आश्चर्य / वडोदरा के डॉक्टर्स के लिए एक अबूझ पहेली हैं 119 वर्षीय जबराभाई राठवा

ऑपरेशन कराने वाले 119 वर्षीय जबरा भाई रेवला भाई राठवा ऑपरेशन कराने वाले 119 वर्षीय जबरा भाई रेवला भाई राठवा
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ऑपरेशन कराने वाले 119 वर्षीय जबरा भाई रेवला भाई राठवाऑपरेशन कराने वाले 119 वर्षीय जबरा भाई रेवला भाई राठवा

  • इस उम्र में वीपी-ईसीजी नार्मल
  • जांघ की सर्जरी के लिए हुए थे भर्ती
  • बीड़ी-तम्बाखू को हाथ भी नहीं लगाया
  • 100 साल की उम्र तक बजाई बांसुरी

दैनिक भास्कर

Feb 13, 2020, 03:51 PM IST

वडोदरा. सयाजी हॉस्पिटल में 119 साल के बुजुर्ग जांघ की सर्जरी के लिए भर्ती हुए। जब डॉक्टरों ने ऑपरेशन के पहले उनकी जांच की, तो हतप्रभ रह गए। उनका बीपी ही नहीं, बल्कि ईसीजी नार्मल था। यही नहीं, वे ऑपरेशन के लिए पूरी तरह से फिट थे। जो ऑपरेशन निजी अस्पतालों में एक से डेढ़ लाख रुपए में होता है, वही ऑपरेशन सयाजी में बिलकुल मुफ्त होता है। इसलिए वयोवृद्ध जबराभाई राठवा यहां भर्ती हुए हैं।
 

जांघ का ऑपरेशन हुआ था
मूल रूप से छोटाउदेपुर जिले के कवांट के ननावांटा में रहने वाले जबरा भाई रेवला भाई राठवा पिछले शुक्रवार को घर पर खाट से अचानक गिर पड़े। उम्र अधिक होने के कारण उनकी बायीं जांघ में फ्रेक्चर हो गया। परिवार वालों ने उन्हें सयाजी हॉस्पिटल में भर्ती किया। यहां पर आर्थोपेडिक विभाग के डॉ.वी.एच.चावली के मार्गदर्शन में डॉ. धनजी चौधरी और डॉ. प्रभु चौधरी ने उनकी जांघ का ऑपरेशन किया।
 

ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था
इस संबंध में बात करते हुए डॉ. वी एच चावली ने बताया कि ऑपरेशन जटिल तो न था, पर चुनौतीपूर्ण अवश्य था। प्रोॅक्सिमल फिमोरल नेली नाम की हड्‌डी में क्रेक था। उनका ऑपरेशन सरल था, पर उम्र अधिक होने के कारण हमने सावधानी रखी। पर जब उनका बीपी और ईसीजी लिया गया, तो वह नार्मल था। इससे हमें आश्चर्य हुआ कि इतनी अधिक उम्र में सब कुछ नार्मल कैसे है। हमारे लिए वे किसी अबूझ पहेली से कम नहीं हैं। इससे हमें ऑपरेशन करने में कोई परेशानी नहीं हुई। 20 साल पहले उन्हें एक बैल ने सींग मार दिया था, तब उनकी जांघ में चोट आई थी।
 

शराब-बीड़ी-तम्बाखू को हाथ नहीं लगाया
अपने नाना के बारे में उसके नाती ईश्वर भाई ने बताया कि उनके भोजन में मक्के की रोटियां और सब्जी प्रमुख है। इसके अलावा वे घर के घी का सेवन करते हैँ। 20 साल पहले दांत गिर गए हैं, इसलिए अब उड़द की दाल का ढेबरा, गेहूं के आटे का भजिया और भात-दूध और घी का सेवन करते हैं। शराब-बीड़ी-सिगरेट-तम्बाखू काे आज तक हाथ भी नहीं लगाया। पूरे परिवार को किसी तरह का व्यसन नहीं है।
 

सुबह 4 बजे उठना रोज का काम है
सुबह 4 बजे नियमित रूप उठना उनका काम है। घर के बाहर खाट पर आराम फरमाते हैँ। कोई आए, तो उनसे बात भी करते हैं। दोपहर 12 बजे भोजन करते हैं। चार बजे घर के अंदर आराम करते हैं। रात में भी जल्द ही भोजन कर लेते हैं। वे 20 साल तक नानावाट के सरपंच रहे। 100 साल की उम्र तक वे बांसुरी बजाते थे।

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