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सरकार के मिसमैनेजमेंट के कारण सवा 4 करोड़ गुजरातियों पर छाया जल संकट

नर्मदा में जल संकट: सरदार सरोवर डेम में केवल दो मीटर पानी ही बचा।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 06, 2018, 04:41 PM IST

  • सरकार के मिसमैनेजमेंट के कारण सवा 4 करोड़ गुजरातियों पर छाया जल संकट
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    नर्मदा नदी की ड्रोन तस्वीर।

    अहमदाबाद।राज्य के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी का कहना है कि किसान गर्मी की फसल न लें, क्योंकि नर्मदा में पानी नहीं है। भास्कर की टीम नदी का दर्द जानने के लिए निकल पड़ी। केवडिया से लेकर भरुच तक की हकीकत को जाना-समझा। इसके बाद जो सच सामने आया, वह चौंकाने वाला है। जितना बताया जा रहा है, उससे भी बदतर हालत में है इन समय गुजरात की जीवन रेखा नर्मदा।नर्मदा में केवल दो मीटर पानी…

    बारिश का मौसम आने में अभी साढ़े 4 महीने बाकी हैं। नर्मदा डेम में अब केवल दो मीटर पानी ही बचा है। पानी कहीं से आ नहीं रहा है, बल्कि जा रहा है। जल स्तर इस समय न्यूनतम है। खेती और उद्योगों की बात छोड़ो, लोगों को पीने का पानी ही मिल जाए, तो यह चमत्कार ही होगा। राज्य के 169 शहर और 12028 गांव पूरी तरह से नर्मदा पर निर्भर हैं।

    रिपोर्ट क्यों है चौंकाने वाली?

    नर्मदा का न्यूनतम लेबल 110.7 मीटर है। इस समय डेम में 112.22 मीटर पानी है। यानी केवल दो मीटर ही पानी बचा है। जब एक से 15 दिसम्बर के बीच 3 मीटर पानी छोड़ा गया। यानी जितना पानी अभी बचा है, उससे अधिक पानी पिछले 15 दिनों में छोड़ा गया है। इस समय 5611 क्यूसेक पानी मध्यप्रदेश की ओर ससे डेम में गुजरात आ रहा है, दूसरी ओर यहां से 8800 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यानी जितना पानी आता है, उससे अधिक छोड़ा जा रहा है।

    75 प्रतिशत आबादी नर्मदा के सहारे

    गुजरात की 4.4 करोड़ की आबादी यानी की 75 प्रतिशत आबादी पूरी तरह से नर्मदा के पानी के सहारे ही है। इसमें 169 छोटे-मोटे शहर और 12028 गांव शामिल हैं।

    लाचारी से भरे 3 सरकारी बयान

    विजय रूपाणी सीएम ने कहा -किसान को गर्मी की फसल के लिए पानी नहीं दिया जाएगा। नर्मदा में पानी कम है, हमें लोगों को पीने का पानी देना है। इससे किसानों को पानी नहीं दे पाएंगे, वे गर्मी की फसल न लें।

    उद्योगों को भी पानी नहीं मिलेगा

    - स्थानीय संस्थाएं अपने लिए खुद की पानी की व्यवस्था करे। - जेएन सिंह, चीफ सेक्रेटरी गुजरात।

    -नर्मदा के भरोसे रहना छोड़ दें

    अब यह धारणा बदलनी होगी कि सरदार सरोवर ही सब कुछ ह। नर्मदा के पानी को अब हमें पानी का मुख्य स्रोत के रूप में नहीं मानना चाहिए। - बीएन नवलावाला, सीएम के सलाहकार, जल प्रबंधन

    जल संकट आखिर क्यों?

    सितम्बर में बारिश के मौसम का अंत हुआ। तब डेम में 130.74 मीटर पानी था। डेम में पानी की आवक भी अच्छी थी। दिसम्बर तक डेम में 124 मीटर पानी था, पर आवक घटने लगी। इसके बाद भी सरकार ने चुनाव के समय होने के कारण दो महीने में ही 12 मीटर पानी की बरबादी कर दी। अब डेम में उपयोग में लाया जा सके, उतना केवल 2 मीटर पानी ही है। पानी की आवक नहीं के बराबर है। इसलिए किसानों से फसल के लिए मना किया। पीने के पानी का संकट हो सकता है, ये हालात हैं।

    दो महीने में 12 मीटर लेबल घटा

    3 फरवरी-112.22 मीटर

    01 दिसम्बर-124.02 मीटर

    स्रोत-नर्मदा कंट्रोल अथारिटी

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    अंकलेश्वर की ओर से 200 और भरुच की ओर से 550 दूर नर्मदा नदी का पानी देखने को मिल रहा है।
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    कभी ऐसे छलकता भी था नर्मदा डेम।
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