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उग्रवादियों के घर में घुसी थी ये टीचर, ऐसे बदलीं 68 आतंकियों की जिंदगी

उग्रवादियों के गढ़ में स्कूल चलाती है ये टीचर, इसलिए है फेमस।

विजया लक्ष्मी | Last Modified - Mar 02, 2018, 06:32 PM IST

उग्रवादियों के घर में घुसी थी ये टीचर, ऐसे बदलीं 68 आतंकियों की जिंदगी

बेंगलुरु. गुजरात के राजकोट की दीपा दवे मणिपुर में साहस और संघर्ष का एक चेहरा बनकर उभरी हैं। पिछले 15 साल से वह इंफाल के सुफो बैलो गांव में बच्चों को पढ़ा रही हैं। इस दौरान उन्होंने 68 उग्रवादियों को मुख्य धारा में लाने का भी काम किया है। मगर इस सफलता की कहानी एक लंबे संघर्ष से होकर निकली है।

धमकियों के बावजूद खोला था स्कूल

मूल रूप से गुजरात की रहने वाली दीपा बताती हैं कि 2003 में वह यहां 'आर्ट ऑफ लिविंग' की ओर से खोले गए स्कूल में शिक्षिका के तौर पर आई थीं। तब मणिपुर के इस इलाके में उग्रवाद चरम पर था।

2003 जनवरी में स्कूल की नींव रखने के साथ ही उग्रवादियों का उन तक संदेश आ गया। वे चाहते थे कि दीपा स्कूल बंद करके वापस चली जाएं। उग्रवादियों के पहले संदेश को उन्होंने नजरअंदाज कर दिया। उग्रवादियों को यह बात पसंद नहीं आई और अगले दिन कुछ हथियारबंद लोग उनके पास आ धमके। उनके पास एके-47 तक थी। तब पहली बार उन्होंने ऐसे हथियार देखे थे। उग्रवादियों ने उन्हें वापस लौटने के लिए एक माह का समय दिया। मगर वह फिर भी नहीं लौटीं।

पहुंच गईं थीं उग्रवादियों के घर

कुछ समय बाद कुकी उग्रवादियों के एक गुट ने स्कूल चलाने के एवज में उनसे पैसों की डिमांड शुरू कर दी। दीपा ने यह मांग भी ठुकरा दी और खुद उग्रवादियों से बात करने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने स्थानीय आदिवासियों से मदद ली और कुछ उग्रवादियों के घर जाकर उनसे मिलीं। पहली मुलाकात में उन्हें सफलता नहीं मिली। मगर उन्होंने मुलाकात का सिलसिला नहीं छोड़ा।

दीपा बताती हैं कि वह लगातार यही समझाती रहीं कि वे यहां पढ़ाने आई हैं। इसमें किसी का कोई नुकसान नहीं है। तीन-चार साल उन्हें गांव और आसपास के लोगों में विश्वास जमाने में लग गए। आखिर में उन्हें पहली सफलता उसी उग्रवादी को समझाने में मिली जो उन्हें स्कूल में एके-47 लेकर धमकाने आया था। दीपा ने बताया कि इससे उनकी हिम्मत और बढ़ गई। यह सिलसिला आज तक जारी है। आप एक बार ठान लें तो कुछ भी कर सकते हैं।

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Web Title: ugarvaadiyon ke ghr mein ghusi thi ye teacher, aise bdlin 68 aatnkiyon ki jindgai
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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