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गुजरात सरकार को जगाने के लिए संतों ने थामी बागडोर

नर्मदा में अभी जो पानी दिखाई दे रहा है, वह समुद्र और गटर का पानी है।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Feb 07, 2018, 03:28 PM IST

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    सरकार को जगाने के लिए अब संतों ने थामी बागडोर।

    भरुच। पावन सलिला मां नर्मदा में डूबकी लगाकर श्रद्धालु जहां खुद को धन्य समझते हैं, वही नर्मदा आज पूरी तरह से सूखने के कगार पर है। पिछले 4 सालों से नर्मदा डेम से पानी छोड़ा ही नहीं गया, इसलिए नदी सूखने लगी है। जिस नदी का पाट एक समय 1250 मीटर तक फैला था, वही आज सिमटकर 500 मीटर रह गया है। इसलिए राज्य के संतों ने सरकार को जगाने के लिए बागडोर थाम ली है।संत करेंगे उपवास…

    झाड़ेश्वर स्थित गायत्री मंदिर के अलखगिरी महाराज ने बताया कि केवडिया से भाड़भूत तक नर्मदा नदी के पट्टे पर 200 से अधिक मंदिर और आश्रम हैं। स्कंदपुराण के अनुसार शिवालयों में नर्मदा मैया के पवित्र जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। पिछले चार सालों से नर्मदा नदी पूरी तरह से सूख गई है। नदी में समुद्र का खारा पानी मिल गया है। ऐसे में शिवजी के अभिषेक के लिए नर्मदा नीर न होने पर संतों में नाराजगी है।

    डेम बनने से परेशानी बढ़ी

    नर्मदा नदी के किनारे स्थित आश्रमों में अन्न उगाने तथा गौशाला में भी नर्मदा का पानी ही इस्तेमाल किया जाता है। पर अब इस नदी में डेम बनाए जाने से पानी कम से कमतर होता गया है। अब तो नदी में स्नान करने लायक भी पानी नहीं है। अभी जो पानी दिखाई दे रहा है, वह समुद्र का और गटर का पानी है।

    नदी लगातार बहती रहे, इतना पानी तो छोड़ो

    नर्मदा नदी में पानी न होने के कारण हिल्सा मछली का 60 करोड़ का कारोबार ठप्प हो गया है। यही नहीं, 25 हजार मछुआरों की रोजगारी का सवाल भी खड़ा हो गया है। फरवरी में शुरू होने वाली हिल्सा मछली का सीजन विफल साबित होगा, इसकी पूरी आशंका है। नदी लगातार बहती रहे, इतना पानी तो छोड़ा जा सकता है।

    उद्योगों को पानी देने के कारण बने ऐसे हालात

    डेम से अधिकांश पानी उद्योगों को दे दिए जाने के कारण किसानों की हालत दयनीय हो गई है। नदी में पानी नहीं छोड़े जाने से सब्जी केला, पपीता समेत कई फसलें नहीं ली गई, जिससे किसानों को 3 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा। नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब नर्मदा नदी में पानी रहता था। आज जब वे पीएम हो गए हैं, तब उनके गुजरात दाैरे पर नर्मदा नदी में पानी छोड़ा जाता है। इसका आशय यही हुआ कि डेम में पानी छोड़ा जा सकता है, पर सरकार पानी छोड़ना नहीं चाहती।

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    नर्मदा मैया के लिए संत और साधू उपवास करेंगे।
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    नर्मदा नदी में खारापन बढ़ जाने से हिल्सा मछली का कारोबार प्रभावित।
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    सरकारी कार्यक्रमों में पानी की बरबादी हुई।
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