भास्कर इंटरव्यू:'रसोड़े में कौन था' फेम यशराज मुखाते बोले- एक सोशल मीडिया पेज से आया डायलॉग पर म्यूजिक बनाने का आइडिया

8 महीने पहलेलेखक: ज्योति शर्मा

'रसोड़े में कौन था' फेम यशराज मुखाते एक ऐसे यूट्यूबर हैं, जो अपने अलग तरह के म्यूजिक के जरिए सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं। खासकर उनका डायलॉग्स को गाने के रूप में पेश करना यानी उनकी पैरोडी बनाना ऑडियंस को खूब पसंद आता है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में उन्होंने अपने इस टैलेंट के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने क्या कहा? पढ़िए उन्हीं की जुबानी...

एक सोशल मीडिया पेज से आया आइडिया

मैं यह दो साल से बना रहा हूं। सबसे पहला वीडियो मैंने नित्यानंद बाबा का बनाया था। इससे पहले मैंने डब शर्मा नाम के आर्टिस्ट के सोशल मीडिया पेज पर यह चीज देखी थी। वो कॉमेडी के फॉर्मेट में नहीं करते थे, बल्कि उनके वीडियो सीरियस और मजेदार होते थे। उन्होंने एक डायलॉग को लेकर गाना भी बनाया था, जो मुझे बहुत पसंद आया। खासकर आइडिया बहुत अच्छा लगा। उसके बाद मैंने उन्हीं के आइडिया पर अपने म्यूजिक वीडियो बनाना शुरू किया, जो लोगों को पसंद आए।

पिताजी से सीखा की-बोर्ड बजाना

मैं बचपन से ही म्यूजिक में हूं। क्योंकि मेरे पिताजी इससे जुड़े हुए हैं। वे गाते हैं, कीबोर्ड बजाते हैं। मैंने की-बोर्ड बजाना उन्हीं से सीखा। इसलिए म्यूजिक बचपन से ही मेरे साथ रहा। मम्मी ने कहा कि इंजीनियरिंग कंप्लीट कर लो, फिर तुन्हें जो करना है, कर लेना। तीन साल पहले मेरी इंजीनियरिंग कंप्लीट हुई। उसके बाद से मैं प्रोफेशनली म्यूजिक कर रहा हूं। हालांकि, पढ़ाई करते समय भी मैंने म्यूजिक को पूरी तरह नहीं छोड़ा था। स्कूल से वापस आकर की-बोर्ड बजाता था। सोने से पहले एक-दो घंटे म्यूजिक को देता था। अब पढ़ाई करने के बाद फुल टाइम म्यूजिक को दे रहा हूं।

शो के ऑडिशन में हुआ था रिजेक्ट

मैं एक रियलिटी शो के ऑडिशन के लिए गया था, जहां पहले ही राउंड में पहली लाइन गाने से पहले ही मुझे निकाल दिया गया था। मैं वापस घर आ गया। पैरोडी पहले भी बनाता था। मैंने अपने ओरिजिनल गाने भी रिलीज किए। मेरे पैरोडी वाले फॉर्मेट को लोगों ने बहुत पसंद किया। क्योंकि उन्हें कुछ नया देखने को मिल रहा था। इसके अलावा यह छोटा कंटेंट होता है 30-40 सेकंड का तो लोग जल्दी देखकर स्क्रोलिंग शुरू कर देते हैं। जब इन वीडियो पर मुझे रीच ज्यादा म्मिली तो मैंने इन्हें ज्यादा बनाना शुरू कर दिया।

फिल्मों में काम नहीं मिला अब तक

​​​​​​​फिल्मों की बात होती रहती है। हफ्ते में कभी-कभी एक-दो कॉल आ जाते हैं। कभी कोई मीटिंग के लिए बुला लेता है तो कभी कोई मेरा रिकमंडेशन कर देता है डायरेक्टर को। लेकिन अभी तक मुझे फिल्म का पूरी तरह काम मिला नहीं है। हां, ब्रांड का काम लगातार आता रहता है। सीरीज का काम मिलता रहता है। मैं एक मराठी सीरियल में पहले ही बैकग्राउंड स्कोर दे चुका था। लेकिन अब बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस भी ऑफर दे रहे हैं।

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