Hindi News »Gujarat »Ahmedabad» गुजरात की शांताबेन को नहीं है #NipahVirus का डर, Woman Living With Bats Has No Fear Of NIPAH

घर में 400 चमगादड़ों के साथ रहती है ये महिला, कहती है- ये है मेरा परिवार

गुजरात की शांताबेन कहती हैं उन्हें निपाह वायरस का डर नहीं है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - May 25, 2018, 06:00 PM IST

  • घर में 400 चमगादड़ों के साथ रहती है ये महिला, कहती है- ये है मेरा परिवार
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    चमगादड़ों के साथ शांताबेन प्रजापति

    अहमदाबाद.जहां Nipah वायरस ने लोगों में दहशत फैला रखी है, वहीं दूसरी ओर गुजरात में एक ऐसी महिला है जो चमगादड़ों के साथ रहती है। रिपोर्ट के मुताबिक, महिला अपने दो कमरों वाले घर में लगभग 400 चमगादड़ों के साथ रहती है। निपाह वायरस के बारे में जानने के बाद भी महिला इनसे अलग रहने के मूड में नहीं है। ये उन्हें अपना परिवार जैसा मानती हैं। बोली- मैं वायरस से डरती नहीं...

    - 74 साल की शांताबेन प्रजापति अहमदाबाद से करीब 50 किमी दूर राजपुर गांव की रहने वाली हैं।
    - चमगादड़ों के बीच रहने के उनके अनोखे शौक की वजह से अब गांव वाले भी उन्हें 'बैट वुमन' नाम से बुलाने लगे हैं।
    - शांताबेन कहती हैं- 'निपाह वायरस के बारे में सुना है। पर मैं इससे डरती नहीं। लगभग 10 साल से चमगादड़ों के साथ रह रही हूं।'
    - 'ये मेरा परिवार बन चुके हैं। जब मैं आंगन में खाना बनाने जाती हूं या सोने जाती हूं, तो ये अपना वंश बढ़ाते हैं।'
    - 'इससे इनकी संख्या बढ़ती रहती है। मेरे घर में कुछ ही सामान है।'
    - शांताबेन घर में जब बैट कॉलोनी दिखाती हैं, तो ग्राउंड और फर्स्ट फ्लोर की चारों दीवारों पर चमगादड़ चिपके हुए नजर आते हैं।

    बदबू से बचने करती हैं ये काम
    - रिपोर्ट के मुताबिक, बदबू से निजात पाने के लिए शांताबेन दिन में दो बार नीम और कपूर जलाया करती हैं। वे एक बाल्टी भरकर चमगादड़ों का लीद इकट्ठा करती हैं।
    - उन्होंने कहा कि पड़ोस के भी कुछ घर में चमगादड़व रहते हैं। उन्होंने केमिकल ट्रीटमेंट से उन्हें भगा दिया। पर मैं ऐसा नहीं करना चाहती। मैं कौन होती हूं उनकी किस्मत का फैसला लेने वाली। जब उन्हें जाना होगा, वो चले जाएंगे।

    क्या होता है निपाह वायरस?
    - फ्रूट बैट या सूअर जैसे जानवर इस वायरस के वाहक हैं। संक्रमित जानवरों के सीधे संपर्क में आने या इनके संपर्क में आई वस्तुओं के सेवन से निपाह वायरस का संक्रमण होता है। निपाह वायरस से संक्रमित इंसान भी संक्रमण को आगे बढ़ाता है।
    - 1998 में पहली बार मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह में इसके मामले सामने आए थे। इसीलिए इसे निपाह वायरस नाम दिया गया।
    - 2004 में यह बांग्लादेश में इस वायरस के प्रकोप के मामले सामने आए थे। बताया जा रहा है कि केरल में यह पहली बार फैला है।

    सांस लेने में होती है दिक्कत
    -
    इस वायरस से प्रभावित शख्स को सांस लेने की दिक्कत होती है फिर दिमाग में जलन महसूस होती है। तेज बुखार आता है। वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर मौत हो जाती है।

    - निपाह से केरल में पहली मौत 19 को हुई थी। यह वायरस अब तक 12 लोगों की जान ले चुका है।

    कोई वैक्सीन नहीं
    - विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, इस वायरस का अभी तक वैक्सीन विकसित नहीं हुआ है। इलाज के नाम पर मरीजों को इंटेंसिव सपोर्टिव केयर ही दी जाती है।
    - इस बीमारी से बचने के लिए खजूर, उसके पेड़ से निकले रस और पेड़ से गिरे फलों को नहीं खाना चाहिए। बीमार सुअर, घोड़ों और दूसरे जानवरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए।

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Web Title: गुजरात की शांताबेन को नहीं है #NipahVirus का डर, Woman Living With Bats Has No Fear Of NIPAH
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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