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भास्कर इंटरव्यू:52 साल के हुए विक्रम भट्ट बोले- OTT प्लेटफॉर्म पर फ्रीडम ज्यादा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप कुछ भी बना दें

3 महीने पहलेलेखक: ज्योति शर्मा
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'फरेब', 'गुलाम', 'फुटपाथ' और '1920' जैसी फिल्मों के निर्देशक विक्रम भट्ट 52 साल के हो गए हैं। 27 जनवरी 1969 को मुंबई, महाराष्ट्र में जन्मे भट्ट ने अपने जन्मदिन के मौके पर दैनिक भास्कर के साथ अपनी जिंदगी से जुड़ी कई बातें साझा की। उनसे हुई बातचीत के अंश:

Q. ओटीटी पर भी आपने काफी काम किया है। फिल्मों के मुकाबले वेब सीरीज में क्रिएटिव फ्रीडम ज्यादा है। दोनों प्लेटफॉर्म्स को आप कैसे देखते हैं?
A. ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बहुत ज्यादा फ्रीडम है। मैं हमेशा मानता हूं कि फ्रीडम के साथ जिम्मेदारियां भी आती हैं। सिर्फ फ्रीडम से काम नहीं चलता, आपको रिस्पॉन्सिबल भी होना पड़ेगा। आप यह नहीं कर सकते कि आपको फ्रीडम मिली है तो आप कुछ भी बनाएं। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कई तरह के फायदे हैं।

Q. निजी जिंदगी पर कॉन्ट्रोवर्सी का कितना असर पड़ता है?
A.
एक वक्त था, जब ऐसी बातों का निजी जिंदगी पर असर पड़ता था। लेकिन धीरे-धीरे आप ऐसी चीजों पर ज्यादा ध्यान देना बंद कर देते हैं। मुझे लगता है कि लोगों की याददाश्त इतनी अच्छी नहीं होती कि वे पुरानी बातों को ज्यादा याद रख सकें। एक समय था, जब मैं कॉन्ट्रोवर्सी में छाया रहता था। उस वक्त लोगों को पता था, लेकिन शायद आज लोगों को इस बारे में याद भी न होगा। अपनी जिंदगी को सच्चाई के साथ जीना जरूरी है।

Q. आपने मुकुल एस. आनंद, शेखर कपूर और महेश भट्ट जैसे अलग-अलग डायरेक्टर्स के साथ काम किया है। आप पर किसका सबसे ज्यादा असर रहा है?
A.
मुझे लगता है कि महेश भट्ट जी हैं। क्योंकि उन्हें मैं तब से जानता हूं, जब मेरे पिताजी उनके साथ काम करते थे। मेरे पिताजी प्रवीण भट्ट कैमरामैन थे। मेरे पिताजी ने ज्यादातर फिल्में महेश भट्ट के साथ ही कीं। इसलिए मैं बचपन से ही उनको देखता आ रहा हूं।

विक्रम भट्ट ने कहा- महेश भट्ट सिर्फ मेरे गुरु ही नहीं, एक समय मैं उन्हें महेश अंकल भी कहा करता था।
विक्रम भट्ट ने कहा- महेश भट्ट सिर्फ मेरे गुरु ही नहीं, एक समय मैं उन्हें महेश अंकल भी कहा करता था।

Q. महेश भट्ट से आपने क्या सीखा ?
A.
मैं हमेशा सभी से कहता हूं कि मैंने महेश भट्ट से फिल्म मेकिंग कम सीखी है, लेकिन उनसे जिंदगी जीना सीखा है। मैंने अपनी जिंदगी में काफी उतार-चढ़ाव देखे हैं। जो भी रहा है या जिंदगी के क्या मायने हैं? जिंदगी हमें क्या सिखाना चाहती है? ये मैंने उनसे बातें करते हुए, उन्हें देखते हुए सीखा है। मेरा मानना है कि फिल्म मेकिंग कहीं न कहीं उसी में छुपी हुई है। जो जिंदगी ढंग से नहीं जी सकता, वह फिल्में क्या बनाएगा?

