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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट : इस क्षेत्र में उम्मीदवारों के चयन में सभी दलों ने खेला ‘सेफ गेम’

इस चुनाव में जूनागढ़ और पोरबंदर जिले में भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों के चयन में सेफ गेम खेल रही है।

Danik Bhaskar | Nov 25, 2017, 04:33 AM IST

जूनागढ़. सौराष्ट्र की राजनीति में जूनागढ़ का किला सबसे महत्वपूर्ण साबित होता है। इस चुनाव में जूनागढ़ और पोरबंदर जिले में भाजपा और कांग्रेस उम्मीदवारों के चयन में सेफ गेम खेल रही है। जूनागढ़ और पाेरबंदर जिले की सात सीटों पर कांग्रेस ने 5 और भाजपा ने 2 उम्मीदवारों को रिपीट किया है। कई सीटों पर उम्मीदवारों का चयन दोनों पार्टियों के लिए बहुत कठिन साबित हो रहा है।

जूनागढ़ : भाजपा और कांग्रेस ने उतारे सीनियर उम्मीदवार, मतदाताओं में पार्टी की जैसी छवि वैसा होगा परिणाम

जूनागढ़ सीट पर भाजपा के विधायक महेन्द्र मशरू सातवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं। कांग्रेस ने भीखाभाई जोशी को टिकट दिया है। यहां जाति के फैक्टर से ज्यादा स्थानीय मुद्दे और विकास महत्वपूर्ण साबित होगा। दोनों उम्मीदवार सीनियर हैं। मतदाताओं को रिझाने के सारे दांव-पेंच दोनों जानते हैं। वोटर्स में पार्टी की छवि कैसी है इस आधार पर परिणाम आएगा। हालांकि स्थानीय मुद्दे और बुनियादी समस्याओं के आधार पर भी मतदाताओं का एक वर्ग अपने वोट का फैसला लेगा। इससे इनकार नहीं किया जा सकता है।

पोरबंदर : मछुआरों और किसानों की समस्याएं भाजपा के लिए नुकसानदेय, कांग्रेस को लाभ

20 साल से अर्जुन मोढवाड़िया और बाबू बोखीरिया अामने-सामने रहे हैं। यहां महेर जाति के मतदाता अधिक हैं। इसलिए 1998 से इसी जाति के उम्मीदवार को पसंद किया जाता रहा है। 2002, 2007 में अर्जुन मोढवाड़िया जबकि 1998, 2012 में बाबू बोखीरिया चुनाव जीते थे। मछुआरों और किसानों की समस्याएं अभी तक हल नहीं हुई। ब्राह्मण और लोहाण मत भी निर्णायक साबित होंगे।

विसावदर : लेउवा पाटीदारों का सारा दारोमदार इसी सीट से केशूभाई बने थे प्रदेश के मुख्यमंत्री

इस सीट ने केशू बापा काे मुख्यमंत्री बनाया है। इसके बाद भाजपा के कनू भालाला यहां से जीतते रहे हैं। लेउवा पटेल के 1.10 लाख वोट वाली सीट पर दोनों पार्टियों के उम्मीदवार लेउवा पटेल हैं। यहां आरक्षण आंदोलन का उल्टा असर है। कांग्रेस के उम्मीदवार हर्षद रीबडिया स्थानीय हैं जबकि भाजपा ने बाहरी उम्मीदवार किरीट पटेल को मैदान में उतारा है।

कुतियाणा : त्रिकोणीय मुकाबला पर लड़ाई कांधल और लखमण ओडेदरा के बीच
भाजपा ने भीखा दुला के पुत्र लखमण ओडेदरा, कांग्रेस ने वेजाभाई मोडेदरा और एनसीपी ने कांधल जाडेजा को मैदान में उतारा है। यहां त्रिकोणीय मुकाबला होगा पर मुख्य लड़ाई कांधल जाडेजा और ओडेदरा के बीच है।

माणावदर : हार्दिक के आंदोलन से भाजपा को हुए नुकसान की भरपाई होगी?
कांग्रेस ने जवाहर चावडा को रिपीट किया है। यहां पाटीदारों की आबादी सबसे ज्यादा है। हार्दिक की सभाओं से भाजपा जिला पंचायत और तहसील पंचायत के चुनाव में हार गई थी। इस नुकसान की भरपाई करने के लिए भाजपा ने आरसी फलदू को उतारा है।

मांगरोल : कोली उम्मीदवारों के बीच जंग से भाजपा या कांग्रेस किसे होगा फायदा?
कोली मतदाताओं के वर्चस्व वाली इस सीट पर भाजपा ने पूर्व विधायक भगवानजी करगठिया को टिकट दिया है। कांग्रेस ने विधायक बाबूभाई वाजा को मैदान में उतारा है। इस सीट पर दोनों उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर होगी।

केशोद : पास का असर सबसे ज्यादा पर जातिगत समीकरण हावी रहेंगे

पाटीदार आंदोलन के सर्वाधिक असर के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने कोली समुदाय के उम्मीदवार देवाभाई मालम को केशोद से विधानसभा चुनाव का टिकट दिया है। भाजपा ने कोली मतदाताओं को रिझाने के लिए सेफ गेम खेला है। कांग्रेस पाटीदार मत हासिल करने के लिए जयेश लाडाणी को मैदान में उतारा है। दोनों पार्टियों में कांटे की टक्कर है।