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भाजपा के 13 सांसद प्रचार में नाकामयाब, 7 जिलों में शून्य

भाजपा सांसदों की निष्क्रियता का पूरा फायदा उठाया कांग्रेस ने, बढ़ा ली अपनी सीटें।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 11:52 AM IST

गांधीनगर। लोकसभा चुनाव में गुजरात में भाजपा ने सभी 26 सीटें जीतकर एक इतिहास रचा था। किंतु उसके साढ़े तीन साल बाद ही उसका जादू नहीं चल पाया। भाजपा प्रत्याशी शायद इसी फेर में थे कि प्रचार न भी करें, तो भी वे जीत जाएंगे, पर ऐसा नहीं हुआ। अब पता चल रहा है कि भाजपा के 13 सांसद प्रचार में विफल साबित हुए। 7 जिले ऐसे हैं, जहां नाममात्र का भी प्रचार नहीं हुआ। परिणाम लालबत्ती के समान…

विधानसभा चुनाव में 33 में से 15 जिलों में भाजपा की बुरी तरह से धुलाई हुई है। 7 जिले ऐसे हैं, जहां से उसे एक सीट भी नहीं मिली। दूसरी ओर 8 जिलों में से उसे केवल एक सीट से ही संतोष करना पड़ा। ये परिणाम भाजपा के लिए लालबत्ती के समान हैं। भाजपा ने 2013 में नए 7 जिलों की रचना की थी, परंतु ये इन नए जिलों से उसके केवल दो ही सीटें मिली।

जिलेवार परिणाम

जिलेवार परिणामों का विश्लेषण किया जाए, तो मोरबी, गिरसोमनाथ, अमरेली, नर्मदा, तापी, डांग, अरवल्ली जिले की कुल 21 सीटों पर भाजपा एक भी सीट नहीं जीत पाई। कांग्रेस को 25 प्रतिशत सीट तो इन जिलों में ही मिल गई। उधर सुरेंद्रनगर, देवभूमि, द्वारका, पोरबंदर, जूनागढ़, बोटाद, पाटण, महिसागर और छोटा उदेपुर जिले की कुल 26 सीटों में से भाजपा को एक-एक यानी कुल 8 सीटें ही मिल पाई हैं। कांग्रेस को 18 सीटें मिली हैं।

सांसदों की निष्क्रियता

जिलों में भाजपा की स्थिति खराब होने के कारणों में से एक यह भी है कि यहां सांसद निष्क्रिय रहे। एक सांसद के अधीन दो से 5 विधानसभा सीट आती है। 15 जिलों में की 13 लोकसभा सीटों को प्रभावित करती है।