अनसुनी दास्तानें:विमी को पति ने छोड़ा, प्रेमी ने प्रॉस्टिट्यूशन में धकेला; 34 की उम्र में मौत, ठेले पर लाश श्मशान भेजी गई

3 महीने पहले

एक जमाने की सबसे खूबसूरत एक्ट्रेस मानी जाने वालीं विमी पहली ही फिल्म हमराज के बाद स्टार बन गई थीं। इस फिल्म के बाद उनके घर के बाहर प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स की लाइनें लगा करती थीं। हमराज, वचन, आबरू, पतंगा जैसी बेहतरीन फिल्मों में नजर आईं विमी 60 के दशक में 3 लाख रुपए फीस लिया करती थीं।

विमी को फिल्मी दुनिया में खूब शोहरत मिली, लेकिन उनकी निजी जिंदगी ऐसे बदतर हालात में गुजरी जिसकी कल्पना करना भी काफी मुश्किल है। पति को छोड़कर जिसके साथ जिंदगी गुजारनी चाही उसी शख्स ने उन्हें शराब की लत लगा दी और प्रॉस्टिट्यूशन की तरफ धकेल दिया। करियर 10 साल में बर्बाद हो गया, तो विमी तंगहाली में अकेले जिंदगी काटने को मजबूर हो गईं।

जिंदगी जितनी दर्दनाक रही, उससे भी बुरी थी मौत। 34 साल की उम्र में विमी कई दिनों तक अस्पताल के जनरल वॉर्ड में भर्ती रहीं और जब मौत हुई तो न कोई श्मशान घाट पहुंचाने वाला था और न कंधा देने वाला। आखिरकार विमी की लाश को चायवाले के ठेले में रखकर श्मशान घाट पहुंचाया गया।

आज अनसुनी दास्तानें में पढ़िए एक जमाने की स्टार रहीं विमी की दर्दनाक कहानी-

पति की मदद से फिल्मों में आई थीं विमी
विमी का जन्म आजादी की लड़ाई के माहौल में 1943 को जालंधर, पंजाब में हुआ। कम उम्र में ही विमी की शादी उस जमाने के मशहूर इंडस्ट्रियलिस्ट के बेटे शिव अग्रवाल से हो गई। विमी के पेरेंट्स इनकी शादी के खिलाफ थे। इस शादी से विमी को दो बच्चे हुए।

कलकत्ता में पति के साथ एक पार्टी में पहुंचीं विमी की मुलाकात म्यूजिक डायरेक्टर रवि से हुई। रवि विमी की खूबसूरती के कायल हो चुके थे। रवि ने विमी से कहा- आप फिल्मों में काम क्यों नहीं करतीं? जवाब मिला- मैं दो बच्चों की मां ठहरी, मुझे फिल्मों में काम कौन देगा?

रवि ने विमी और उनके पति शिव को मुंबई आने का न्यौता दिया और वहां उनकी मुलाकात बीआर चोपड़ा से करवाई। यहीं बीआर चोपड़ा ने इन्हें पहली फिल्म हमराज का ऑफर दिया।

परिवार के खिलाफ जाकर लिया एक्ट्रेस बनने का फैसला
ससुरालवाले नहीं चाहते थे कि विमी फिल्मों में काम करें, लेकिन इन्हें पति का सपोर्ट मिला। शिव ने अपने माता-पिता का साथ छोड़ा तो उन्हें जायदाद से बेदखल कर घर से निकाल दिया गया। अब घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी विमी के कंधों पर आ चुकी थी।

पहली ही फिल्म से रातों-रात स्टार बन गई थीं विमी
1967 में रिलीज हुई फिल्म हमराज से विमी ने हिंदी सिनेमा में कदम रखा। फिल्म में राजकुमार, सुनील दत्त और मुमताज लीड रोल में थे, लेकिन ज्यादातर लोगों की नजर विमी की खूबसूरती पर थी। पहली फिल्म के बाद ही विमी को साइन करने के लिए घर के बाहर डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स की लाइनें लगने लगीं।

