एक्टर की अपील:सुधांशु पांडे ने पूछा बड़ा सवाल, बोले- हमारे पास टेलीविजन के लिए नेशनल अवार्ड्स क्यों नहीं हैं?

एक महीने पहले
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टीवी पिछले कई सालों से लोगों को एंटरटेन करता चला आ रहा है। 'अनुपमा' फेम सुधांशु पांडे का छोटे पर्दे के लिए बड़ा सपना है और वो अब उसे पूरा करने की दिशा में काम करना चाहते हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि फिल्मों की तरह टेलीविजन के लिए भी नेशनल अवार्ड्स होने चाहिए। इस विचार के बारे में बात करते हुए उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि मैंने लोगों से सपोर्ट हासिल करने के लिए एक अभियान शुरू करने की प्लानिंग बनाई है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि टेलीविजन इंडस्ट्री के लोग बहुत महनत करते हैं और उन्हें इसका फल जरूर मिलना चाहिए।

सुधांशु की नई पहल

सुधांशु का कहना है, "यह मेरे दिमाग में पिछले कुछ समय से चल रहा है और कुछ समय पहले, मैंने इस पर काम करने का फैसला किया है। मैंने कुछ वीडियो शूट किए हैं, और मुझे इस पहल के बारे में जागरूकता फैलाने की उम्मीद है- 'इंडियन टेलीविजन के लिए नेशनल अवार्ड्स'। आज सोशल मीडिया आपके आईडिया को सामने रखने का एक बहुत ही प्रभावी साधन हो सकता है। मैं इंडस्ट्री के लोगों के साथ इस पर चर्चा कर रहा हूं, और मुझे यकीन है कि वो इसमें लोग मेरा सपोर्ट करेंगे।"

प्रोड्यूसर राजन शाही हैं सुधांशु के दोस्त

सुधांशु कहते हैं, "मैंने अपने करियर की शुरुआत 1998 में टेलीविजन से की थी तब मैंने बीआर चोपड़ा के लिए एक शो किया था। कुछ समय बाद, मैं फिल्मों में आ गया और उसे जारी रखा, साथ में मैंने कुछ वेब शो भी किए। पिछले साल से टीवी पर काम मैंने फिर शुरू किया, जब प्रोड्यूसर राजन शाही, जो मेरे दोस्त हैं, ने मुझे 'अनुपमा' ऑफर किया, यह कहते हुए कि वो उस रोल में किसी अन्य अभिनेता को नहीं देख सकते। तभी से यह सब शुरू हुआ।''

लॉकडाउन के दौरान सुधांशु ने टीवी की अच्छी समझ हासिल की

सुधांशु आगे कहते हैं, "हमने मार्च 2020 में एक सप्ताह के लिए 'अनुपमा' की शूटिंग की, और फिर लॉकडाउन की घोषणा हो गई। लॉकडाउन के दौरान मैंने कई टेलीविजन शोज देखे और इंडस्ट्री की अच्छी समझ हासिल की। तब मैंने महसूस किया कि कैसे टेलीविजन आज सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली इंडस्ट्री है। जून 2020 में, हमने फिर से अपने शो की शूटिंग शुरू की और तब से मैं लगातार शूटिंग कर रहा हूं। मुझे अपने रोल के लिए जो रिएक्शन और प्रशंसा मिली है, वह अविश्वसनीय है।"

सुधांशु का कहना है कि टीवी को वो पहचान नहीं मिली है, जिसका वह हकदार है

सुधांशु ने कहा, ''टेलीविजन को वह पहचान नहीं मिली है, जिसका वह हकदार है। यह एकमात्र इंडस्ट्री है जो साल में 24/7 और 365 दिन चलता है। कुछ महीनों को छोड़कर, महामारी के दौरान भी इसका काम यहीं नहीं रुका। सभी चैनलों, प्रोडक्शन हाउसों के लोगों ने ऑडियंस को उनके एंटरटेनमेंट की रोज की खुराक प्रदान करने के लिए बहुत प्रयास किया। मुझे लगता है कि उनके काम पर नेशनल अवार्ड के लिए विचार किया जाना चाहिए। यह एक सपना है जिसे मैंने देखा है, लेकिन मैं इसे हम सभी के लिए पूरा करना चाहता हूं।"

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