रिव्यू:लॉकडाउन के चलते लगी लंका में सवाईवल का डंका है 'अनपॉज्ड नया-सफर', राइटर्स, एक्टर्स और डायरेक्टर ने किया कमाल

4 महीने पहलेलेखक: अमित कर्ण
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एमेजॉन प्राइम की इस एंथोलॉजी में पांच अलग कहानियां हैं। उनके टाइटिल 'द कपल', 'वॉर रूम', 'तीन तिगाड़ा', 'गोंद के लड्डू' और 'वैकुंठ' हैं। इन्‍हें नुपुर अस्‍थाना,अयप्‍पा केएम, रूचिर अरुण, शिखा माकन और सैराट फेम नागराज मंजूले ने डायरेक्‍ट किया है। इन पांचों कहानियों में मेन लीड किरदारों की जिंदगी में लॉकडाउन के चलते उपजे हालातों ने लाइफ की लंका लगाई हुई है। ऐसे में वो किस तरह सर्वाइवल की लड़ाई लड़ते हैं, उसे बिना लाग लपेट और शुगर कोट किए डायरेक्‍टरों ने पेश किया है। मेकर्स ने सभी किरदारों के सामने तकरीबन डू या डाय जैसी सिचुएशन में रखा है।

EMI जेनेरेशन की कहानी
'द कपल' में आकृति और डिप्‍पी EMI जेनेरेशन से बिलॉन्‍ग करने वाले मिडिल क्‍लास कपल हैं। कोविड के चलते ग्‍लोबल मंदी के कारण अचानक आकृति की जॉब चली जाती है। उस जैसी स्‍वाभिमानी लड़की के लिए यह डायजेस्‍ट कर पाना बहुत मुश्किल है। वो उसकी फ्रस्‍ट्रेशन पति पर निकालने लगती है। इसे उसका पति अपने मेल ईगो के मद्देनजर कैसे डील करता है, यह उसकी कहानी है। कंट्रोल फ्री आकृति को श्रेया धनवंतरी ने उम्‍दा तरीके से पेश किया है। उसके पति डिप्‍पी को प्रियांशु पेनयुली ने उस ठहराव और नए पन के साथ साथ पेश किया है, जो मिर्जापुर सीजन 2 के बाद से उनका सिग्‍नेचर बना हुआ है।

कोविड वारियर का द्वंद
'वॉर रूम' में एक टीचर संगीता वाघमारे का द्वंद है। कोविड काल में उसकी ड्यूटी कोविड वॉर रूम में टेलीकॉलर की लगी हुई है। अचानक एक दिन उसके पास हॉस्पिटल में बेड के जरूरतमंद ऐसे कोविड पेशेंट का फोन आता है, जिसने पास्‍ट में उसके साथ बहुत बुरा किया है। संगीता अब क्‍या करेगी, डायरेक्‍टर अयप्‍पा केएम ने संगीता को बिना महान बनाए एक रॉ एंड रियल ट्रीटमेंट रखा है। संगीता के रोल में गीतांजली कुलकर्णी हैं। उनके पास 'गुल्‍लक2' की शांति मिश्रा से लेकर यहां संगीता वाघमारे का कमाल का रेंज है।

लॉकडाउन के मारे बेचारे
'तीन तिगाड़ा' तीन ऐसे भटके युवा चंदन, चेट्टा और डिंपल की कहानी है, जिनका चोरी का माल बिक नहीं रहा। वजह यह कि लॉकडाउन लगा हुआ है। मजबूरन उन तीनों को कुछ दिन एक जर्जर स्‍टोर रूम में साथ रहना है। तीनों अलग मिजाज के हैं। खुद को इंट्रोस्‍पेक्‍ट करते हुए तीनों के रिश्‍ते उतार-चढ़ाव से गुजरते हैं। डायरेक्‍टर रूचिर अरुण ने इसमें साकिब सलीम और आशीष वर्मा से बेहतरीन अदायगी करवाई है। चेट्टा के रोल को भी संबंधित कलाकार ने ऊंचाइयां प्रदान की है। तीनों के गिल्‍ट असरदार तरीके से उभरकर सामने आए हैं।

मां के प्यार की कहानी 'गोंद के लड्डू'
'गोंद के लड्डू' में मां बेटी के इमोशनल रिश्‍ते बड़े प्‍यारे बन पड़े हैं। हाल ही में मां बनी अपनी बेटी को गोंद के लड्डू का पार्सल करने में जो सुशीला त्रिपाठी की जद्दोजहद है, वह दिलचस्‍प बन पड़ी है। डायरेक्‍टर शिखा माकन ने इसमें डिलेवरी बॉय रोहन और उसकी वाइफ का खूबसूरत पैरेलल सब प्‍लॉट जोड़ा है। सुशीला को अदाकारा नीना कुलकर्णी ने अपने अनुभव से रोचक और प्रेरक बनाया है।

नागराज मंजुले का वैकुंठ
'वैकुंठ' में सैराट फेम नागराज मंजूले अपने डायरेक्‍शन के साथ साथ अदाकारी का भी नया प्रतिमान स्‍थापित किया है। लाश जलाने वाले शख्‍स विकास चव्‍हान को बेहद कम डायलॉग्‍स दिए गए हैं। उसकी विडंबना दिल दहलाने वाली है। वह शमशान में सबकी लाशें जलाता है, पर उसके पिता को कोविड होने पर उसका मकान मालिक ही उसे निकालने पर तुल जाता है। विकास अपने छोटे बच्‍चे को लेकर कहां जाता और क्‍या करता है, उसे नागराज मंजूले ने मार्मिक ढंग से पेश किया है।

इस एंथोलॉजी में सारी कहानियां इमोशन के कंधों पर सवार हैं। आप को रोने और ठहरकर सोचने पर मजबूर करती हैं। आम सी लगने वाली कहानियां बेहद बारीक और दिल को छू जाती हैं।

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