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इस लेडी डॉन के नाम से थर्राता था गुजरात, घर की नालियों से बहता था खून

जिस शहर में पैदा हुए थे गांधीजी, वहीं गॉडमदर संतोक बेन ने फैलाया था अपना टेरर।

Danik Bhaskar | Mar 05, 2018, 05:26 PM IST
1999 में संतोक बेन जडेजा की बायोपिक बनी, जिसमें शबाना आजमी ने उनका किरदार निभाया था। 1999 में संतोक बेन जडेजा की बायोपिक बनी, जिसमें शबाना आजमी ने उनका किरदार निभाया था।

पोरबंदर. एक वक्त था जब शांतिप्रिय महात्मा गांधी के शहर पोरबंदर में एक लेडी डॉन का कहर था। लोग उसके नाम से भी कांप जाते थे। यही नहीं, घर में आपसी रंजिशों की वजह से भी कई मौतें हुईं। इसी वजह से लोग कहते थे कि संतोक बेन के घर की नालियों में पानी नहीं, खून बहता है। DainikBhaskar.com मोस्ट डेंजरस वुमन इन इंडिया सीरीज चला रहा है। दूसरी कड़ी में जानते हैं 90 के दशक में गुजरात की लेडी डॉन संतोक बेन जडेजा के खौफ की दास्तां।

गॉडमदर के नाम से मशहूर थी संतोक बेन, ऐसे बनी थी गैंगस्टर

- पोरबंदर से महज 40 किमी दूर बसा कुतियाना कस्बा 'गॉडमदर' संतोक बेन जडेजा की नगरी के नाम से मशहूर है। यह नाम उन्हें उनकी बायोपिक 'गॉडमदर' की वजह से मिला, जिसमें इनका किरदार शबाना आजमी ने निभाया था।
- संतोकबेन के पति सरमन मुंजा जडेजा कभी एक साधारण मिल मजदूर थे। एक बार मिल में मजदूरों की स्ट्राइक हो गई। उसे तोड़ने के मकसद से मिल के मालिक ने स्थानीय गैंगस्टर देवू वाघेर को हायर किया था।
- सरमन जडेजा ने गुस्से में आकर उस गैंगस्टर को मार डाला और वहीं से शुरू हुआ उनके शहर के अगले डॉन बनने का सफर।
- पूरा इलाका सरमन जडेजा का नाम से थर्राता था, वहीं उनकी पत्नी संतोक बने एक साधारण हाउसवाइफ की तरह रह रही थीं।
- 1986 में स्वध्याय मूवमेंट के तहत सरमन जडेजा ने जुर्म का रास्ता छोड़, ईमानदारी की राह पकड़ ली।
- सरमन ने जुर्म तो छोड़ दिया था, लेकिन उसके काले इतिहास ने पीछा नहीं छोड़ा। उसके दुश्मनों ने उसी साल उसकी गोलियों से भूनकर हत्या कर दी और संतोक बेन को बच्चों समेत मारने की धमकी देने लगे।
- बच्चों को बचाने के लिए घर की सीमाओं तक रही संतोक बेन ने घायल शेरनी का रूप धारण कर लिया। उसने हथियार उठाकर लड़ने का फैसला किया और निकल पड़ी पति के हत्यारों से बदला लेने।

पति के हत्यारों को बनाया निशाना

- संतोक बेन ने हथियार उठाकर अपने पति की पुरानी गैंग को दोबारा इकट्ठा किया। कुछ ही समय में उनका टेरर पूरे जिले में फैल गया।
- बदले की आग में जल रही संतोक बेन ने उसके कथित हत्यारों को अपने गैंग मेंबर्स की मदद से उन सभी 14 लोगों को मौत के घाट उतरवा दिया, जिन पर उसे पति की हत्या करने का शक था।
- इसी लेडी गैंगस्टर की इमेज के साथ संतोक बेन ने 1989 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टिसिपेट किया और जीत दर्ज की। वह पोरबंदर जिले से चुनी जाने वाली पहली विधायिका थी।

फिरौती से मर्डर तक, संतोक बेन के बाएं हाथ का खेल थे ये क्राइम

- संतोक बेन जडेजा को पहली बार गिरफ्तार करने वाले पुलिस अफसर थे सतीश शर्मा। उन्होंने एक इंटरव्यू के दौरान 'गॉडमदर' से जुड़े कई खुलासे किए थे।
- सतीश शर्मा ने बताया था, "फिरौती हो या मर्डर, तस्करी हो या वसूली, हर क्राइम में संतोक बेन का दबदबा था। यही नहीं, उसने पोरबंदर में होने वाले रियल एस्टेट बिजनेस और ट्रांसपोर्टेशन पर पकड़ बना ली थी। यही कारण था कि उसके पॉलिटिक्स में आने के बाद दिग्गज नेताओं ने उसका समर्थन किया।"
- "वैसे तो उसका राज एक दशक से ज्यादा चला, लेकिन मिड 90s में उसकी पकड़ अपने गुर्गों पर कमजोर पड़ गई। उन्हीं की चूक की वजह से उसकी गिरफ्तारी हुई थी।"

मौत तक जारी रहा खूनी खेल, मार दी गई थी जवान बहू

- संतोक बेन जडेजा के जुर्म का संसार पोरबंदर तक सीमित नहीं था। उसने अंडरवर्ल्ड से भी कनेक्शन्स बना रखे थे। उसे अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला का करीबी माना जाता था।
- संतोक बेन मौत से पहले अपने परिवार की नई पीढ़ी की मौत की गवाह भी बनीं। जनवरी 2007 में उनके 23 साल के भतीजे नवघन अरसी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
- साल 2006 में संतोक बेन के बेटे करण ने कंधल जडेजा की पत्नी और अपनी भाभी रेखा का मर्डर किया था। संतोकबेन रेखा को अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहती थी, यही बात करण को खटकती थी।
- संतोक बेन का अप्रैल 2011 में हार्ट अटैक की वजह से निधन हुआ।

आज भी चलता है नाम का दबदबा

- पोरबंदर के कुतियाना में आज भी संतोक बेन जडेजा के नाम का डंका बजता है। उनके बेटे कंधल जडेजा इस क्षेत्र से विधायक है।
- सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक वो ट्रांसपोर्ट का बिजनेस संभाल रहा है।
- 8वीं पास कंधल के खिलाफ लगभग 11 क्रिमिनल केस दर्ज हैं।
- संतोक बेन अपने बेटे के नाम 28 करोड़ की संपत्ति छोड़ गई है, जिसे वो संभाल रहा है।