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बॉलीवुड की 'शेरनी' की कहानी:तीन सालों तक रिजेक्शन झेलती रही थीं विद्या बालन, मनहूस कहकर साउथ फिल्म डायरेक्टर ने निकाल दिया था फिल्म से बाहर

एक महीने पहले
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बॉलीवुड में अपनी जबरदस्त एक्टिंग का लोहा मनवाने वाली विद्या बालन की आज एक और फिल्म 'शेरनी' रिलीज हो गई है। फिल्म में विद्या बालन की एक्टिंग की काफी तारीफ हो रही है। वैसे, विद्या आज जहां एक्ट्रेस बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन एक्ट्रेस में से एक हैं वहीं एक समय ऐसा भी था जब विद्या को लगातार तीन सालों तक रिजेक्शन का सामना करना पड़ा था। आइए जानते हैं कैसा था विद्या का संघर्ष से कामयाबी तक का सफर...

'हम पांच' के वक्त 16 साल की थीं विद्या।
'हम पांच' के वक्त 16 साल की थीं विद्या।

'हम पांच' में आईं नजर

विद्या ने महज 16 साल की उम्र में एकता कपूर के शो 'हम पांच' से पहचान हासिल की थी। नॉन फिल्मी बैकग्राउंड से ताल्लुक रखने वाली विद्या को हमेशा से ही एक्टिंग में दिलचस्पी थी हालांकि उनका परिवार इसके खिलाफ था। सबसे पहले विद्या को टीवी शो 'ला बैला' से अपना हुनर दिखाने का मौका मिला लेकिन ये शो शुरू होने के कुछ महीनों बाद ही बंद हो गया। मुंबई मिरर को दिए एक इंटरव्यू में विद्या में बताया कि शायद शो बंद होने के बाद उनके परिवार वालों ने राहत की सांस ली होगी और कहा होगा कि चलो अभी तो भूत उतर जाएगा। लेकिन विद्या पीछे हटने वालों में से नहीं थीं।

मनहूस समझने लगे थे लोग

'हम पांच' शो खत्म होने के बाद अनुराग बसु ने उन्हें टीवी शो का ऑफर दिया लेकिन एक्ट्रेस ने फिल्मी दुनिया में शामिल होने की ख्वाहिश के चलते ऑफर ठुकरा दिया। मास्टर डिग्री पूरी करने के दौरान विद्या को मलयालम फिल्म 'चक्रम' मिली जिसमें उनके साथ पॉपुलर एक्टर मोहनलाल लीड रोल में थे। प्रोडक्शन में हुई गड़बड़ के चलते फिल्म को रोक दिया गया। फिल्म रुकने पर सबने विद्या को दोषी ठहराया। फिल्म के प्रोड्यूसर ने विद्या को मनहूस कहते हुए फिल्म से रिप्लेस कर दिया।

तीन साल तक किया रिजेक्शन का सामना

मलयालम फिल्म के बुरे एक्सपीरियंस के बाद विद्या ने अपना फोकस तमिल फिल्मों की तरफ कर लिया। उन्हें एन लिंगुस्वामी की फिल्म 'रन' में लीड रोल निभाने का मौका मिला हालांकि पहले शेड्यूल के बाद ही उन्हें फिल्म से हटा दिया गया था। इसके बाद उन्हें तीसरी तमिल फिल्म 'मनासेलम' मिली। लेकिन डायरेक्टर के विद्या के काम से संतुष्ट ना होने पर उन्हें इस फिल्म से भी निकाल दिया गया। तीन नाकाम डेब्यू की कोशिश के बाद विद्या को मलयालम फिल्म 'कलारी विक्रमन' मिली, लेकिन ये फिल्म पूरी होने के बावजूद रिलीज नहीं हो सकी।

'परिणीता' के लिए जीता था बेस्ट फीमेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड।
'परिणीता' के लिए जीता था बेस्ट फीमेल डेब्यू का फिल्मफेयर अवॉर्ड।

'परिणीता' फिल्म से मिली पहचान

कई नाकाम कोशिशों के बाद विद्या ने बंगाली फिल्म 'भालो ठेको' से साल 2003 में एक्टिंग करियर की शुरुआत की, जिसके लिए उन्हें आनंदलोक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इस फिल्म में एक्ट्रेस की बेहतरीन अदाकारी देखने के बाद डायरेक्टर प्रदीप सरकार ने उन्हें 'परिणीता' फिल्म का ऑडिशन देने के लिए कहा। फिल्म के प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा इस फिल्म के लिए एक अनुभवी एक्ट्रेस की तलाश में थे, लेकिन बाद में वो विद्या की लगन देखकर राजी हो गए। पहली ही फिल्म के लिए उन्हें बेस्ट फीमेल डेब्यू के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया। इसके बाद विद्या के करियर ने रफ्तार पकड़ ली और आज वो इंडस्ट्री की सबसे टैलेंटेड एक्ट्रेसेस में से एक हैं।

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