भास्कर खास:पिछले लॉकडाउन की तुलना में इस बार ज्यादा डरे हुए हैं टीवी कलाकार, सर्वाइव करने के लिए किसी ने कार बेची तो कोई अपने घर लौट गया

2 वर्ष पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
  • कॉपी लिंक
सिंगर सोना मोहपात्रा की मानें तो म्यूजिक कमिटी दिक्कत में चल रही हैं। वहीं कॉमेडियन सुनील पाल कार बेचने के बाद प्रॉपर्टी बेचने की तैयारी में हैं। - Dainik Bhaskar
सिंगर सोना मोहपात्रा की मानें तो म्यूजिक कमिटी दिक्कत में चल रही हैं। वहीं कॉमेडियन सुनील पाल कार बेचने के बाद प्रॉपर्टी बेचने की तैयारी में हैं।

कोरोना वायरस और लॉकडाउन के चलते कई महीनों तक पूरी इंडस्ट्री की शूटिंग-मीटिंग बंद रही। अनलॉक होने पर प्रोटोकॉल को फॉलो करते हुए कुछ फिल्मों, धारावाहिकों और वेब सीरीज की शूटिंग शुरू हुई ही थी कि दोबारा लॉकडाउन लगने के आसार नजर आने लगे हैं। शनिवार, रविवार को पूरी तरह शूटिंग बंद रखने का फरमान जारी हुआ है। आगे भी खुलने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं। अगर दोबारा लॉकडाउन हुआ तो आर्टिस्ट खासकर साइड रोल निभाने वाले या दिहाड़ी मजदूर कैसे सर्वाइव कर पाएंगे? इसे लेकर दैनिक भास्कर ने कुछ आर्टिस्ट से बातचीत की तो पाया कि उनमें भुखमरी के हालात के साथ दिल-ओ-दिमाग में खासा डर बैठा है। जानते हैं आर्टिस्ट की कहानी, उन्हीं की जुबानी:-

घर चलाने के लिए गाड़ी निकाल दी है, प्रॉपर्टी बेचने की कोशिश कर रहा हूं: सुनील पॉल
सब कुछ बेचकर सरवाइव करने की कोशिश कर रहे हैं। कोई अपनी गाड़ी, कोई प्रॉपर्टी तो कोई टीवी बेच रहा है। मेरे दोस्त के रोजाना फोन आते हैं कि भाईसाहब मेरा सामान बिकवा दीजिए। सरकार ने लॉकडाउन बोलकर बात खत्म कर दी। उसके बाद जनता पर क्या गुजरती है, वह खुद जाने। जनता को एक हो जाना चाहिए। क्योंकि सबकी प्रॉब्लम एक है। सरकार से इसके समाधान के लिए सवाल करना चाहिए। लॉकडाउन लगने का मतलब सबको एक न एक वक्त में भीख मांगने की बारी आएगी। घर चलाने के लिए गाड़ी, जेवर, बर्तन, महंगा फोन आदि बेचना पड़ेगा। अभी तक मैंने अपनी पुरानी गाड़ी निकाल दी है। एकाध छोटी प्रॉपर्टी बची है, उसे बेचने की कोशिश कर रहा हूं। क्योंकि साल भर से हमारे प्रोग्राम चले नहीं हैं। शूटिंग ठीक से हुई नहीं और खर्चे अपनी जगह पर हैं। सब करना पड़ता है।

मेरा ड्राइवर ने कहा कि गांव जाना है। मैंने कहा रुक जा। वह बोला- 'नहीं, आप पगार तो देते हो, लेकिन आपका जो प्रोग्राम चलता था। शूटिंग होती थी, उससे हमारी एक्स्ट्रा इनकम होती थी, वह बंद हो गई है। पगार से घर चलता नहीं है।' खैर, वह अपने गांव चला गया। घर में सर्वेंट कम कर दिए हैं। ज्यादातर काम खुद करते हैं। अब जब सबकुछ खुद करना पड़ रहा है तो पता चला कि नरेंद्र मोदी जी ने क्यों कहा था कि आत्मनिर्भर बनो। कुछ 20 प्रतिशत लोग हैं, जो सच्चे हैं। बाकी 80 प्रतिशत बेईमान हैं और उनकी वजह से हम 20 प्रतिशत लोग बहुत परेशान और तंगहाली में हैं।

मेरी कोई लाचारी वाली स्टोरी नहीं है, लेकिन म्यूजिक कमेटी दिक्कत में है- सोना मोहपात्रा
पर्सनली मेरी कोई लाचारी वाली स्टोरी नहीं है। लेकिन हमारी म्यूजिक कमेटी अभी बहुत दिक्कत से गुजर रही है, क्योंकि काम बंद हुए साल भर से ऊपर हो चुका है। अपनी बात करूं तो यंग बैंड मैन और म्यूजिशन को सलाह देती हूं कि अगर आपकी सेविंग खत्म हो गई है तो मुंबई में रेंट देना बंद करो और अपने घर चले जाओ। क्योंकि अभी मुंबई म्यूजिक सिटी नहीं रहा। अपने वक्त का इस्तेमाल करते हुए कोई बैकअप प्लान बनाओ और आगे बढ़ो।

अब तक जितनी मदद कर सकते थे, वह की। अब अपने बारे में सोचना पड़ेगा। डिप्रेशन-सा हो गया है कि आगे जाकर कब काम शुरू करेंगे। इलेक्शन रैली तो बहुत जोर-शोर से हो रही हैं। लेकिन म्यूजिक कंसर्ट की बात आती है तो लगता है कि कोरोना यहीं से फैलेगा। इस बात पर चर्चा करना ही डिप्रेशन वाली बात है।

