अहमदाबाद

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15 साल से बिस्तर पर पड़े बलदेव भाई ने सीएम से मांगी इच्छामृत्यु

इसका कोई इलाज नहीं है। इलाज करवाया भी जाए, तो उसका फायदा बहुत ही कम होता है-डॉक्टर।

Dainik Bhaskar

May 07, 2018, 06:00 PM IST
ये हालत है बलदेवजी राजपूत की। ये हालत है बलदेवजी राजपूत की।

अहमदाबाद। असारवा की पुरानी भोगीलाल की चाल में रहने वाले बलदेवजी राजपूत ने मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से इच्छामृत्यु मांगी है। बीमारी से त्रस्त 54 वर्षीय बलदेव भाई 15 साल से बिस्तर पर ही हैं। वे अपनी मर्जी से हाथ-पैर भी नहीं हिला सकते। यह कदम उन्होंने हाल में केंद्र सरकार द्वारा इच्छा मृत्यु को लेकर दी गई मार्गदर्शिका के आधार पर उठाया है। सामान्य चोट से हो गई गंभीर बीमारी…

बलदेव भाई राजपूत पावर लूम फैक्टरी में कपड़ा बुनने का काम करते थे। 15 साल पहले एक दिन उन्हें ठोकर लगी। जिससे वे गिर पड़े। बस तब से उनका शरीर मानों पिघलने लगा। शक्ति घटने लगी। कई डॉक्टरों को दिखाया, फिर स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी नामक बीमारी होने का पता चला। इस बीमारी के कारण शरीर में मांस बनने की प्रक्रिया अटक जाती है। इससे वे खुद अपने हाथ-पांव नहीं चला पाते हैं। मेरा भाई और उनका बेटा ही मेरी सेवा कर रहे हैं। पर भाई को अपनी नौकरी छोड़कर बार-बार मेरे पास आना होता है। इसलिए उन्होंने मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से इच्छा मृत्यु की मांग की है।

सरकार की तरफ से मेडिकल हेल्प मिले, तो अच्छा

उनके भाई बकुल सिंह ने कहा कि मेरे भाई की तकलीफ दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। पर अपने रोज के काम भी ठीक से नहीं कर पा रहे हैं। उनके शरीर में अब केवल हड्डियां ही रह गई हैं। इसी के सहारे वे थोड़ी देर के लिए ही बैठ पाते हैं। पर चल-फिर नहीं सकते। यदि सरकार उन्हें इलाज के लिए सुविधा मुहैया कराए, तो अच्छा होगा।

दिन में केवल 3 बार ही पीते हैं पानी

इस समय भीषण गर्मी का दौर चल रहा है। इंसान को प्यास अधिक लगती है। डॉक्टर भी अधिक पानी पीने की सलाह देते हैं। परंतु बलदेव भाई दिन में केवल 3 बार ही पानी पीते हैं। पहली बार सुबह उठते ही, दूसरी बार दोपहर के भोजन के बाद और तीसरी बार रात में भोजन के बाद ही पानी पीते हैं। इसकी वजह यही है कि वे बार-बार बाथरूम जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाते। इसलिए उन्होंने पानी पीना ही कम कर दिया।

यह एक प्रकार की जेनेटिक डिसीस है

डायबीटिक फूट एंड गेंगरीन के सर्जन डॉ. परेश रूपारेल ने बताया कि स्पाइनल मस्क्यूलर एट्रोफी एक जेनेटिक डिसीस है। इस बीमारी में मरीज के शरीर के स्नायुओं में जकड़न हो जाती है। मरीज इलाज के लिए डॉक्टरों और हॉस्पिटल बदलता रहता है। परंतु इसका कोई इलाज नहीं है। इलाज करवाया भी जाए, तो उसका फायदा बहुत ही कम होता है।

Baldevji Rajput sought permission for Chief Minister Rupani's for Euthanasia
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ये हालत है बलदेवजी राजपूत की।ये हालत है बलदेवजी राजपूत की।
Baldevji Rajput sought permission for Chief Minister Rupani's for Euthanasia
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