Hindi News »Gujarat »Ahmedabad» इस गांव के सारे कुत्ते हैं करोड़पति, Dogs Are Millionaires In This Gujarat Village

भारत के इस गांव का हर कुत्ता है करोड़पति, हर एक के खाते में है 1 करोड़ रुपए

गुजरात में एक ऐसा भी गांव है, जो जानवरों की सेवा के लिए जाना जाता है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Apr 09, 2018, 03:42 PM IST

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    ट्रस्ट के लोग आवारा कुत्तों के बीच रोटला वितरण करते हुए।

    मेहसाना.गुजरात में एक ऐसा भी गांव है, जो जानवरों की सेवा के लिए जाना जाता है। यही नहीं, इस गांव का लगभग हर कुत्ता एक करोड़ रुपए का मालिक है। यहां बात हो रही है मेहसाना जिले के पंचोत गांव की, जहां जमीन की पहरेदारी से कुत्तों की सालाना कमाई करोड़ों में हो रही है। दरअसल, बीते एक दशक में राधनपुर की ओर मेहसाना बाइपास बनने की वजह से जमीन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। जिसका सबसे ज्यादा फायदा गांव के इन कुत्तों को मिल रहा है। कुत्तों के लिए बना है रोटला घर...

    - पंचोट गांव में 'Madh ni Pati Kutariya' नाम का एक ट्रस्ट है। जिसके पास 21 बीघा जमीन है। बाइपास स्थित इस जमीन की कीमत लगभग 3.5 करोड़ रुपए प्रति बीघा है।
    - ये जमीन भले ही कुत्तों के नाम पर नहीं है, लेकिन इससे होने वाले इनकम का हिस्सा अलग से कुत्तों के लिए भी रखा जाता है।
    - एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस ट्रस्ट के पास लगभग 70 कुत्ते हैं। वहीं, हर एक कुत्ता 1 करोड़ रुपए का मालिक है।

    इतिहास
    - ट्रस्ट के प्रेसिडेंट छगनभाई पटेल का कहना है कि गांव में जानवरों के लिए प्रेम भाव का इतिहास काफी लंबा है। उनके मुताबिक, 'Madh ni Pati Kutariya' ट्रस्ट की शुरुआत अमीरों द्वारा जमीन के टुकड़े दान करने की परंपरा से हुई।
    - 'तब जमीन की कीमतें इतनी ज्यादा नहीं हुआ करती थी। हालांकि, कुछ मामलों में टैक्स न चुका पाने की स्थिति में लोगों ने अपनी जमीन दाने में दे दी थी।'
    - छगनलाल ने बताया कि 70-80 साल पहले पटेल किसानों के एक समूह ने जमीनों का रख-रखाव करना शुरू किया था। इसके बाद जमीन ट्रस्ट के पास आ गई। लेकिन रिकॉर्ड में अब भी जमीन मूल मालिकों के नाम पर ही है।
    - हालांकि, एक ने भी अब तक जमीन पर क्लेम नहीं किया है। यहां के लोगों का मानना है कि जानवरों या सामाजिक कार्यों के लिए दान में दी गई जमीन को वापस लेना खराब होता है।
    - बता दें कि फसल बुवाई से पहले ट्रस्ट हर साल अपने हिस्से के एक प्लॉट की नीलामी करता है। जिसकी बोली ज्यादा होती है, उसे साल भर के लिए प्लॉट पर जुताई का हक मिल जाता है।
    - इससे मिलने वाली रकम को कुत्तों की सेवा में खर्च कर दिया जाता है।

    कुत्तों की सेवा के लिए बनाया रोटला घर
    - गांव की सरपंच कांताबेन के पति दशरथ पटेल ने बताया, 'मुझे ध्यान है कि 60 साल पहले कुत्तों के लिए शीरा बनाने की पहल में मैं भी शामिल था।'
    - 'तब करीब 15 लोगों ने बिना पैसे लिए कुत्तों के खाने के लिए रोटला बनाने की जिम्मेदारी ली थी। यहां तक कि आटा चक्की वाले ने भी एक पैसा नहीं लिया था।'
    - 2015 में ट्रस्ट ने 'रोटला घर' बनवाया। जहां दो महिलाएं रोटला (कुत्तों को खिलाने के लिए रोटी जैसी चीज) बनाने का काम करती हैं।
    - यह हर दिन 20-30 किलो आटे से करीब 80 रोटला तैयार किया जाता है। फिर शाम को 7.30 बजे से 11 अलग-अलग जगहों पर आवारा कुत्तों के बीच इनक वितरण किया जाता है।

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