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अब ये संभालेंगे आसाराम के 400 आश्रम, अरबों का साम्राज्य

बेटी भारती-पत्नी लक्ष्मीदेवी और विश्वासपात्र उदय सांगाणी पर ही होगा पूरा दाराेमदार।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 26, 2018, 01:05 PM IST

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    आसाराम की बेटी भारती

    अहमदाबाद। आसाराम उर्फ आसुमल ताउमल हरपलाणी को उम्र कैद हो जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उभरा कि अब उनकी अथाह सम्पत्ति को कौन संभालेगा? यह सम्पत्ति केवल भारत ही नहीं, बल्कि अन्य देशों में भी हैं। उनका बेटा भी दुष्कर्म के आरोप में सूरत की जेल में है। ऐसे में सभी यही मानकर चल रहे हैं कि आसाराम के दो विश्वासपात्र एेसे हैं, जो आसाराम की अनुपस्थिति में उनके साम्राज्य को संभालेंगे। ये दोनों हैं उनकी बेटी भारती और उदय सांगाणी। देश में 400 और विदेश में 20 से अधिक आश्रम…

    अब यह तय हो गया है कि आसाराम सारी जिंदगी जेल में ही गुजारेगा। साढ़े चार साल से उनकी अनुपस्थिति में सारे आश्रमों की देखभाल उनकी बेटी भारती और पत्नी लक्ष्मी देवी कर रही थी। इस दौरान दोनों ने आसाराम के सारे आश्रमों का संचालन किया। इससे साधकों और भक्तों का विश्वास उन पर दृढ़ हो गया। इसके अलावा उनके एक और विश्वासपात्र उदय सांगाणी भी अब आश्रमों के संचालन में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, ऐसा माना जा रहा है। अभी देश में आसाराम के 400 आश्रम हैं और विदेश में 20 से अधिक आश्रम हैं। देश में उनके कई आश्रमों की जमीन विवादास्पद है, इसलिए संभव है, उन विवादित जमीनों को सरकार हस्तगत कर ले।

    ऋषिप्रसाद नाम की मैगजीन का प्रकाशन

    आसाराम आश्रम द्वारा रचनात्मक प्रवृत्तियों और आचार-विचार की शुद्धि के नाम पर ऋषिप्रसाद नामक मैगजीन प्रकाशित की जाती है। यह मैगजीन मार्केट में आसाराम की मार्केर्टिंग हेमरिंग करती है। ताकि साधक उनके जाल में जकड़े रहें। एक समय ऐसा भी था, जब इस मैगजीन की प्रसार संख्या 14 लाख थी। पर बाप-बेटे दुष्कर्म के आरोप में जेल गए, तो इसकी प्रसार संख्या लगातार कम होती गई।

    बेटे से ज्यादा बेटी पर अधिक विश्वास

    आसाराम को जितना भरोसा अपनी बेटी भारती पर है, उतना बेटे नारायण सांई पर नहीं। वैसे भी पिछले साढ़े चार साल से भारती ही आश्रमों का संचालन कर रही हैं। इस कार्य में वे अब निपुण भी हो गई है। भारती के साथ उनकी मां लक्ष्मी देवी भी उनका सहयोग करती हैं। दूसरी ओर आसाराम के बहुत ही करीबी उदय सांगाणी जिसे आसाराम ‘हेन्यमेन’ बताते आए हैं, वे आसाराम का पूरा आर्थिक कारोबार संभालते आए हैं। सभी आश्रमों की आय की पूरी जानकारी रखते हैं। अब तक का पूरा कारोबार उदय ही संभालते आए हैं, इसलिए आश्रमोें के संचालन में आर्थिक लेन-देन का काम इन्हीं पर डाला जा सकता है। उदय के समर्थन में कई साधक भी हैं।

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    विश्वासपात्र उदय सांगाणी।
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