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भास्कर इंटरव्यू:'ओके कंप्यूटर' फेम विजय वर्मा ने कहा- हमने पैंडेमिक के पहले हूबहू यही कहानी शूट की थी

10 दिन पहलेलेखक: ज्योति शर्मा
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कॉमेडी साइंस फ्रिक्शन आधारित सीरीज 'ओके कंप्यूटर' रिलीज हो चुकी है। सीरीज में रोबोट और पैंडेमिक की कहानी दिखाई गई है। इस शो में विजय वर्मा ने रोबोट के खिलाफ जंग लड़ने वाले साइबर सेल ऑफिसर का किरदार निभाया है। उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत की और बताया कि उन्होंने पैंडेमिक के पहले हूबहू यही कहानी शूट की थी। साथ ही उन्होंने सीरीज से जुड़ी कुछ अहम बातें बताईं।

Q-लॉकडाउन कैसा रहा?

A-लॉकडाउन काफीं इंटरेस्टिंग रहा, बहुत कुछ सीखने को मिला। खुद पर काम करने का एक मौका था। मगर उसके बाद फिर से काम शुरू करने की भूख जगी। मैंने लगभग दिसंबर से काम दुबारा करना शुरु कर दिया है। मैं बिजी हूं और आगे भी ऐसा लग रहा है कि बिजी ही रहूंगा।

Q-अपने किरदार के बारे में बताएं क्या खास तैयारी की थी?

A-यह एक हाफ स्क्रिप्ट है और आप सब सीरीज देखेंगे, तो पता चलेगा कि इस तरह की कहानी कभी बताई नहीं गई है। जिस तरीके से हमारी कोशिश है, उस तरीके से तो एकदम नहीं बताई गई होगी। हमने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की है जो मजेदार है। हमने फिल्म की शूटिंग पैंडेमिक से पहले शुरु कर दी थी। स्क्रिप्ट में इसी तरह के वायरस वाले अटैक की कल्पना है। इमानदारी से कहूं तो इस विषय पर गहराई से रिसर्च किया गया था। जब लॉकडाउन हुआ, तो मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ था कि यह सब तो हमने आलरेडी शूट कर लिया है। मेरा किरदार साजन गुड्डू का है जो एक साइबर सेल ऑफिसर है। इस पैंडेमिक के दौरान उसने अपना घर छोड़ दिया है और वो सिर्फ अपनी गाड़ी में ही रहता है। जो इस समय हो रहा है उसे हमने पहले ही शूट कर लिया था और यह सोच कर मुझे बड़ा अजीब लग रहा है।

Q-लॉकडाउन के समय अगर ये सीरीज रिलीज होती तो यह ज्यादा सफल और रेल्वेन्ट होती?

A-अगर उस समय ऐसा हो पाता तो निश्चित तौर पर सीरीज ज्यादा सफल होती। मगर हम आज भी पैंडेमिक की गिरफ्त में हैं और अभी तक हमें इससे छुटकारा नहीं मिला है। विजुअल इफेक्ट्स में टाइम तो लगता है। उस समय कुछ टीम लंदन में थी, कुछ यूरोप के दूसरे पार्ट में थी, कुछ टीम स्पेन में थी, हमारे डायरेक्टर गोवा में थे, मैं मुंबई में था और राधिका यू.के में थी। ऐसे में हम लोगों ने अलग-अलग जगह पर रहकर इसकी डबिंग की है। जब लॉकडाउन खुला फिर जाकर स्टूडियो में उसको एडिट किया। मगर हमने इसके लिए कोई जल्दबाजी नहीं की, जैसा हम इसको बनाना चाहते थे एकदम वैसे ही हम फिल्म को बना रहे हैं। यह फिल्म एक साथ पांच भाषाओं में रिलीज हो रही है।

Q-क्या वजह है कि आप रोबोट गाड़ी के पीछे पड़े हैं?

A-यह ऑफिसर साइबर सेल में इसलिए काम करता है, क्योंकि यह टेक्नोलॉजी को समझता है। यह बहुत ही शार्प और इंटेलिजेंट इंसान है। यह उस तरह की टेक्नोलॉजी बना भी चुका है और उसको समझता भी है। इसके पेरेंट्स डी.जे थे जैसे ही डी.जे में सॉफ्टवेयर म्यूजिक बनना शुरू हुआ, उन लोगों की जॉब चली गई। इसके दिमाग में यह बात थी कि इस टेक्नोलॉजी ने मेरे मां-बाप की नौकरी खा ली। उसके बाद कुछ-कुछ ऐसे किस्से होते गए जिसके बाद उसे लगा कि यह रोबोट हमें बर्बाद करने के लिए आए हैं। बाद में वह साइबर ऑफिसर बनता है, तभी से उसके जेहन में यह बात थी कि वह उन सब को तोड़ देगा, खत्म कर देगा।

Q-रियल लाइफ में आप कितने टेक्नोलॉजी सेवी हैं और उसे कितना इस्तेमाल करते हैं?