हमराज के बाद विमी ने अशोक कुमार, निरुपा रॉय के साथ आबरू, पृथ्वीराज कपूर के साथ नानक नाम जहाज है, शशि कपूर के साथ पतंगा और वचन जैसी फिल्में कीं। विमी जया बच्चन और धर्मेंद्र स्टारर गुड्डी में भी छोटी सी भूमिका में नजर आईं। उस जमाने में विमी हर फिल्म के 3 लाख रुपए लिया करती थीं।

परीकथा से खौफनाक सपना बनी विमी की जिंदगी
हमराज फिल्म के बाद विमी एक स्टार बन गईं। इनके पास कई बड़े ऑफर थे, सपोर्ट करने वाला पति था, शोहरत थी और लाखों चाहनेवाले, लेकिन जल्द ही विमी इन सब की मोहताज होने वाली थीं।

विमी के सिर चढ़ गई थी कामयाबी
बीआर चोपड़ा के साथ फिल्मों में एंट्री करने वाली विमी ने उनके साथ 3 फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था। इस समय तक पति शिव विमी के सेक्रेटरी बनकर उनकी फिल्मों में हस्तक्षेप करने लगे थे।

विमी को कई फिल्मों के ऑफर मिले थे, लेकिन बीआर चोपड़ा के कॉन्ट्रैक्ट के चलते वो फिल्में साइन नहीं कर पा रही थीं। कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने के लिए विमी और शिव, बीआर चोपड़ा को परेशान करने लगे थे।

विमी को उस समय बीआर चोपड़ा की फिल्म की शूटिंग करनी थी, लेकिन आखिरी समय पर उन्होंने ये कहते हुए इनकार कर दिया कि वो आउटडोर शूटिंग नहीं करेंगी। बीआर चोपड़ा तुरंत फ्लाइट से उनके घर पहुंच गए। दोनों में बहस हुई और आखिरकार बीआर चोपड़ा ने उन्हें कॉन्ट्रैक्ट से आजाद कर दिया।

लगातार फ्लॉप हुईं तो सड़कों पर आईं
विमी कुल 10 फिल्मों में नजर आईं, जिनमें से ज्यादातर फिल्में फ्लॉप हो रही थीं। पहली फिल्म के बाद उन्हें कई ऑफर मिले थे, लेकिन चंद फ्लॉप फिल्मों के बाद ही प्रोड्यूसर्स ने अपने हाथ पीछे खींच लिए। फिल्में मिलना बंद होने लगीं और देखते-ही-देखते सारी जमा पूंजी खत्म हो गई। फिल्मों से निराशा मिली तो विमी ने कलकत्ता में विमी टेक्सटाइल कंपनी खोली, लेकिन ये भी कर्जे में डूब गई।

पैसे मिलने बंद हुए तो पति ने शुरू कर दी मारपीट
विमी उस समय जुहू के बंगले में रहा करती थीं, लेकिन जब गरीबी आई तो वो सबर्ब जाकर आम जिंदगी जीने लगीं। आर्थिक तंगी का दौर आया तो पति शिव शराब के आदी हो गए और विमी से मारपीट करने लगे। शिव विमी पर छोटे प्रोड्यूसर्स के साथ मामूली काम करने का दबाव बनाया करते थे।

प्रोड्यूसर ने दिया सहारा तो छोड़ा पति का घर
पति से रिश्ते खराब होते चले गए और इसी समय विमी को फिल्म प्रोड्यूसर जॉली से प्यार हो गया। विमी पति को छोड़कर जॉली के साथ रहने लगीं। ये प्यार भी महज कुछ दिनों तक ही विमी की जिंदगी में रहने वाला था। चंद दिनों बाद जॉली ने विमी को शराब की लत लगवा दी। विमी का करियर पूरी तरह बर्बाद हो गया।

