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भय्यू महाराज के न हाेने से मोदी के 575 करोड़ के सपने का क्या होगा ?

साबरकांठा के वडाली तहसील के महोर गांव में सरकारी 539.96 एकड़ जमीन पर इस प्रोजेक्ट को तैयार करने की योजना थी।

Dainik Bhaskar

Jun 15, 2018, 05:49 PM IST
संतनगरी का प्रोजेक्ट भैयुजी महाराज के नेतृत्व में पूरा होना था। संतनगरी का प्रोजेक्ट भैयुजी महाराज के नेतृत्व में पूरा होना था।

  • भय्यू महाराज के मार्गदर्शन में होना था संतनगरी का सपना साकार।
  • 540 जमीन पर 575 करोड़ की लागत से बननी थी संतनगरी।

अहमदाबाद। आध्यात्मिक गुरु और सामाजिक कार्यकर्ता भय्यू महाराज ने मंगलवार को इंदौर में खुद को गोली मारकर सुसाइड कर लिया। उनके जाने से गुजरात में मोदी के 575 करोड़ के उस सपने का क्या होगा, जिसे ‘संतनगरी’ प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता है। इस प्रोजेक्ट को सरकार की मदद से भय्यू महाराज के नेतृत्व में पूरा होना था। 4-5 साल में पूरा होना था…

पिछले महीने भय्यू जी गुजरात आए थे, इस दौरान उन्होंने बताया था कि गुजरात में नई पीढ़ी के लिए अत्यंत महत्वाकांक्षी ‘संतनगरी’ के संबध में स्ट्रेटजी प्लान तैयार किया गया है। विशेषकर नई पीढ़ी को संतों के आदर्शाें को आज की आधुनिक शैली में सर्जनात्मक रूप से प्रस्तुत किया जाए, इसके लिए विचार-विमर्श हुआ है। आने वाले 4-5 सालों में यह महत्वपूर्ण काम हो जाए।

540 एकड़ जमीन पर संतनगरी

साबरकांठा के वडाली तहसील के महोर गांव में सरकारी 539.96 एकड़ जमीन पर इस प्रोजेक्ट को तैयार करने की योजना थी। तीन चरणों में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट की लागत 575.20 करोड़ रुपए है। नरेंद्र मोदी जब मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र से राशि लेने के लिए मदद का आश्वासन दिया था।

1370 संतों-महापुरूषों की झांकी होगी

देशभर के 2370 विभिन्न संतों-महापुरूषों के जीवन से लोग प्रेरणा लें, इसके लिए उनके जीवन की हूबहू झांकियों की पूरी संतनगरी में साकार करने की योजना है। संतों-महापुरूषों की पूरी सूचनी तैयार की जा रही है। पहाड़, झरने, सरोवरों और 50 गुफाओं, स्तूपों, स्तंभों, शिल्पों, स्थापत्यों, मेडिटेशन सेंटर्स, नालेज सेंटर्स वाली यह संतनगरी जब साकार होगी, तब राज्य का पर्यटन भी बढ़ जाएगा।

पहले चरण में इन महापुरूषों की जीवन की झांकी

स्वामी दयानंद सरस्वती, भक्त कति नरसिंह महेता, मीराबाई, संत कबीर, संत तुलसी दास, सूरदास, गुरुगोविंद सिंह, गौतम बुद्ध, विवेकानंद, रामकृष्ण परमहंस, संत ज्ञानेश्वर, तुकाराम, मुक्ताबाई, महर्षि अरविंद जैसे 51 महापुरूषों-संतों की जीवन की झांकी इसके पहले चरण में तैयार करने की योजना थी।

साबरकांठा के वडाली तहसील के महोर गांव में सरकारी 539.96 एकड़ जमीन पर इस प्रोजेक्ट को तैयार करने की योजना थी। साबरकांठा के वडाली तहसील के महोर गांव में सरकारी 539.96 एकड़ जमीन पर इस प्रोजेक्ट को तैयार करने की योजना थी।
3 चरणों में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट का लागत 575 करोड़ रुपए थी। 3 चरणों में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट का लागत 575 करोड़ रुपए थी।
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संतनगरी का प्रोजेक्ट भैयुजी महाराज के नेतृत्व में पूरा होना था।संतनगरी का प्रोजेक्ट भैयुजी महाराज के नेतृत्व में पूरा होना था।
साबरकांठा के वडाली तहसील के महोर गांव में सरकारी 539.96 एकड़ जमीन पर इस प्रोजेक्ट को तैयार करने की योजना थी।साबरकांठा के वडाली तहसील के महोर गांव में सरकारी 539.96 एकड़ जमीन पर इस प्रोजेक्ट को तैयार करने की योजना थी।
3 चरणों में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट का लागत 575 करोड़ रुपए थी।3 चरणों में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट का लागत 575 करोड़ रुपए थी।
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