A-जितना एक साधारण आदमी होता है उतना ही टेक्नोलॉजी सेवी हूं। लेकिन हां! मैं टेक्नोलॉजी का हाथ पकड़ कर चलता हूं। जो यह टूल्स होते हैं, वह हमारा काम आसान कर देते हैं। मैं बहुत बड़ा गेमर हूं मुझे गेम बहुत पसंद हैं। नया फोन, नए गैजेट्स, की मुझे आदत है। ऐसी कोई भी चीज जो मेरे जीवन को और आसान बनाएं वेसे गैजेट्स को मैं पसंद करता हूं। मैं टेक्नोलॉजी में एक्सपर्ट तो नहीं हूं मगर बेसिक नॉलेज मुझे जरूर है।

Q-अगर आपको अपने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के साथ एक पूरा दिन बिताने को मिले और विकल्प में वह चीज जो आपको सबसे ज्यादा पसंद है तो आप उन दोनों में क्या चुनेंगे?

A-अब तो सब मिक्स हो चुका है। अगर हम नेचर के करीब हैं और हमें एक फोटो खींचना है तो भी हमें कम से कम एक मोबाइल तो चाहिए ही। आज की तारीख में दोनों साथ में चल रहे हैं। हमें कहीं जाना हो तो गूगल मैप चाहिए ही। तो आज की जिंदगी में जिस दौर में हम जी रहे हैं उसमें बिना टेक्नोलॉजी के हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। जैसे कि मोटर कार, ट्रेन, फ्रेश वाटर यह सब कुछ ऐसी चीज हैं जो हमारे जीवन का हिस्सा बन गई हैं। मगर मैं हिल स्टेशन पर जाकर अच्छी फोटो क्लिक कर सकूं, इसे जरूर चूज करूंगा।

Q-स्कूलिंग में पढ़ाई के दौरान आपको साइंस और कंप्यूटर कितना पसंद आता था?

A-मुझे कंप्यूटर और साइंस दोनों से बहुत डर लगता था। कंप्यूटर को समझने में मुझे बहुत साल लग गए, मैं सोचता था कि यह क्या चीज है? कैसे सब कुछ हो रहा है? मैं इसमें क्या करूं? मुझसे कोई गलती तो नहीं हो रही है। साइंस क्लास में भी मैं बहुत अच्छा स्टूडेंट नहीं था क्योंकि एक तो पढ़ाई पर मेरा खुद का ध्यान नहीं था और दूसरी तरफ घर वालों का भी कुछ ऐसा नजरिया था कि पढ़ लो तो ठीक है, नहीं पढ़े तो कोई बात नहीं। मैं मारवाड़ी परिवार से हूं, मेरे परिवार वालों को लगा था कि मैं फैमिली बिजनेस ही ज्वाइन करूंगा।

Q-शूट के दौरान सेट का कोई किस्सा या यादगार पल जो आप पाठकों या दर्शकों के साथ शेयर करना चाहें?

A-यह एक कॉमेडी सीरीज है और मैं पहली बार कॉमेडी कर रहा हूं। सबसे ज्यादा तकलीफ मैंने ही दी है क्योंकि मुझे हंसी बहुत जल्दी आ जाती है। सीन के बीच में कुछ भी ऐसा हो या कोई डायलॉग ऐसा हो तो मेरी हंसी रुकती नहीं थी। उसकी वजह से मेरे बहुत सारे रीटेक भी हुए। लोग कहते थे कि आधे घंटे की रील बन सकती है जिसमें विजय सिर्फ हंसता हुआ दिखेगा। शो में कुछ ऐसे डायलॉग हैं जब उसे एक्टर बोलते थे तब मुझे बहुत हंसी आती थी।

Q-ऐसा कौन सा एक्टर था जिसके सामने आपको ऐक्ट करने में मुश्किल हुई?

A-मेरे साथ, कनिका का जो किरदार है जो फिल्म में मेरी जूनियर कलीग बनी है। उसका ड्रामाटिक कॉमेडी टाइमिंग बहुत फनी है। वह जब भी कुछ बोलती थीं तो मुझे बहुत हंसी आती थी, बाकी जग्गू दादा ने मुझे बहुत हंसाया है। कुल मिलाकर कहें तो सीरीज की स्क्रिप्ट ऐसी है कि आपको देख कर बहुत हंसी आएगी।

Q-जैकी श्रॉफ का कोई स्टाइल जो खुद ही आपके जीवन का हिस्सा बन गया हो?

A-वह एक जगह पर बोलते हैं कि नाक की हड्डी में से सांस लें, मैं उस समय हंसने लगा था कि यह कैसे हो सकता है।

Q-साल 2021 आपके लिए बहुत बेहतर है आपके पास 'डार्लिंग' और 'हुड़दंग' जैसी कई फिल्में हैं तो आप किस तरह से मैनेज कर रहे हैं और अभी किस फिल्म पर काम कर रहे हैं?

A-फिलहाल मैं राजस्थान में 'फोल्लोविंग' की शूटिंग कर रहा हूं। उसके बाद फिर 'डार्लिंग' चालू होगी। मैं सिर्फ काम करते रहना चाहता हूं। मैनेज करने वाले लोग दूसरे होते हैं। मैं उनसे सिर्फ इतना कहता हूं कि एक काम से दूसरे काम के बीच थोड़ा सा मौका दे दें जिससे मैं फ्रेश हो सकूं।

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