कान्स 2022:तीसरे दिन 'मुजीब-द मेकिंग ऑफ अ नेशन' का ट्रेलर हुआ लॉन्च, बांग्लादेश राष्ट्रपिता की बायोपिक है फिल्म

3 महीने पहले
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75वें कान्स फिल्म फेस्टिवल की शुरुआत हो गई है। कान्स का ये संस्करण भारत के लिए खास है। इस साल भारत को समारोह में कंट्री ऑफ ऑनर का दर्जा मिला है। वहीं इस फेस्टिवल में फिल्ममेकर श्याम बेनेगल की फिल्म 'मुजीब-द मेकिंग ऑफ अ नेशन' का ट्रेलर लॉन्च किया गया है।

मुजीब बांग्लादेश के फादर ऑफ नेशन कहे जाने वाले शेख मुजीबुर्रहमान के लाइफ पर बेस्ड है। ट्रेलर लॉन्च में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने फिल्म को लेकर कहा कि दो देशों के बीच यह फिल्म बड़ी भूमिका निभाएगी।

मैत्रीपूर्ण संबंधों को दर्शाती है फिल्म
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'मुजीब' दोनों देशों के बीच अच्छे और मित्रतापूर्ण रिलेशन को दिखाती है। इसके साथ ही फिल्म यह उदाहरण भी दिखाती है कि दो राष्ट्र कैसे एक साथ डेवलेप हो सकते हैं। बांग्ला भाषा बहुत प्यारी है, यह हम सबको आपस में जोड़ती है। यह फिल्म बड़ी भूमिका निभाएगी। ठाकुर ने कहा कि बंगबंधु पर फिल्म के को-प्रोडक्शन का विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना ने रखा था।

दो साल तक चली शूटिंग
मुजीब की शूटिंग दो साल तक हुई और इसके पोस्ट प्रोडक्शन का काम पिछले साल दिसंबर में पूरा हुआ था। बांग्लादेशी एक्टर अरिफिन शुवू फिल्म में मुजीब का किरदार निभा रहे हैं। वहीं, फजलुर रहमान बाबू, चंचल चौधरी, नुसरत इमरोज तिशा और नुसरत फारिया भी फिल्म में मुख्य भूमिका में दिखाई देंगी। इस फिल्म का एक्शन डायरेक्शन शाम कौशल ने किया है। वहीं इसकी कहानी अतुल तिवारी और शमा जैदी ने लिखी है।

मुजीब मेरे लिए इमोशनल फिल्म है: श्याम
डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने कहा कि मुझे इस फीचर फिल्म में काम करके बहुत मजा आया। भारत के राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम और बांग्लादेश फिल्म विकास निगम के साथ काम करना बेहद मजेदार रहा। मुजीब मेरे लिए बहुत ही इमोशनल फिल्म है। 'बंगबंधु' के कैरेक्टर को रील लाइफ पर लाना मेरे लिए बहुत मुश्किल रहा।

कौन थे मुजीब
मुजीब ने 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए राजनीतिक नेतृत्व प्रदान किया। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों में मुजीब महात्मा गांधी से मिले, जो जनता को सशक्त बनाने के लिए उनके लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत थे। यह बायोपिक मुजीब के जीवन का एक जश्न है यह हमें इतिहास के उस दौर में ले जाती है जिसे दर्शक फिर से जीवंत होते देखेंगे। फिल्म में उस महान नेता को दिखाया गया है जिसकी उपलब्धियां आज भी जिंदा हैं।

मुजीब का जन्म एक प्रतिष्ठित मुस्लिम परिवार में हुआ था और वह एक धार्मिक और सौहाद्रपूर्ण माहौल में पले-बढ़े थे। वह गरीबों के प्रति बहुत दयालु थे और उनके प्रति सहानुभूति रखते थे। उन्होंने पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान के बीच असमानता एवं अभाव और पाकिस्तानी सैन्य शासन के खिलाफ संघर्ष किया। 1947 से 1971 की अवधि में उन्हें लगभग 11 वर्षों के लिए जेल भी गए। उन्होंने एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र "बांग्लादेश" के गठन का प्रयास किया और अपना यह लक्ष्य हासिल किया। इसलिए मुजीब को 'बंगबंधु' के रूप में बांग्लादेश का राष्ट्रपिता माना जाता है।

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