धर्म-आस्था / 12 साल की खुशी 29 मई को बनेगी साध्वी



12 वर्षीय खुशी 12 वर्षीय खुशी
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12 वर्षीय खुशी12 वर्षीय खुशी

  • रेलवे में अफसर पिता ने दिया लालच- डॉक्टर बनाऊंगा, फिर भी नहीं मानी
  • छुट्टियों में साध्वी तेजस्वी रेखा और प्रमोद रेखा के सानिध्य में विहार करने जाती थी
     

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2019, 01:32 PM IST

सूरत. रेलवे में सीनियर एक्जीक्यूटिव अफसर अहमदाबाद निवासी विनीत शाह की 12 वर्षीय बेटी खुशी 29 मई को दीक्षा लेंगी। मुमुक्षु खुशी का रविवार को मजूरागेट स्थित श्री कैलाश जैन संघ में दीक्षा मुहूर्त निकाला गया। इसके साथ ही 29 मई को आचार्य गुणरत्नसूरी के सानिध्य में मुमुक्षु खुशी दीक्षा लेंगी।


संयम के मार्ग के लिए पढ़ाई छोड़ी
खुशी ने 7वीं कक्षा में ही अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़कर संयम मार्ग को चुना। छठी कक्षा में खुशी ने 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। करोड़पति परिवार से होने के बावजूद खुशी ने संसार की मोह-माया का त्यागकर संयम मार्ग को चुना। घर में नौकर-चाकर, गाड़ी, ब्रांडेड कपड़ों के साथ खुशी को बचपन से ही सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त हुईं। दीक्षा के बाद मुमुक्षु खुशी साध्वी तेजस्वी रेखा और साध्वी प्रमोद रेखा के सानिध्य में जीवन व्यतीत करेंगी। 


कक्षा 6 में खुशी को मिले थे 96 फीसदी अंक, डांस में आती थी अव्वल 
मुमुक्षु खुशी ने बताया कि पिछले 3 वर्षों से स्कूल की छुट्टियों में साध्वी तेजस्वी रेखा और साध्वी प्रमोद रेखा के सानिध्य में विहार करने जाती थी। वहां साध्वियों के साथ संयम जीवन जीने की प्रेरणा मिली। इसके साथ ही साध्वियों ने खुशी को संयम मार्ग का महत्व भी बताया। खुशी ने कहा कि संयम ही एक ऐसा मार्ग है जो मोक्ष के मार्ग पर लेकर जाता है। इसके बाद मैंने माता-पिता से कहा कि मुझे इस पापमयी संसार में नहीं रहना, मुझे दीक्षा लेनी है। 


धार्मिक संस्कार के लिए जाती थी पाठशाला 
खुशी की मां भाविनी शाह ने बताया कि अहमदाबाद स्थित शांतिनगर जैन पाठशाला में खुशी को धार्मिक संस्कार के लिए भेजते थे। जहां कई प्रतियोगिताएं होती थीं, जिसमें डांस में खुशी ने हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त किया। इसके अलावा मुमुक्षु खुशी के दिव्यांग (नेत्रहीन) दादा-दादी को सन 1990 में राष्ट्रीय स्तर पर बेस्ट म्यूजिक टीचर का अवॉर्ड भी मिला। 


पिता ने दिया लालच, फिर भी नहीं मानी खुशी 
खुशी के पिता विनीत शाह ने बताया कि हमारे घर में पहले से ही धार्मिक माहौल रहा है। 12 वर्ष पहले मेरे बड़े भाई के साथ उनकी पत्नी और उनके बेटे ने भी दीक्षा ली थी। हमने खुशी को लालच भी दिया कि हम उसे डॉक्टर बनाएंगे और उसे पढ़ने के लिए जिस भी यूनिवर्सिटी में जाना होगा उसे वहां भेजेंगे। यदि उसे दीक्षा लेनी है तो 18 वर्ष पूरे होने के बाद ले। लेकिन खुशी ने हमारी बात नहीं मानी। 

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