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True Love: पति को अपनी किडनी देकर दिया जीवनदान

शादी के 5 साल बाद पति की किडनी फेल हो गई, तो पत्नी ने आगे बढ़कर किया ये काम।

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2018, 01:04 PM IST
कल्पेश ने मेरी किडनी लेने से इंकार कर दिया था। कल्पेश ने मेरी किडनी लेने से इंकार कर दिया था।

नडियाद। पति-पत्नी के बीच समर्पण ही सबसे बड़ा सेतू है, जो एक-दूसरे को करीब लाता है। कठिन परिस्थितियों में कौन किसके काम आता है, यही इस बात का सबूत है कि दोनों एक-दूसरे को कितना चाहते हैं। शादी के 5 साल बाद पति की किडनी फेल हो गई, तो पत्नी ने आगे आकर अपनी किडनी पति को डोनेट कर दी। इससे केवल पति को ही नहीं, बल्कि पत्नी को भी नया जीवन मिल गया। आश्चर्य यह कि किडनी मेच भी हो गई…

जीवन में आए कठिन दिनों को याद करते हुए अंजुमबेन कल्पेश भाई वोरा(33) ने बताया कि 18 मई 2003 को हमारी शादी हुई। इस दौरान एक दिन मेरी नजर पति के पैर पर पड़ी, उनके पैर में सूजन थी। इस पर हम दोनों डॉक्टर के पास गए। जहां ब्लडप्रेशर अधिक होने के कारण डॉक्टर ने कार्डियोग्राम करने की सलाह दी। इसकी रिपोर्ट नार्मल आई। इस पर डॉक्टर ने कहा कि यह किडनी की तकलीफ हो सकती है। हमने तुरंत नडियाद की किडनी अस्पताल जाकर किडनी की जांच करवाई, जहां पता चला कि पति की दोनों किडनियां फेल हो गई हैं। इसके बाद हम अहमदाबाद के सिविल अस्पताल के किडनी इंस्टीट्यूट गए। जहां सभी तरह की जांच के बाद डॉक्टर ने डायलिसिस शुरू किया। वहां हमें बताया गया कि कल्पेश की किडनी ट्रांसप्लांट करनी होगी।

हम उलझन में पड़ गए

अब हमारे लिए मुश्किल की घड़ी थी। हम उलझन में पड़ गए। आखिर में मैंने कल्पेश को अपनी किडनी देने का निर्णय लिया। कल्पेश मेरे इस निर्णय से खुश नहीं थे। उन्होंने मेरी किडनी लेने से इंकार कर दिया। फिर डॉक्टर से बात की, मेरी जांच हुई, यहां आकर लगा कि ईश्वर को जो मंजूर होता है, वही होता है। मेरी किडनी कल्पेश से मेच हो गई। आखिर मेरी किडनी कल्पेश में ट्रांसप्लांट कर दी गई। मैंने कोई महान कार्य नहीं किया है, मैंने तो केवल पत्नी धर्म ही निभाया है।

मैंने कोई महान कार्य नहीं किया है, मैंने तो केवल पत्नी धर्म ही निभाया है। मैंने कोई महान कार्य नहीं किया है, मैंने तो केवल पत्नी धर्म ही निभाया है।
खुद कल्पेश मेरे इस निर्णय से खुश नहीं थे। खुद कल्पेश मेरे इस निर्णय से खुश नहीं थे।
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कल्पेश ने मेरी किडनी लेने से इंकार कर दिया था।कल्पेश ने मेरी किडनी लेने से इंकार कर दिया था।
मैंने कोई महान कार्य नहीं किया है, मैंने तो केवल पत्नी धर्म ही निभाया है।मैंने कोई महान कार्य नहीं किया है, मैंने तो केवल पत्नी धर्म ही निभाया है।
खुद कल्पेश मेरे इस निर्णय से खुश नहीं थे।खुद कल्पेश मेरे इस निर्णय से खुश नहीं थे।
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