शराब ने बर्बाद कर दी विमी की जिंदगी
विमी को फिल्मों में लाने का क्रेडिट म्यूजिक कंपोजर रवि को जाता है। इन्हीं कंपोजर से विमी की कोर्ट के बाहर मुलाकात हुई थी। विमी पति से तलाक के मुकदमे के चलते कोर्ट पहुंची थीं। इस समय विमी पूरी तरह नशे में डूबी हुई थीं और उनके साथ प्रेमी जॉली भी मौजूद था। जैसे ही विमी ने रवि को देखा तो रोते हुए पति की शिकायत कर आपबीती सुनाने लगीं। रवि ने उन्हें दिलासा दी कि वे उनके पति शिव से बात करेंगे। रवि इस मुलाकात के बाद म्यूजिक कॉन्सर्ट के वर्ल्ड टूर पर निकल गए। जब वो वापस आए तो विमी का निधन हो चुका था।

जॉली के कहने पर प्रोड्यूसर्स के साथ वक्त बिताती थीं विमी
खबरें ये भी रहीं कि जॉली विमी को काम दिलाने के नाम पर दूसरे प्रोड्यूसर्स के साथ सोने पर मजबूर करता था। प्यार की मोहताज हो चुकीं विमी उसकी बातें मानने लगीं और प्रोड्यूसर्स से मिलने जाने लगीं। विमी के करीबी दोस्त कृष्णा ने भी इस बात की पुष्टि की थी कि वो प्रोड्यूसर्स से मिलने अलग-अलग होटल जाने लगी थीं और प्रॉस्टीट्यूशन का हिस्सा बन गई थीं।

इन सब के बावजूद जॉली विमी को टॉर्चर करता रहा। विमी ने जॉली से सारे रिश्ते तो खत्म किए, लेकिन तब तक वो शराब की आदी हो चुकी थीं और यही शराब की लत उनकी मौत का कारण बनी। करियर, बिजनेस सब बर्बाद हो चुका था। विमी लाइमलाइट से दूर हो गईं और अकेले जिंदगी बिताने लगीं।

शराब ने दी दर्दनाक मौत
महज 34 साल की उम्र में विमी का लिवर पूरी तरह खराब हो चुका था। बीमारी का इलाज करवाने के लिए पैसे नहीं थे। जैसे-तैसे जॉली ने ही इन्हें मुंबई के नानावटी अस्पताल के जनरल वॉर्ड में भर्ती करवाया। जहां 22 अगस्त 1977 को विमी की मौत हो गई। अस्पताल में भर्ती विमी की किसी भी परिवार वाले या दोस्त ने खबर नहीं ली।

ठेले में रखकर श्मशान घाट पहुंचाई गई थी डेडबॉडी
हालात इतने बदतर थे कि विमी को अस्पताल से श्मशान घाट पहुंचाने वाला या कंधा देने वाला भी कोई मौजूद नहीं था। आखिरकार जॉली ने ही एक चायवाले का ठेला कुछ समय के लिए मांगा और ठेले में रखकर उन्होंने विमी की डेडबॉडी श्मशान घाट पहुंचाई। मौत की खबर मिली तो सिर्फ 9 लोग अंतिम संस्कार में पहुंचे, जिनमें प्रोड्यूसर तेजनाथ जार, एसडी नारंग के भाई भी थे।

मौत से 5 दिनों पहले शरीर पर थे चोट के निशान
विमी के निधन के बाद बीआर चोपड़ा ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि मौत से 5 दिन पहले विमी उनसे माफी मांगने पहुंची थीं। विमी काफी नशे में थीं और उनके शरीर से सस्ती शराब की बदबू आ रही थी। गौर किया तो देखा कि विमी के हाथ और शरीर पर गहरे चोट के निशान हैं। उस समय विमी काफी परेशान लग रही थीं।

मौत जिंदगी से ज्यादा सुकून देने वाली थी
विमी के करीबी दोस्त कृष्णा ने विमी की मौत को उनके लिए पेन रिलीवर बताया। उनका कहना था कि जिस दर्दनाक हालात में विमी ने जिंदगी गुजारी उससे कई गुना ज्यादा बेहतर उनके लिए मौत थी।

अगले शनिवार पढ़िए एक और फिल्मी सितारों की अनुसनी कहानी।