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हार्दिक के दावों पर सवालिया निशान क्यों?, केशुभाई की विफलता की कहानी नहीं है पुरानी

राज्य में जमी भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लंबे चौड़े दावों पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता है।

Dainik Bhaskar

Nov 25, 2017, 04:55 AM IST
Question marks on claims of Hardik Patel

गांधीनगर. गुजरात में 2012 के पिछले विधानसभा चुनाव में दिग्गज पाटीदार नेता और पूर्व मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल की बगावत की विफलता के विश्लेषण से पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल के दो दशक से अधिक समय से राज्य में जमी भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लंबे चौड़े दावों पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता है।


भाजपा का खुलेआम विरोध कर रहे हार्दिक के समर्थन से विपक्षी दल कांग्रेस फायदे की उम्मीद लगाये बैठी है पर उनसे कही कद्दावर और सर्वमान्य पाटीदार नेता रहे केशुभाई पिछली बार भाजपा के खिलाफ बगावत के बाद चुनावी सभाओं में तो बहुत बड़ी भीड़ जुटाते रहे थे पर सीटें केवल दो ही जीत पाए थे। पिछले चुनाव से कुछ ही समय पहले गुजरात परिवर्तन पार्टी बनाने वाले केशुभाई ने दो चरणों वाले चुनाव में पहले और दूसरे चरण में क्रमश: 83 (कुल 87 में) और 84 (कुल 95) यानी कुल 167 (182 में) उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। जीत केवल दो की हुई थी और इसमें वह खुद (विसावदर सीट)भी शामिल थे।

दूसरे विजेता धारी सीट के नलिन कोटड़िया थे। पार्टी के प्रत्याशी बने कई दिग्गज पाटीदार नेताओं को धूल चाटनी पड़ी थी। इसे दूसरे चरण में एक भी सीट नहीं मिली थी। चुनाव में 71 प्रतिशत से अधिक के रिकार्ड मतदान के बावजूद पार्टी को चार प्रतिशत से भी कम मत मिले थे। तब भाजपा को 115, कांग्रेस को 61, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को दो तथा जदयू और निर्दलीय को एक एक सीट मिली थी। भाजपा ने लगातार पांचवी बार सत्ता में वापसी की थी। हार्दिक की सभाओं में केशुभाई के जितनी भीड़ नहीं जुटती और पाटीदार आरक्षण आंदोलन के चरम के दौरान नवंबर 2015 में हुए स्थानीय चुनाव में ग्रामीण क्षेत्रों में कांग्रेस को मिली सफलता की कहानी दोहराया जाना आसान नहीं है।

हार्दिक को वाई श्रेणी की सुरक्षा, सर्वे के लिए घर पर पहुंची टीम


पाटीदार आरक्षण आंदोलन समिति (पास) के नेता हार्दिक पटेल को वाई श्रेणी के समकक्ष सुरक्षा देने के निर्णय के एक दिन बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों की एक टीम ने आज अहमदाबाद के शीलज स्थित उनके आवास का सर्वे किया। समझा जाता है कि यह अथवा ऐसी ही एक टीम उनके वीरमगाम स्थित पैतृक निवास तथा अन्य संबंधित स्थानों आदि का भी दौरा कर सकती है। यह सुरक्षा सर्वे कर संबंधित जरूरतों के बारे में रिपोर्ट संबंधित प्राधिकारी को देगी और उसके हिसाब से उनकी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। ज्ञातव्य है कि हार्दिक साथ केंद्रीय अर्द्ध सैनिक बल के जवानों का एक दल तैनात रहेगा। राज्य सरकार की ओर से एक पुलिस कर्मी की सुरक्षा को सरकार की ओर से जासूसी का प्रयास करार देते हुए इसे ठुकरा देने वाले पास नेता की जान को खतरे के बारे में केंद्रीय गुप्तचर ब्यूरो की कथित रिपोर्ट के बाद उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा देने का फैसला हुआ है और हार्दिक ने भी कथित तौर पर इसके लिए अपनी सहमति दे दी है।

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