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पहले चरण में सिर्फ 9 महिला कैंडिडेट, BJP के 6 और CONG के 3, कुल 9% से भी कम

लोकसभा में महिला आरक्षण बिल लटका हुआ है। इस बिल में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है।

Danik Bhaskar | Nov 24, 2017, 04:19 AM IST

अहमदाबाद. पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS) के कन्वीर बुधवार को भास्कर हाउस अहमदाबाद पहुंचे। हार्दिक ने आरक्षण, बीजेपी-कांग्रेस और महिलाओं के साथ सीडी समेत कई मुद्दों पर चर्चा की। हार्दिक ने कहा कि देश के युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए आरक्षण जरूरी है।

भास्कर के सवाल, हार्दिक के जवाब

Q: सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक 50% से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता, आप किस तरह आरक्षण लेंगे?
A: संविधान में कहीं नहीं लिखा कि 50% से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ सुझाव दिया है, जो कानून नहीं है।

Q: राजस्थान में आरक्षण का मामला कोर्ट में फंसा है?
A: मैं यही कह रहा हूं, हमें देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए कोर्ट के फैसले भी बदलने पड़ेंगे।

Q: कांग्रेस की सूची के बाद हंगामा क्यों किया?
A: पास कन्वीनरों को टिकट दे रहे हैं तो हमसे पूछिए तो सही। फोन उठाया नहीं, इसलिए यह हुआ।

Q: आपने किसी को टिकट देने की सिफारिश की थी?
A: कभी नहीं। कभी किसी के लिए सिफारिश नहीं की।

Q: बुआजी (आनंदीबेन पटेल) के संपर्क में हैं?
A: नहीं, लेकिन संपर्क करने का विचार कर रहा हूं। उनके गुट के कई लोगों के टिकट कट गए हैं।

Q: समाज में अपेक्षाएं हों, ऐसे में सीडी कितना उचित है?
A: सीडी और आंदोलन का क्या लेना-देना? किसी को प्रेमिका के साथ गोल-गप्पे खाने की आजादी नहीं है?

Q: पर वो सीडी शादी या गोलगप्पे की नहीं थी?
A: किसी भी व्यक्ति के बेडरूम में क्यों झांकना चाहिए? नलिया कांड की सीडी क्यों नहीं आती? पाटीदारों पर अत्याचारों की सीडी क्यों नहीं आती?

Q: नितिन पटेल ने कहा है कि आप पर्चेजेबल आइटम हैं?
A: हां, पर्चेजेबल आइटम ही हूं। इसीलिए तो आपको 23 साल के लड़के की प्रेसवार्ता के बाद संवाददाता सम्मेलन करना पड़ता है। विकास की सीडी छोड़ कर 23 साल के लड़के की सीडी बनानी पड़ती है।

पहले फेज में 175 कैंडिडेट मैदान में, सिर्फ 9 महिला कैंडिडेट को टिकट

- लोकसभा में महिला आरक्षण बिल लटका हुआ है। इस बिल में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रोविजन है। इसके मद्देनजर गुजरात विधानसभा में महिला एमएलए की संख्या पर गौर करें तो अभी तक सबसे अधिक 17 महिलाएं विधायक बन सकी हैं।

- 182 सदस्यीय विधानसभा में यह आंकड़ा यह 9% से भी कम है। 2017 के विधानसभा चुनाव के बरक्स पहले फेज में बीजेपी और कांग्रेस के 175 उम्मीदवार मैदान में हैं। इसमें सिर्फ 9 महिला कैंडिडेट हैं यानी 5.14%।

- गुजरात चुनाव के पहले फेज में बीजेपी ने 6 और कांग्रेस ने सिर्फ 3 महिला कैंडिडेट को टिकट दिया है। राज्य में कुल वोटरों में 47.80% महिलाएं हैं।

- बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने एक भी मुस्लिम और आदिवासी महिला को टिकट नहीं दिया है। बता दें कि 2012 के चुनाव में बीजेपी ने 20 महिलाओं को टिकट दिया था, जिनमें 13 जीत गई थीं। वहीं, कांग्रेस की 14 महिला कैंडिडेट में से 4 विधायक बनी थीं।

बीजेपी से इन्हें मिला टिकट

- डॉ. नीमाबेन आचार्य (भुज)
- संगीता पाटिल (लिंबायत)
- विभावरीबेन दवे (भावनगर)

- झंखना पटेल (चोर्यासी)
- गीताबा जाडेजा (गोनडल)
- मालतीबेन माहेश्वरी (गांधीधाम)

नोट : गीताबा व मालतीबेन नई कैंडिडेट, बाकी को दोबारा मौका मिला है।

कांग्रेस से तीन प्रत्याशी

- भावना पटेल (नवसारी )

- नीता राठौड़ (भावनगर पश्चिम)
- संतोक अरेठिया (रापर)
नोट : कई महिला कार्यकर्ताओं को टिकट न मिलने से पार्टी में नाराजगी।

बीजेपी ने 4 के टिकट काटे

- भावनाबेन मकवाना (महुवा)
- वर्षाबेन दोषी (वाधवान)
- वसुबेन त्रिवेदी (जामनगर दक्षिण)
- भानुबेन बाररिया (राजकोट ग्रामीण)

टॉप पोस्ट पर सिर्फ आनंदीबेन पहुंच पाईं

आनंदीबेन पटेल 10 साल तक कैबिनेट मंत्री रहने वाली प्रदेश की एकमात्र महिला नेता हैं। वे मई 2014 से नवंबर 2016 तक सीएम भी रहीं।

सूरत में नॉमिनेशन के दौरान लेडी बीजेपी कैंडिडेट। सूरत में नॉमिनेशन के दौरान लेडी बीजेपी कैंडिडेट।