पिछले साल से ज्यादा सदमा तो इस बार लग रहा है- चंद्रमणि मिश्रा
पिछले साल तो इंडस्ट्री से काफी लोग मदद के लिए आगे आए थे। लेकिन इस साल आसार नहीं दिख रहे हैं। कहते हैं कि जब तक इनकम न हो, तब तक कितना भी बैलेंस क्यों न हो, वह टिकता नहीं है। पिछली बार तो मैं गांव चला गया था। जमीन-जायदाद की देख-रेख की। घर का सपोर्ट मिला और कुछ बैलेंस था, जिसके चलते वह वक्त कट गया। लेकिन इस साल तो बड़ी प्रॉब्लम नजर आ रही है। मुंबई आकर जनवरी, 2021 से 'इमली', 'ये हैं चाहतें', 'क्राइम पेट्रोल', 'ऐशू' जैसे धारावाहिकों में काम करना शुरू किया।

लाइफ पटरी पर आई ही थी कि अब पता चल रहा है कि फिर से लॉकडाउन होने वाला है। घर पर माताजी भी बीमार चल रही हैं। पहले काम चल रहा था तो खर्च करने के बारे में सोचता नहीं था। लेकिन अब काम बंद हो रहा है तो कंजूसी के साथ खर्च करना पड़ रहा है। पिछले साल से ज्यादा सदमा तो इस बार लग रहा है, क्योंकि इस बार तो कोई हेल्प भी करने को आगे नहीं आ रहा है। ऊपर से यह कब तक चलेगा, इसकी कोई समय-सीमा नहीं है। मेरे कई एक्टर फ्रेंड हैं, जो हमेशा के लिए मुंबई छोड़कर वापस जा रहे हैं। उनका कहना है कि अब यहां रहना ही नहीं है।

तकलीफ तो सभी कलाकारों को है, पर वर्कर को सबसे ज्यादा है- गजेंद्र चौहान
उच्च वर्ग को छोड़ दें तो तकलीफ तो सभी कलाकारों को है। पिछली बार लॉकडाउन में अक्षय कुमार, सलमान खान, रोहित शेट्‌टी, शाहरुख खान जैसे कलाकारों ने बहुत मदद की थी। मैं 'फेडरेशन ऑफ वेस्ट सिने एम्पाइज' का चीफ एड्वाइजर हूं। फेडरेशन ने भी वर्कर को राशन के पैकेट बांटे थे। वर्कर सबसे ज्यादा तकलीफ में है, क्योंकि वे रोज कुआं खोदते हैं, रोज पानी पीते हैं। कल ही मैजेस आया है कि शूटिंग रोक दी जाएगी। अक्टूबर के बाद मैंने भी 'दामन', 'साईंबाबा' जैसे सीरियल और कुछ फिल्में की।

काम आना शुरू हुआ तो थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन अब दोबारा वही सिचुएशन डेवलप हो रही है। पता नहीं कब तक चलेगा। जिंदगी भी बचानी है और कमाई भी करनी है। दोनों जरूरी है। मुंबई में कलाकारों और तकनीशियनों की जो नई पीढ़ी आ रही थी, वह अब वापस जा चुकी है। इस बार कुछ भी कहना असंभव-सा है। किसी एक का नाम लेना ठीक नहीं है। हम लोगों ने मदद की है, लेकिन हमेशा के लिए किसी की मदद नहीं कर सकते। कहीं न कहीं इंसान को अपना रास्ता ढूंढ़ना पड़ेगा। फिर तो चाहे अपने नेटिव प्लेस चले जाएं या कमाई का रास्ता मुंबई में ढूंढ़े।

इस बार पैसे, काम और समय को लेकर बहुत डिस्टर्ब हो रहा हूं- सोहित सोनी
पिछली बार 'तेनालीरामा' में काम कर रहा था तो 3 महीने तक चेक आता रहा। इसलिए सरवाइव कर गए। लेकिन इस बार तो लोगों का अच्छे से काम शुरू भी नहीं हुआ था कि एकदम से ब्रेक लग गया है। इस बार पैसे, काम और समय को लेकर बहुत डिस्टर्ब हो रहा हूं। क्योंकि पिछले लॉकडाउन से ज्यादा मुश्किल इस बार हो जाएगी। इस बार ज्यादा डर लग रहा है। अगर यह लंबा चला तो कुछ प्रोजेक्ट के लिए बात हुई थी, वह भी टल जाएगी। हमारे लिए चिंताजनक बात है। पहले की अपेक्षा अब बड़ी दिक्कत आ रही है।

पहले कहीं न कहीं काम मिल ही जाता था, लेकन अब सेट पर एक्टर कम कर दिए गए हैं। इसलिए काम मिलने में भी दिक्कत आ रही है। अब रूम रेंट भरने में प्रॉब्लम आने लगी है। घर से कम निकलना होगा तो कम खर्च में काम चलाना होगा। ताकि मुंबई में टिका जा सके। ऐसे वक्त में खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ जाती हैं। मोदीजी से यही कहूंगा कि इस बार उस तरह का लॉकडाउन न रखा जाए, जिससे कि शूटिंग न रुके। शूटिंग चलेगी तो कहीं न कहीं काम मिल ही जाएगा।

खबरें और भी हैं...