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गुजरात के समुद्र से आई एक खुशखबरी, आखिर क्या है वह…?

हजारों मील का सफर तय कर गुजरात के समुद्र में आती है प्रजनन के लिए व्हेलशार्क।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 24, 2018, 01:38 PM IST

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    व्हेल शार्क आई गुजरात के समुद्री किनारे।

    अहमदाबाद। गुजरात के समुद्री किनारे से एक खुशखबरी आई है। अपने बच्चों को जन्म देने के लिए व्हेल शार्क को गुजरात का समुद्र पसंद है, इसलिए वह इस समय यहां पहुंची हुई है। पर्यावरणविदों का कहना है कि व्हेल शार्क को प्रजनन के लिए गुजरात का समुद्र अनुकूल लगता है। व्हेल शार्क केी पहचान 1828 में हुई थी…

    मछली प्रजाति में सबसे बड़ी व्हेल शार्क की पहचान सबसे पहले 1828 में हुई थी। कुछ समय पहले ही सूत्रापाड़ा के मछुआरे मोहन बीम सोलंकी ने नवजात शार्क व्हेल मछली पकड़ी थी। उसके बाद उसने तुरंत ही उसे छोड़ दिया। पहली बार गुजरात के समुद्र में 2008 में व्हेल मछली दिखाई दी, इसके बाद गुजरात वन विभाग और वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया और टाटा केमिकल्स द्वारा उसके संरक्षण के लिए साथ-साथ काम करने का फैसला किया।

    व्हेल शार्क कीे आयु औसतन 100 साल होती है

    व्हेल का नामकरण उसके विशाल कद और वजन के कारण हुआ। इस मछली का वजन 12 टन और लम्बाई 45 फीट तक होती है। इसकी औसतन उम्र 100 साल होती है। 30 साल की उम्र में यह मछली वयस्क होती है। यह मछली गर्भधारण करती है, फिर अंडों को सेती है, फिर बच्चों को जन्म देती है। उसके कुल वजन का दस प्रतिशत वजन उसके लीवर का होता है। उसके लीवर की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है।

    स्वभाव से शांत पर जबड़े पर खंजर जैसे दांत

    गुजरात के तटवर्ती समुद्र में पाई जाने वाली शार्क अन्य शार्क मछलियों की अपेक्षा बड़ी है। इनकी लम्बाई 12.5 मीटर, चौडाई 7 मीटर और वजन 15000 किलोग्राम हाेने के बाद भी स्वभाव में शांत होती है। शिकार करने के लिए इसके जबड़े में खंजर जैसे दांत होते हैं। छोटे-छोटे जीवों का भक्षण कर ये अपना गुजारा करती है। इसे दो विशेषणाें से जाना जाता है-विकराल और विराट। सभी शार्क का मुंह कद्दावर और डरावना नहीं होता। लेंटर्न शार्क कद में 8 इंच और उतनी ही लम्बी होती है। गहरे समुद्र में यह शार्क फानूस की तरह चमकती है।

    प्रसूति के लिए गुजरात का समुद्र भाता है

    गुजरात के भावनगर से जामनगर तक समुद्र में हर साल दिसम्बर से मार्च तक सैंकड़ों व्हेल आती हैं। वेरावल, चाेरवाड और पोरबंदर समुद्री पट्टी व्हेल शार्क के लिए प्रिय है। इस समय गुजरात का समुद्र उष्णकटिबंध के कारण पानी गरम, आरामदायक और सुखद होता है। 21 से 25 सेल्सियस तापमान होने के कारण शैवाल की पर्याप्त खुराक इस दौरान व्हेल को मिल जाती है। इसके अलावा यहां का माहौल अपेक्षाकृत सुरक्षित होने के कारण व्हेल शार्क प्रजनन के लिए यहीं आती है। सुदूर अॉस्ट्रेलिया और सऊदी एशिया से हजारों नोटिकल मील का सफर तय कर दिसम्बर आते ही व्हेल शार्क गुजरात के समुद्री किनारों तक पहुंच जाती है।

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    प्रजनन के लिए अनुकूल है गुजरात का दरिया।
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    स्वभाव से शांत होती है यह मछली।
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