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5 दिनों मलबे से निकले युवा को देखकर लोगों ने कहा- ‘मिरेकल ब्वाय’

भूकंप में अपना परिवार खो देने वाले विरल दलाल ने अमेरिका में मौत से साक्षात्कार के संबंध में लिखी किताब ‘यूजिंग लाइट’

Dainik Bhaskar

Jan 26, 2018, 03:13 PM IST
मैं अमेरिकन रेडक्रास में एक वालिंटियर हूं। लोगों की मदद करना मुझे अच्छा लगता है। मैं अमेरिकन रेडक्रास में एक वालिंटियर हूं। लोगों की मदद करना मुझे अच्छा लगता है।

अहमदाबाद। 2001 के भूकंप में पूरे परिवार को खोने वाले अमेरिका में स्थायी रूप से रहने वाले विरल दलाल ने अंधेरे से अपने जीवन के प्रकाश की तरफ कैसे आगे बढ़े, इस संबंध में उन्होंने ‘यूजिंग लाइट’ के नाम से एक किताब लिखी। इस किताब में उन्होंने पूरे 5 दिनों तक भूखे-प्यासे, प्रकाश के बिना मलबे के नीचे पड़े रहे, इसका पूरा वर्णन किया है। उन्होंने अपनी इस किताब को अमेरिका में ही लांच किया। जिंदा निकला, तो लोगों ने कहा-मिरेकल ब्वाय…

2001 में भूकंप के समय विरल अमेरिका से गुजरात आए हुए थे। अपनी किताब के बारे में उन्होंने भास्कर से कहा कि इस किताब को लिखने में मुझे बरसोें लग गए। 2001 में इस किताब को लिखना शुरू किया। किंतु वह किताब नहीं, पूरा दस्तावेज बन गया। 2009-10 में मैंने फिर से लिखना शुरू किया। पिछले साल ही पुस्तक कम्पलिट हुई। यह किताब इस बात का परिचायक है कि अपने परिवार के आशीर्वाद से मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी। बरसों के अनुभव से यह मैं जान पाया हूं कि हालात हमें हमेशा पछाड़ने की कोशिश करते हैं। परंतु अपनी शक्तिेयों से उसके खिलाफ लड़ना होता है। अपनी भीतर की शक्ति को समझना बहुत ही अावश्यक है। इस किताब में मैंने यूएसए में लांच की। मेरे परिवार के आशीर्वाद और प्रेरणा से मैं इस किताब को लिख पाया। उस परिवार को मैं भूकंप में खो चुका हूं।

पुस्तक का महत्वपूर्ण अध्याय है ‘लर्निंग’

विरल बताते हैं कि मलबे के नीचे दबे हुए मैं पूरी तरह से अंधकार में था। तब मैंने अपनी मानसिक शक्ति के आधार पर किस तरह से भूख-प्यास का सामना किया, यह बात मैंने किताब में लिखी है। यह वह समय था, जब मुझे मेरे परिवार को खोजने के लिए जीवित रहना जरूरी था, उस समय में मस्तिष्क के आंतरिक प्रकाश पर ध्यान केंद्रित कर रहा था। किताब का दूसरा चेप्टर है लर्निंग। किस तरह से मानसिक शक्ति के जोर पर खुश रहा जा सकता है। यह चेप्टर बताता है कि आंतरिक शक्ति क्या है। किस तरह से अपने सपनों को साकार किया जा सकता है। इस समय मैं अमेरिकन रेडक्रास में एक वालिंटियरके रूप में काम कर रहा हूं। इससे मैं लोगों की मदद कर रहा हूं। इससे मुझे शांति मिलती है।

खालीपन समय के साथ बदलता नहीं है

विरल का कहना है कि वे दिन अंधकार भरे थे, मैंने अपना परिवार खो दिया था। परिवार के बिना खालीपन समय के साथ बदलता नहीं है। परंतु अब 2018 में मेरे अपने परिवार वालों के चेहरे पर मुस्कान ला देता है, यही मुस्कान मेरी पत्नी और बच्चों के साथ शेयर करता हूं, यह बात अलग है।

अंधकार से किस तरह से प्रकाश में आया जा सकता है, यह मेरी किताब में है। अंधकार से किस तरह से प्रकाश में आया जा सकता है, यह मेरी किताब में है।
अपनी मानसिक शक्ति के आधार पर किस तरह से भूख-प्यास का सामना किया, यह बात मैंने किताब में लिखी है। अपनी मानसिक शक्ति के आधार पर किस तरह से भूख-प्यास का सामना किया, यह बात मैंने किताब में लिखी है।
यह किताब इस बात का परिचायक है कि अपने परिवार के आशीर्वाद से मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी। यह किताब इस बात का परिचायक है कि अपने परिवार के आशीर्वाद से मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
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मैं अमेरिकन रेडक्रास में एक वालिंटियर हूं। लोगों की मदद करना मुझे अच्छा लगता है।मैं अमेरिकन रेडक्रास में एक वालिंटियर हूं। लोगों की मदद करना मुझे अच्छा लगता है।
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अपनी मानसिक शक्ति के आधार पर किस तरह से भूख-प्यास का सामना किया, यह बात मैंने किताब में लिखी है।अपनी मानसिक शक्ति के आधार पर किस तरह से भूख-प्यास का सामना किया, यह बात मैंने किताब में लिखी है।
यह किताब इस बात का परिचायक है कि अपने परिवार के आशीर्वाद से मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी।यह किताब इस बात का परिचायक है कि अपने परिवार के आशीर्वाद से मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
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