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सरकारी सेवाओं में भ्रष्टाचार पर बिहार-यूपी से भी आगे है गुजरात

सरकारी कामों में कितना भ्रष्टाचार? गुजरात की 91 प्रतिशत जनता ने कहा-बहुत ही व्यापक।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - May 31, 2018, 06:23 PM IST

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    प्रतीकात्मक तस्वीर।

    अहमदाबाद। राज्य में प्रशासन को पारदर्शी बनाकर भ्रष्टाचार पर नियंत्रण करने का दावा केंद्र और राज्य सरकार करती आ रही है। पर सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज(CMS) के इंडिया करप्शन स्टडी-2018 की रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में 91 प्रतिशत जनता मानती है कि राज्य में अभी भी व्यापक पैमाने पर भ्रष्टाचार है। इसमें पुलिस विभाग में सबसे अधिक भ्रष्टाचार है।FIR लिखवाने में भी रिश्वत देनी पड़ती है…

    राज्य का पुलिस विभाग ही ऐसा है, जहां FIR लिखवाने, अारोपी या साक्षाी के रूप में नाम हटाने समेत विभिन्न कामों के लिए रिश्वत दी जाती है। 5 राज्यों तमिलनाड़ु, पंजाब, और आंध्र प्रदेश के बाद गुजरात राज्य में 48 प्रतिशत लोग पिछले एक साल में भ्रष्टाचार बढ़ने की बात को स्वीकारते हैं। केवल 9 प्रतिशत ही मानते हैं कि राज्य में भ्रष्टाचार कम हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार 13 राज्यों में सबसे अधिक भ्रष्टाचार वाले 5 राज्यों तमिलनाड़ु, पंजाब, तेलंगाना, और आंध्रप्रदेश के बाद गुजरात का नम्बर आता है। वैसे यह भी देखा गया है कि सेवा में कमी और भ्रष्टाचार के मामले में आवाज उठाने में गुजराती सबसे आगे हैं। नागरिकों की सक्रियता वाले राज्यों में महाराष्ट्र, दिल्ली के बाद तीसरे नम्बर पर गुजरात है। सभी 13 राज्यों की बात करें, तो 38 प्रतिशत लोग मानते हैं कि भ्रष्टाचार में बढ़ोत्तरी हुई है। गुजरात के 13 प्रतिशत लोग ने सार्वजनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार का अनुभव किया है।

    भ्रष्टाचार पर अंकुश रखने पर सरकार गंभीर नहीं

    भ्रष्टाचार पर अंकुश रखने में सरकार के प्रयासों के संबंध में राज्य के 46 प्रतिशत लोग मानते हैं कि सरकार भ्रष्टाचार दूर करने के लिए गंभीर नहीं है। 17 प्रतिशत लोगों का मानना है कि सरकार के कामकाज में कोई फर्क नहीं आया है। केवल 12 प्रतिशत लोग ही मानते हैं कि भ्रष्टाचार दूर करने में सरकार गंभीर है। 2005 की तुलना में 2018 में गुजरात में भ्रष्टाचार कम हुआ है। यानी 2005 में 69 प्रतिशत लोग मानते थे कि भ्रष्टाचार बढ़ा है। दूसरी ओर 2018 में इसे मानने वाले लोगों का प्रतिशत 48 है। नागरिक सक्रियता में अपनी भूमिका निभाने में गुजरात सबसे आगे है।

    केंद्र के प्रयासों से अधिकांश गुजराती संतुष्ट नहीं

    स्वास्थ्य सेवाएं- 26 प्रतिशत

    हेल्थ कार्ड, दवाएं प्राप्त करना, ओपीडी कार्ड के लिए, विभिन्न प्रकार के टेस्ट कराने के लिए

    जमीन का रजिस्टेशन 31 प्रतिशत

    सम्पत्ति का रजिस्ट्रेशन, मालिक के नाम में फेरबदल, मेमो लायसेंस, स्टेम्प पेपर खरीदी आदि।

    रोड ट्रांसपोर्ट: 31 प्रतिशत

    वाहनों का पंजीकरण, मालिकी में फेरबदल, मेमो, लायसेंस इश्यू या रिनुअल।

    गुजरात सरकार भ्रष्टाचार दूर करने में कितनी गंभीर

    सरकार गंभीर है -12 प्रतिशत

    सरकार गंभीर नहीं है-46 प्रतिशत

    सरकार जरा भी गंभीर नहीं- 17 प्रतिशत

    अनजाने व्यक्ति ATM पिन, पासवर्ड मांगने के मामले गुजरात में अधिक

    सरकारी कामों में भ्रष्टाचार के मामले में लोग क्या मानते हैं

    48 प्रतिशत भ्रष्टाचार बढ़ा

    09 प्रतिशत भ्रष्टाचार कम हुआ।

    43 प्रतिशत को कोई फर्क नहीं पड़ा

    सबसे अधिक भ्रष्टाचार पुलिस विभाग में

    FIR लिखवाने, आरोपी या साक्षी के रूप् में नाम हटाने जैसे कामों में भ्रष्टाचार है, इसके लिए रिश्वत देनी होती है। राज्य में एंटी करप्शन ब्यूरो(ACB) ने 2017 में कुल 216 रिश्वतखोर अधिकारियों को पकड़ा था। इसमें गृहविभाग के ही सबसे अधिक कर्मचारी थे।

    आधार के लिए भी रिश्वत

    -99 प्रतिशत लोगों के पास आधार कार्ड, पर 7 प्रतिशत लोगों ने आधार कार्ड प्राप्त करने के लिए रिश्वत दी।

    -13 राज्यों में 27 प्रतिशत परिवारों ने कम से कम एक सार्वजनिक सेवा के लिए रिश्वत दी।

    -2005 की तुलना में सार्वजनिक सेवाओं में भ्रष्टाचार 52 प्रतिाशत से घटकर 27 प्रतिशत हुआ।

    -ड्राइविंग लायसेंस रिन्यू, एफआईआर लिखवाने, राशन कार्ड बनवाने, स्कूल एडमिशन आदि जैसी सेवाओं के लिए रिश्वत देनी पड़ी।

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    प्रतीकात्मक तस्वीर।
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