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लिंगभेद के कारण गुजरात में हर साल 9331 कन्याओं की मौत

मेडिकल जर्नल की रिपोर्ट, अकाल मृत्युु में गुजरात देश में छठे स्थान पर।

Dainik Bhaskar

Jun 04, 2018, 03:42 PM IST
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अहमदाबाद। गुजरात में हर साल अपने जीवन के 5 साल पूरे करने के पहले ही 9331 बच्चियां लिंग भेद के कारण मौत की शिकार हो जाती हैं। अहमदाबाद में हर साल 1500 बच्चियों की मौत होती है। लैंसेट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार अहमदाबाद में हर साल 2014-15 में 2411, 2015-16 में 3211, 2016-17 में 2528 और अप्रैल से अगस्त 2017 तक 959 एबार्शन कराए गए। थोथा है बेटी बचाओ का नारा...

प्रदेश में बेटी बचाओ अभियान की खूब प्रशंसा हो रही है, पर सच्चाई इससे अलग है। विश्व की सबसे प्रतिष्ठित जर्नल द लासेंट की चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें कहा गया है कि गुजरात में बेटे-बेटी में भेदभाव के कारण हर साल पांच साल से कम उम्र की 9331 बेटियाें की असामान्य और अकाल मौत हो जाती है। बाल मृत्युदर में जितनी बेटियां पैदा होती हैं उसमें से 16 प्रतिशत की असामान्य मौत हो जाती है। इस मृत्युदर को कम किया जा सकता है, पर दु:ख इस बात का है कि अब तक लाखों बेटियां केवल लापरवाही के कारण मौत की भेंट चढ़ गई। बेटियों के असामान्य माैत के मामले में गुजरात राज्य छठे स्थान पर है।

पिछड़े राज्यों में बेटियों काे अधिक सम्मान

बाल मृत्युदर में गुजरात छठवें स्थान पर है। इससे पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और पहले स्थान पर उत्तर प्रदेश है। गुजरात की अपेक्षा आर्थिक और विकास की दृष्टि से सबसे पिछड़े माने जाने वाले मणिपुर, मिजोरम, मेघालय बाल मृत्युदर की सूची में सबसे पीछे हैं। आदिवासी क्षेत्रों में बाल मृत्युदर कम है। इसका सीधा मतलब यह है कि आदिवासी कन्याओं का ज्यादा सम्मान करते हैं।

बेटियों के साथ भेदभाव मौत का सबसे बड़ा कारण

मेडिकल सर्जन लेसंट की इस महीने प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत में गर्भ परीक्षण ही बेटियों की मौत का कारण नहीं है, बल्कि जन्म के बाद भेदभाव से पांच साल तक की 2.39 लाख बेटियों की हर साल अकाल मौत हो जाती है। गुजरात में यह आंकड़ा 9000 के पार है।

बेटियों के बीमार न होने की मान्यता गलत

गुजरात की अनेक तहसीलों और शहरों में अभी भी यह मान्यता है कि बेटियां कठोर होती हैं। छोटी-मोटी बीमारी में माता-पिता और घर के बड़े-बुजुर्ग इसी बात को रटते रहते हैं। अस्पताल ले जाने के बदले बेटियों का घर पर ही इलाज करते हैं। जिसके कारण बेटियों की अकाल मौत हो जाती है। जबकि बेटों को कुछ भी होने पर तुरंत अस्पताल लेकर भागते हैं।

आंकड़ों में गुजरात

राज्य वार्षिक मृत्युदर

उत्तर प्रदेश 76782 30.5

बिहार 42538 28.9

राजस्थान 20963 25.4

मध्य प्रदेश 19302 22.1

महाराष्ट्र 9850 9.8

गुजरात 9331 16.0

(प्रति 1000 जन्म पर होने वाली मौत)

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