अहमदाबाद

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पानी को पानी की तरह बहाने से पहले एक बार इसे जरूर पढ़ें...

ढ़ें... पीने के पानी के लिए भटकते लोगों की तकलीफ को बताने के लिए भास्कर ने न्यूज की जगह तस्वीरों का सहारा लिया है।

Dainik Bhaskar

Mar 09, 2018, 03:35 PM IST
माडिया शहर के 18 मोहल्ले पाथमिक सुविधाओं से वंचित। माडिया शहर के 18 मोहल्ले पाथमिक सुविधाओं से वंचित।

गुजरातः ऐसा कहा जाता है कि एक तस्वीर 1000 शब्दों के बराबर होती है। इसीलिए ही पीने के पानी के लिए भटकते लोगों की तकलीफ को बताने के लिए भास्कर ने न्यूज की जगह तस्वीरों का सहारा लिया है। हमारे जल रिपोर्टर और फोटो जर्नलिस्ट ने गुजरात के 5 जोन के गांवों में वाटर क्राइसिस की रियलिटी का पता लगाया। उसमें से कई तस्वीरें हम आपको दिखा रहे हैं। इसका उद्देश्य सिर्फ इतना ही है कि इन तस्वीरों को देखकर हम पानी का महत्व समझें और उसे बचाने का प्रयास करें।

3 Km दूर नदी के किनारे गड्ढे में पानी की खोज

गर्मी शुरू होते ही सौराष्ट्र कच्छ में पानी की कमी शुरू हो जाती है। मोरबी और कच्छ जिले के बीच स्थित माडिया नगरपालिका की सीमा पर स्थित तालाबों के सूखने से पेयजल का संकट शुरू हो गया है। मार्च महीने की शुरुआत में यहां के लोग पीने का पानी 3 किमी दूर से लाने लगे हैं। इसके लिए उन्हें पूरे दिन मशक्कत करनी होती है। महिलाएं-पुरुष साथ में पानी लेने जाते हैं। सामान्य दिनों में भी इस इलाके में पानी की कमी सालभर रहती है।

माडिया शहर के 18 मोहल्ले पाथमिक सुविधाओं से वंचित

पीने के पानी के लिए भटकते लोगों की तकलीफ को बताने के लिए भास्कर ने न्यूज की जगह तस्वीरों का सहारा लिया है।

माडिया मियाणा के वांढ इलाके के 18 मोहल्ले प्राथमिक सुविधाओं से वंचित हैं। स्थानीय नागरिकों संबंधित सभी अधिकारियों से इसकी शिकायत हुई लेकिन आज तक किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं हुई।

12 हजार की आबादी को रोज 4 टैंकर पानी की सप्लाई...

अहमदाबाद म्युनिसिपल कार्पोरेशन की सीमा पर आने वाले रामोल में अभी से ही टैंकर से पानी की सप्लाई शुरू हो गई है। यहां की कुल आबादी 10 से 12 हजार है। इसके बाद भी नगर निगम द्वारा केवल 4 टैंकर पानी की सप्लाई की जाती है, जो नाकाफी है। यहां पर लोग निजी सप्लायर्स से करीब 20 टैंकर पानी मंगवाते हैं। 2015 में रामोल के लिए 1.5 लाख रुपए कार्पोरेशन के बजट में निर्धारित किए गए थे। इसके बाद 2018 आ गया, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहां स्थित सोहिल पार्क, राजीव नगर, एन मदनी नगर की सोसायटी में तो घर में जो पानी आता है, वह गटर का दुर्गंधयुक्त पानी है। जिसे पीया ही नहीं जा सकता। लोग समय से टैक्स भरते हैं, इसके बाद भी यहां के नागरिक मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

गांव नर्मदा नदी के किनारे है, पर पानी के लिए नदी किनारे के गड्ढे ही सहारा...

नसवाडी तहसील के इलाकों के कुप्पा खेंदा, छोटी उमर, गलियाबारी, साकलीबारी, पीपलवाली, फंडा जैसे गांव नर्मदा नदी के किनारे स्थित हैं। राज्य में पानी की आपूर्ति न अटके, इसके लिए नर्मदा डेम की इरिगेशन बायपास टनल से पानी छोडने की शुरुआत के साथ ही यहां पानी का स्तर घटने लगा है। नर्मदा पूरी तरह से सूख गई है। आसपास के क्षेत्र कीचड़युक्त हो गए हैं। इससे गांववालों को पीने के पानी के लिए नदी के किनारे बनाए गए गड्ढे ही एकमात्र सहारा हैं। इसमें से बच्चे एक-एक कटोरी पानी निकालते हैं। जहां लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है, वहीं पशुओं की हालत बहुत ही खराब है। हैंडपंप बिगड़ गए हैं, छोटे बच्चे नदी किनारे बनाए गए गड्ढों से दिनभर पानी निकालते हैं। इस काम में शाम तक बमुश्किल दो घड़े पानी ही मिल पाता है।

झरने से टपकता पानी ही है एकमात्र सहारा...