Q. आपका करियर रोमांटिक फिल्म से शुरू हुआ, जो थ्रिलर, मिस्ट्री और फिर हॉरर फिल्मों की ओर मुड़ गया। इतना बड़ा चैंज कैसे हुआ ?
A.
मैंने करियर की शुरुआत में लव स्टोरी बनाई। क्योंकि मुझे लगता था कि मैं नया डायरेक्टर हूं और मुझे ऐसी फिल्में बनानी चाहिए जो मार्केट में ज्यादा चल रही हैं। फिर धीरे-धीरे समझ आया कि मुझे ऐसी फिल्में बनानी चाहिए, जो खुद को पसंद आएं। क्योंकि जो खुद को पसंद नहीं होगा, वह लोगों को कैसे पसंद आएगा। फिर मैंने इस बारे में सोचा कि मुझे किस तरह की कहानियां पसंद हैं? तो समझ आया कि मुझे बचपन से ही थ्रिलर, मिस्ट्री और हॉरर कहानियां पसंद हैं। बस मैंने अपने आप से कहा कि जब मुझे ऐसी चीजें पसंद है तो मैं बाकी दूसरी चीजों पर वक्त क्यों जाया कर रहा हूं।

Q. क्या कोई ऐसी घटना थी, जिसने हॉरर जोनर में आपका इंट्रेस्ट बढ़ा दिया?
A.
ऐसा नहीं है। मैंने दूसरी फिल्में भी बनाई हैं। लेकिन मेरी हॉरर फिल्में लोगों को ज्यादा पसंद आईं। जैसे मैंने बिपाशा बसु को लेकर 'क्रिएचर 3 D' बनाई, करिश्मा कपूर को लाकर 'डेंजरस इश्क' बनाई। लेकिन बदकिस्मती से ये फिल्में चली नहीं। जो फिल्में चल जाती हैं, उनकी वजह से आप पहचाने जाने लगते हैं।

विक्रम भट्ट और बिपाशा बसु 'क्रिएचर 3D' की एक स्क्रीनिंग के दौरान।
विक्रम भट्ट और बिपाशा बसु 'क्रिएचर 3D' की एक स्क्रीनिंग के दौरान।

Q. सीक्वल और रीमेक का दौर है। आप खुद भी सीक्वल बना चुके हैं। क्या कभी 'गुलाम' का रीमेक या सीक्वल बनाने के बारे में सोचा है?
A.
देखिए 'गुलाम' जो है वह आमिर खान के बिना नहीं बन सकती। अगर आमिर खान चाहेंगे 'गुलाम' फिर से बने और वे भी उसमें काम करेंगे, तभी यह फिल्म बन सकती है, वरना मुमकिन नहीं है।

Q. अगर मौका मिले तो बॉलीवुड की किस फिल्म का रीमेक या सीक्वल बनाना चाहेंगे? A. ऐसी कई फिल्में है, जिनको लेकर मुझे लगता है कि मैं इस फिल्म को बना सकता या इस फिल्म पर आगे चलकर काम कर सकता हूं। मेरी ही बनाई हुई '1920' है। मैं सोचता हूं कि काश मैं उसकी कहानी को आगे ले जाकर लोगों को दिखा पाऊं। ऐसी और भी कई फिल्में हैं, जिन पर मैं काम करना चाहता हूं।

Q. आपकी बनाई हुई फिल्मों में से आपकी पसंदीदा फिल्म और कोई ऐसी फिल्म जिसे आप और बेहतर तरीके से बना सकते थे?
A.
देखिए मेरी ऐसी कई फिल्में हैं, जिनके बारे में मैं सोचता हूं कि मैं इसे और बेहतर तरीके से बना सकता था। या फिर मैं अगर इसे इस समय रिलीज करता तो ज्यादा बेहतर चलती। मेरी बनाई हुई कई फिल्में ऐसी हैं, जो मुझे बहुत पसंद हैं। लेकिन मेरे साथ एक चीज है कि जो चीज मैंने कर ली उसके बाद मैं ज्यादा सोचता नहीं। पीछे मुड़कर नहीं देखता।

Q. किस एक्टर के फैन हैं?
A.
मैं बचपन से लेकर आज तक केवल एक ही एक्टर का फैन रहा हूं और वो हैं अमिताभ बच्चन। मैं आज भी यूट्यूब पर ज्यादा से ज्यादा समय उनकी पुरानी फिल्मों के सीन देखते हुए बिताता हूं।

मरते दम तक अमिताभ बच्चन का फैन रहूंगा : विक्रम भट्ट।
मरते दम तक अमिताभ बच्चन का फैन रहूंगा : विक्रम भट्ट।

Q. अगर आपको अपने जन्मदिन पर पूरा दिन अमिताभ बच्चन जी के साथ बिताने का मौका मिले तो आप क्या करेंगे?
A.
मैं चुपचाप एक कोने में बैठ कर उनके काम को देखता रहूंगा।

Q. लाइफ में कोई रिग्रेट?
A.
मैंने लाइफ में जो भी किया मैं उसे लेकर कभी भी रिग्रेट नहीं करता। जो मेरी बुरी फिल्में आईं, उनसे भी मैंने बहुत कुछ सीखा है। इसलिए मैं अपनी बुरी फिल्मों के बारे में या अपने लिए गए निर्णयों के बारे में ज्यादा सोचता नहीं।

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