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अहमदाबाद से आगे चलकर साबरमती बन जाती है केमिकलमती

जल संकट :धोलका के सरोडा गांव के पास से नदी बहती है, फिर भी लोग प्यासे।

Dainik Bhaskar

Jun 07, 2018, 04:22 PM IST
अहमदाबाद में खूबसूरत दिखाई देने वाली साबरमती नदी शहर से दूर ग्रामीण इलाकों में पहुंचते ही बन जाती है केमिकलमती अहमदाबाद में खूबसूरत दिखाई देने वाली साबरमती नदी शहर से दूर ग्रामीण इलाकों में पहुंचते ही बन जाती है केमिकलमती

अहमदाबाद। साबरमती नदी अहमदाबाद की पहचान ही नहीं जीवनरेखा भी है, पर धोलका तहसील के गांवों के लिए यह प्रदूषण फैलाने वाली नदी बन गई है। शहर से होकर बहने वाली साबरमती में नर्मदा का पानी आता है और गांवों में इसी नदी में फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त कचरा बहता है। सरोडा गांव में साबरमती नदी में पानी तो है, पर उसका रंग बदला हुआ है। इसे देखते हुए ऐसा लगता है कि जैसे साबरमती में फैक्ट्रियों को केमिकलयुक्त कचरा छोड़ने की छूट दे दी गई है। सरोडा गांव के पास से नदी होने के बावजूद ग्रामीण प्यासे ...

नदी के किनारे रहने वाले ग्रामीण केमिकल और प्रदूषण से परेशान हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गंदे पानी के कारण मच्छरों का उपद्रव बढ़ गया है और मच्छरदानी भी काम नहीं करती है। धोलका तहसील का वौठा गांव साबरमती नदी और अन्य नदियों का संगम है। यहां से होकर बहने वाली नदियों में पानी तो है, पर उसका रंग बदला हुआ है। उसमें पानी कम केमिकल ज्यादा है। ग्रामीण बताते हैं कि बरसात के मौसम में नदी में कुछ दिनों तक साफ पानी दिखाई देता है। बरसात का मौसम खत्म होते ही धीरे-धीरे नदी के पानी का रंग बदलने लगता है। इस संबंध में जब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव केसी मिस्त्री और पालिका के स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल ऑफिसर डॉ. भावन सोलंकी से संपर्क करने की कोशिश की गई पर नहीं मिले। यहां तक कि मैसेज का भी उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

बरसात में शुद्ध पानी दिखाई देता है

साबरमती नदी में बरसात और बाढ़ में ही शुद्ध पानी दिखाई देता है। भारी बरसात होने पर पुल के ऊपर से पानी बहता है। बरसात बंद होने के बाद नदी में कभी भी साफ पानी नहीं दिखाई देता। -केवलभाई देवीपूजक, निवासी, सरोडा गांव

ऐसे रहा तो खंभात की खाड़ी भी मैली हो जाएगी

हाथीजण वाेर्ड के नगरसेवक अतुल पटेल ने बताया कि ओढव, वटवा और नरोडा की फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त कचरा विशाला सर्कल के पास मेगालाइन से बिना शुद्ध किए ही छोड़ा जाता है। मेगालाइन से छोड़े गए पानी की जीपीसीबी और पालिका द्वारा मॉनिटरिंग की जानी चाहिए। फैक्ट्रियों का पानी की जांच के बाद ही साबरमती में छोड़ना चाहिए। कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो खंभात की खाड़ी भी मैली हो जाएगी।

मच्छरदानी भी काम नहीं करती है

सरोडा में 5 से 6 हजार लोगों की आबादी है। साबरमती नदी में केमिकल का पानी छोड़ने से मच्छरों का उपद्रव बढ़ गया है। रात में मच्छरदानी भी काम नहीं करती है। शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती है। -केशाभाई ठाकोर, निवासी, सरोडा गांव


खूबसूरत और साफ साबरमती नदी। खूबसूरत और साफ साबरमती नदी।
अहमदाबाद की जीवनरेखा है यह नदी। अहमदाबाद की जीवनरेखा है यह नदी।
सरोडा गांव के पास से होकर बहने वाली नदी में फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त कचरा छोड़ने से पानी का रंग बदल जाता है। सरोडा गांव के पास से होकर बहने वाली नदी में फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त कचरा छोड़ने से पानी का रंग बदल जाता है।
ग्रामीणों काे पीने का पानी तो दूर, शुद्ध हवा भी नहीं मिलती ग्रामीणों काे पीने का पानी तो दूर, शुद्ध हवा भी नहीं मिलती
यहां नदी के पानी का रंग बदल जाता है यहां नदी के पानी का रंग बदल जाता है
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अहमदाबाद में खूबसूरत दिखाई देने वाली साबरमती नदी शहर से दूर ग्रामीण इलाकों में पहुंचते ही बन जाती है केमिकलमतीअहमदाबाद में खूबसूरत दिखाई देने वाली साबरमती नदी शहर से दूर ग्रामीण इलाकों में पहुंचते ही बन जाती है केमिकलमती
खूबसूरत और साफ साबरमती नदी।खूबसूरत और साफ साबरमती नदी।
अहमदाबाद की जीवनरेखा है यह नदी।अहमदाबाद की जीवनरेखा है यह नदी।
सरोडा गांव के पास से होकर बहने वाली नदी में फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त कचरा छोड़ने से पानी का रंग बदल जाता है।सरोडा गांव के पास से होकर बहने वाली नदी में फैक्ट्रियों का केमिकलयुक्त कचरा छोड़ने से पानी का रंग बदल जाता है।
ग्रामीणों काे पीने का पानी तो दूर, शुद्ध हवा भी नहीं मिलतीग्रामीणों काे पीने का पानी तो दूर, शुद्ध हवा भी नहीं मिलती
यहां नदी के पानी का रंग बदल जाता हैयहां नदी के पानी का रंग बदल जाता है
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