिलीप साहब के लिए किया। यह तो मैं अक्सर उनको छेड़ा भी करता था कि सायरा जी आपको तो इस पर एक पूरी किताब लिखनी चाहिए। इस पर सायरा जी कहा करती थीं कि यह मैं बुक लिखने के लिए नहीं कर रही हूं, यह तो मेरी ड्यूटी है। अगर साहब को ठंड लगती थी तो सायरा जी आधे घंटे तक मेहनत करती थीं उनका टेंपरेचर कंट्रोल करने के लिए।"

पिछले 20 सालों में फिल्मों की बातें काफी कम करने लगे थे दिलीप कुमार

फैजल फारूखी आगे कहते हैं, "आखिरी पलों में दिलीप साहब फिल्मों की बातें नहीं करते थे। खासकर मुझसे तो बिल्कुल नहीं किया करते थे। हां, जब कभी उनका दिल होता था और हम जॉगर्स पार्क में वॉक कर रहे होते थे या फिर गाड़ी से कहीं जा रहे होते थे उस वक्त कई सीन पर वह इनऐक्ट करते थे। पिछले चार-पांच साल में उनका पढ़ना लिखना तो जरा कम हो गया था, लेकिन खाने में वो हमेशा अच्छा खाना चाहते थे। अच्छा खाना खाने का उन्हें बहुत शौक था। वो जिंदगी के सारे लुत्फ लेते थे। 5 साल पहले तक उनकी तबीयत थोड़ी ठीक थी। हां, 10 साल पहले से वह जरा स्लो हो गए थे। उन्हें फिल्मों से दिलचस्पी साल 2000 से कम हो गई थी। ऐसे में मेकर्स उनके पास ऑफर लेकर आते भी थे तो वो लगभग ना ही कह देते थे। उस जमाने में वह राज्यसभा मेंबर भी थे, तो वैसे भी वो फिल्मों पर जरा भी इंटरेस्ट नहीं लेते थे।"

बच्चों के साथ बहुत ज्यादा टाइम स्पेंड करते थे

फैजल फारूखी ने पुराने समय को याद करते हुए बताया, "औलाद न होने के पर उन्होंने कभी किसी से कोई ऐसा जिक्र नहीं किया। उनके दिल में भले क्या इमोशन थे वह पढ़ना तो बड़ा मुश्किल था। लेकिन मुझे यह पता है कि, वह बच्चों से बहुत मोहब्बत करते थे। उनके घर में कोई अगर बच्चों के साथ आता था तो दिलीप साहब बहुत खुश हो जाते थे। वो उनके साथ बहुत टाइम स्पेंड करते थे। एक दिन उन्होंने खुद मुझे बोल दिया, 'मैंने बहुत दिनों से तुम्हारे बच्चों को नहीं देखा है। बुला लो उनको।' जब मेरे बच्चे उनके पास आए तो उन्होंने उनके साथ खूब एंजॉय किया। फिर मैंने उनसे कहा कि साहब बच्चों के साथ आपकी एक फोटो हो जाए। बड़े होने पर वह भी कहेंगे कि उन्होंने दिलीप कुमार के साथ वक्त बिताया था कभी। उस पर उन्होंने कहा, 'अरे यह बच्चे क्या जाने, क्या दिलीप कुमार'।"

शाहरुख खान की देवदास नहीं देख पाए थे दिलीप कुमार

फैजल फारूखी ने दिलीप कुमार और शाहरुख खान के रिश्ते पर बात करते हुए कहा, "जब शाहरुख खान की फिल्म 'देवदास' आई थी तब उस वक्त मैंने उनसे कहा था कि शाहरुख कह भी रहे हैं कि उन्होंने दिलीप साहब से बहुत कुछ सीखा है। वह अपके लिए प्राइवेट स्क्रीनिंग रखना चाहते हैं। उस पर दिलीप साहब ने कहा कि अच्छा बच्चा है, अच्छा ही किया होगा। वैसे निजी मुलाकात दिलीप साहब से शाहरुख की मेरी नजर में तो बहुत कम रही थी। अक्सर उनकी किसी की शादी के फंक्शन में या फिर फिल्म के इवेंट में मुलाकात हो जाया करती थी। सोशल विजिट जरूर उन्होंने 4 साल पहले की थी। जब दिलीप साहब बीमार पड़े थे तब शाहरुख उन्हें देखने आए थे। उस समय की फोटो काफी वायरल हुई थी।"

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