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यादें शेष:सुरेंद्र पाल ने शेयर की सिद्धार्थ शुक्ला से जुड़ी यादें, बोले- सिड हमेशा लोगों से कहता था कि ये मेरे रील डैड हैं

13 दिन पहलेलेखक: उमेश कुमार उपाध्याय
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सिद्धार्थ शुक्ला की मौत से हर कोई दुखी है। हाल ही में जब सुरेंद्र पाल मुंबई स्थित एक फाइव स्टार होटल में आजाद चैनल पर प्रसारित होने जा रहे धारावाहिक शो 'मेरी डोली मेरे अंगना' की प्रेस कांफ्रेंस में शामिल हुए, तब उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत करते हुए सिद्धार्थ शुक्ला की मौत पर अपना दुख व्यक्त किया। सिद्धार्थ के साथ अपने अनुभव को साझा करते हुए सुरेंद्र पाल ने कहा कि सिड हमेशा लोगों से कहता था कि ये मेरे रील डैड हैं।

सिद्धार्थ, सुरेंद्र को डैड की तरह ट्रीट करते थे

सुरेंद्र पाल कहते हैं, "धारावाहिक 'बाबुल का अंगना छूटे न' से सिद्धार्थ शुक्ला का डेब्यू हुआ था। मैंने इसमें उनके पिता की भूमिका निभाई थी। उनके साथ की एक-दो नहीं, बल्कि बहुत सारी यादें मेरे पास हैं। उस समय सिद्धार्थ को थोड़ी प्रॉब्लम हो रही थी, जैसे कि उन्हें डायलॉग जल्दी से याद नहीं हो रहे थे। उन्होंने मुझसे आकर पूछा कि आप इतने लंबे-लंबे डायलॉग कैसे याद करके बोलते हैं। मैंने बताया कि थोड़ा सा ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। अगर थोड़ा सा दिमाग लगाओगे, तब तुम्हें भी डायलॉग याद हो जाएंगे। हम डेली साथ में बैठकर खाना खाते थे और बातें करते थे। उसके साथ एक साल का एसोसिएशन रहा। सिद्धार्थ जब बालिका बधू शो कर रहे थे, तब उसी कैंपसस में मेरे भी शो की शूटिंग चल रही थी। फुर्सत मिलते ही वो मेरे पास आकर बैठ जाते थे। मैं उसे बच्चे की तरह और वह मुझे डैड की तरह ट्रीट करता था। सिद्धार्थ हमेशा लोगों से कहता था कि ये मेरे रील डैड हैं।"

सुरेंद्र पाल ने शेयर की सिद्धार्थ से जुड़ी यादें

सुरेंद्र पाल आगे कहते हैं, "उस समय उसके पास क्रीम कलर सी-200 मर्सिडीज थी। उसे लेकर स्टूडियो आता था। मेरे पास भी इसी मॉडल की गाड़ी थी। हम दोनों पास में गाड़ी करते थे। लेकिन कई बार उसकी मर्सिडीज पंचर हो जाती थी, तब वो बहुत दुखी और परेशान होता था। वो कहता था कि सुरेंद्र जी! क्या आपकी मर्सिडीज रोज पंचर होती है। मैं कहता था नहीं। तब वो कहता था कि जरूर कोई न कोई दुष्ट है, जो मेरी गाड़ी को पंचर कर देता है। मैं कहता था कि इसके लिए तो कैमरा लगाकर देखना पड़ेगा। उसने जब बीएमडब्ल्यू एसयूवी लिया, तब मैंने भी बीएमडब्ल्यू एसयूवी ली। फिर हम दोनों ने एक-दूसरे के साथ इसकी खुशी शेयर की। उसकी गाड़ी का तीन महीने के बाद एक एक्सीडेंट हो गया था, तब उसने सोशल साइट पर लिखा था। मुझे याद है, वो जब बालिका वधू की शूटिंग करता था, तब उसको मैंने चार महीने के लिए अपना ड्राइवर भी दिया था, क्योंकि उस समय उसके पास ड्राइवर नहीं था। लेकिन वो करता यह था कि घर से लेट निकलता था, तब गाड़ी को बहुत तेज भगाता था। कहता था कि जल्दी चलो, जल्दी चलो। हमें लेट हो रहा है। एक बार ड्राइवर ने मुझसे कंप्लेन किया कि सर! मैं यह नौकरी छोड़ना चाहता हूं, क्योंकि सर मुझसे बहुत तेज गाड़ी चलवाते हैं।"

एक दूसरे से काफी क्लोज थे सुरेंद्र और सिद्धार्थ

सुरेंद्र पाल बताते हैं, "वो जब बिग बॉस जीतकर आया था तो मैंने उन्हें बधाई लिखी थी, तब उन्होंने तुरंत थैंक यू कहकर जवाब दिया। हम वर्क आउट करने के लिए एक ही जिम में जाते थे। इस तरह सिद्धार्थ के साथ हमारा बहुत करीबी रिश्ता रहा है। लेकिन जब से बिग बॉस जीतकर आया था, तब से हमारा मिलना-जुलना कम हो गया था, क्योंकि वो शहनाज के साथ समय बिताता था। उससे पहले वो मुझे फोन किया करता था कि आप कहां हैं? चलिए, लोखंडवाला में कॉफी पीते हैं। हम दोनों कॉफी पीते और अपने काम, घर-परिवार, दोस्तों की बहुत सारी बातें एक दूसरे से शेयर करते रहते थे।"

सुरेंद्र ने की अपने शो के बारे में बात

सुरेंद्र पाल इन दिनों शो 'मेरी डोली मेरे अंगना' में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। अपने किरदार के बारे में उन्होंने बताया, "मैं इस शो में पिता ज्ञानेंद्र सिंह की भूमिका निभा रहा हूं। उसके कुछ उसूल हैं, जिससे वो कंप्रोमाइज नहीं करता है। लेकिन वो अपनी बेटी को बहुत ज्यादा सम्मान देता है। उसका मानना है कि बेटी अपशगुनी नहीं घर की लक्ष्मी होती है। वो कहता है बेटी जिसके घर में होती है, उसके घर में भगवान होता है और भगवान का जिस घर में है, उसी घर में ही बेटियां पैदा होती हैं। इसी कॉन्सेप्ट के ऊपर 'मेरी डोली मेरे अंगना' की कहानी है। इस कहानी के अंदर अपना कल्चर और अपनी मिट्‌टी की खुशबू है। इसमें कोई वेस्टर्न कल्चर मिक्स नहीं है, जबकि आजकल हम पश्चिम सभ्यता पर ज्यादा सीरियल बन रहे हैं।"

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