नवसारी जिले की वासंदा तहसील के रायबोर गांव के सिंगलमाल इलाके के लोग प्राथमिक सुविधाओं से वंचित हैं। इस इलाके में 40-50 घर हैं और 500 की आबादी है। यहां के लोग पानी के लिए 3 से 4 Km दूर पहाड़ के नीचे उस स्थान पर जाते हैं, जहां झरने से एक-एक बूंद पानी टपकता है। पानी का एक बर्तन भरने में 2 घंटे लगते हैं। छोटी बच्चियां पढ़ाई छोड़कर इस काम में लग जाती हैं। नवसारी के कलेक्टर और विधायक अनंत पटेल ने इस स्थान का दौरा किया और आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

नवसारी जिला - वासंदा तहसील का सिंगलमाल गांव।

अमरेली जिले का लीलिया गांव

10,000 की बस्ती को मिलता है 7 दिन में सिर्फ 1 दिन पानी...

अमरेली जिले के लीलिया इलाके में वीक में सिर्फ 1 दिन पानी मिलता है। यहां 2000 घर हैं और आबादी 10 हजार की है। सभी को यही चिंता है कि यहां तो अभी से ही पानी के लिए मारा-मारी है, तो फिर भीषण गर्मी में क्या हाल होगा ? ग्रामीण इलाकों बवाडी, बवाडा, इंगोराला, बोडिया, भेंसाल, शेढावदर समेत कई गांवों में लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। घरों में पानी के रख-रखाव की व्यवस्था न होने के कारण जमीन का खारा और गंदा पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

बनास किनारे 850 की आबादी का एक-एक घड़े पानी के लिए संघर्ष...

सांतलपुर और समी तहसील के 30 से अधिक गांवों में इस समय एक दिन के गैप में पानी की सप्लाई हो रही है। पानी में फोर्स न होने के कारण 50 हजार से अधिक की आबादी को पानी पूरा नहीं पड़ रहा है। समी तहसील के बिस्माल्लाबाद में तो पानी की विकट समस्या है। यहां सरकार द्वारा तीन से चार बार पाइप लाइन डाली गई। अंडरग्राउंड टंकी भी बनाई गई, परंतु अभी तक उसमें पानी नहीं डाला गया है। बनास नदी के किनारे स्थित होने के बाद भी 850 की आबादी वाले गांव के लोगों को 8 नल से पानी लेने के लिए इस तरह से खड़ा रहना पड़ता है।


अहमदाबाद जिले का रामोल इलाका अहमदाबाद जिले का रामोल इलाका
छोटा उदेपुर जिले का नसवाडी तहसील छोटा उदेपुर जिले का नसवाडी तहसील
Water Crisis In Gujarat
नवसारी जिला - वासंदा तहसील का सिंगलमाल गांव। नवसारी जिला - वासंदा तहसील का सिंगलमाल गांव।
अमरेली जिले का लीलिया गांव अमरेली जिले का लीलिया गांव
सांतलपुर और समी (पाटण जिला) सांतलपुर और समी (पाटण जिला)
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माडिया शहर के 18 मोहल्ले पाथमिक सुविधाओं से वंचित।माडिया शहर के 18 मोहल्ले पाथमिक सुविधाओं से वंचित।
अहमदाबाद जिले का रामोल इलाकाअहमदाबाद जिले का रामोल इलाका
छोटा उदेपुर जिले का नसवाडी तहसीलछोटा उदेपुर जिले का नसवाडी तहसील
Water Crisis In Gujarat
नवसारी जिला - वासंदा तहसील का सिंगलमाल गांव।नवसारी जिला - वासंदा तहसील का सिंगलमाल गांव।
अमरेली जिले का लीलिया गांवअमरेली जिले का लीलिया गांव
सांतलपुर और समी (पाटण जिला)सांतलपुर और समी (पाटण जिला)
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