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शेरों के संरक्षण में गुजरात पूरी तरह से नाकाम-केग

फोरनेशिक मोबाइल यूनिट की खरीदी में निरर्थक खर्च किया गया है।

Dainik Bhaskar

Mar 29, 2018, 01:38 PM IST
जीपीएस सायरन फेंसिंग कैमरा, इंजन ड्राइवरों के लिए एसएमएस अलर्ट आदि सुविधाओं का उपयोग करने की सिफारिश की गई थी। जीपीएस सायरन फेंसिंग कैमरा, इंजन ड्राइवरों के लिए एसएमएस अलर्ट आदि सुविधाओं का उपयोग करने की सिफारिश की गई थी।

अहमदाबाद। एशियन शेरों के संरक्षण के लिए आधुनिक टेक्नालॉजी तैयार करने में और गिर रक्षित इलाकों के व्यवस्थापन का आयोजन करना एक महत्वपूर्ण काम था। मार्च 2007 में 7 शेरों के शिकार के बाद यह साबित हो जाता है कि गुजरात सरकार शेरों के संरक्षण के मामले में पूरी तरह से नाकामयाब रही। यह जानकारी केग की रिपोर्ट में दी गई है। सरकार की बड़ी विफलता….

रिपोर्ट में कहा गया है कि शेरों का शिकार न हो, इसके लिए आधुनिक टेक्नालॉजी के उपयोग की संभावना को तलाशने के लिए एक टास्क् फोर्स की रचना 2007 में की गई। इस फोर्स को कितनी ही सहायता नहीं दी गई और कितनी ही योजना में कई कंपनी से करार किया गया है। फोरनेशिक मोबाइल यूनिट की खरीदी में निरर्थक खर्च किया गया है। शेर रेल्वे लाइन तक न पहुंचे, इसके लिए लाइन के दोनों ओर फेंसिंग तार लगाया गया था, जिस पर खर्च 25.35 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसके बाद भी शेर 8 बार फेसिंग पार कर चुके हैं। यह सरकार की सबसे बड़ी विफलता है।

रेक के आसपास घूमने वाले शेरों पर कोई अंकुश नहीं

रेल्वे लाइन के आसपास शेरों को रोकने के लिए जितने भी कदम उठाए गए, वे नाकाम साबित हुए हैं। मुख्य वनसंरक्षक द्वारा विशेषज्ञों की समिति बनाई गई। इसमें जीपीएस सायरन फेंसिंग कैमरा, इंजन ड्राइवरों के लिए एसएमएस अलर्ट आदि सुविधाओं का उपयोग करने की सिफारिश की गई थी। इसके बाद भी इस दिशा में कोई सफलता नहीं मिली।

रेल्वे ट्रेक के पास सिंहों को आने से रोकने में सरकारी तंत्र पूरी तरह से विफल-कैग। रेल्वे ट्रेक के पास सिंहों को आने से रोकने में सरकारी तंत्र पूरी तरह से विफल-कैग।
2016 में 104 और 2017 में 80 शेरों की मौत हुई। 2016 में 104 और 2017 में 80 शेरों की मौत हुई।
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जीपीएस सायरन फेंसिंग कैमरा, इंजन ड्राइवरों के लिए एसएमएस अलर्ट आदि सुविधाओं का उपयोग करने की सिफारिश की गई थी।जीपीएस सायरन फेंसिंग कैमरा, इंजन ड्राइवरों के लिए एसएमएस अलर्ट आदि सुविधाओं का उपयोग करने की सिफारिश की गई थी।
रेल्वे ट्रेक के पास सिंहों को आने से रोकने में सरकारी तंत्र पूरी तरह से विफल-कैग।रेल्वे ट्रेक के पास सिंहों को आने से रोकने में सरकारी तंत्र पूरी तरह से विफल-कैग।
2016 में 104 और 2017 में 80 शेरों की मौत हुई।2016 में 104 और 2017 में 80 शेरों की मौत हुई।
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