Hindi News »Gujarat »Ahmedabad» Nitin Patel Ignored Many Time In Rupani Government, Its Tolerate Or Surrender

लगातार हो रही उपेक्षा से नीतिन पटेल की सहनशीलता बदली नाराजगी में !

पहले सीएम नहीं बनाया, फिर नई सरकार में वित्त मंत्रालय नहीं दिया और अब कार्यकारी मुख्यमंत्री भी नहीं बनाया।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 29, 2018, 12:09 PM IST

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    चर्चा है कि नीतिन भाई की इस नाराजगी के पीछे आखिर क्या है?

    अहमदाबाद। गुजरात के उपमुख्यमंत्री और कद्दावार पाटीदार नेता नीतिन पटेल को रूपाणी सरकार में बार-बार अपमान का घूंट पीना पड़ रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं में यह चर्चा है कि अाखिर नीतिन भाई इतना कैसे सहन कर लेते हैं। इसे उनकी सहनशीलता कहें या उनकी शरणागति? पहला कड़वा घूंट...

    गुजरात में आनंदीबेन पटेल की सरकार जाने के बाद नए मुख्यमंत्री की तलाश चल रही थी। इस दौरान आखिरी घड़ी तक नीतिन पटेल का नाम तय था। घोषणा के कुछ घंटे पहले ही उनके स्थान पर विजय रूपाणी के नाम की घोषणा कर दी गई। इससे सभी को आश्चर्य हुआ। उनके समर्थकों में काफी नाराजगी देखी गई। इस समय नीतिन पटेल ने अपमान का पहला घूंट पीया।

    दूसरा कड़वा घूंट

    इसके बाद 2017 में गुजरात में फिर से रूपाणी सरकार बनी, तब भाजपा के सीनियर नेता और बरसों से मंत्री पद पर रह चुके नीतिन पटेल को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। किंतु उन्हें वित्त मंत्रालय नहीं दिया गया। इससे वे नाराज हो गए। उस समय भी उन्हें अपमान सहना पड़ा। यह उनके लिए दूसरा कड़वा घूंट था।

    अपमान की तीसरा घूंट

    अपमान के दो-दो घूंट पीने के बाद हाल ही में उन्हें उपेक्षा और अपमान का तीसरा घूंट भी पीना पड़ा। मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को इजरायल दौरे पर जाना था। पहले ही घोषणा हो गई थी कि इस दौरान नीतिन पटेल उनका कार्यभार संभालेंगे। वे 6 दिनों तक मुख्यमंत्री रहेंगे। सामान्य रूप से मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में उपमुख्यमंत्री को ही उनका कार्यभार संभालना होता है। किंतु जाते-जाते विजय रूपाणी ने उन्हें 6 दिनों के लिए अतिरिक्त तीन विभागों की जिम्मेदारी दे दी। उन्हें कार्यकारी मुख्यमंत्री नहीं बनाया।

    रूपाणी-पटेल के बीच खींचतान

    गुजरात में रूपाणी-पटेल के बीच दूरियां बढ़ रही हैं। इसे सभी लोग जान और समझ गए हैं। विजय रूपाणी जब भी कोई निर्णय लेते हैं, उसमें नीतिन पटेल को शामिल नहीं करते। पटेल को कई सूचनाओं से अलग ही रखा जाता है। इन दोनों के बीच दूरियों के संबंध में एक बात सामने आई है कि मुख्यमंत्री द्वारा हस्ताक्षरित कोई फाइल नीतिन पटेल के पास आती है, तो वे उसे अटकाकर रख देते हैं। इस तरह से दोनों के बीच एक शीतयुद्ध चल रहा है, जो कभी न कभी दावानल के रूप में सामने आ सकता है।

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    कहीं यह उनकी शरणागति तो नहीं?
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    आखिर उन्हें बार-बार अपमान का घूंट क्यों पीना पड़ रहा है?
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    दोनों के बीच दूरियां लगातार बढ़ रही हैं।
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