लापरवाही / रोज 25 हजार खर्च करना मंजूर, पर शेड बनवाना मंजूर नहीं रेल्वे को



इसी क्रेन को जंग से बचाने के लिए रोज हो रहा है 25 हजार रुपए का खर्च इसी क्रेन को जंग से बचाने के लिए रोज हो रहा है 25 हजार रुपए का खर्च
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इसी क्रेन को जंग से बचाने के लिए रोज हो रहा है 25 हजार रुपए का खर्चइसी क्रेन को जंग से बचाने के लिए रोज हो रहा है 25 हजार रुपए का खर्च

  • बारिश में भीग रही 23 करोड़ की क्रेन
  • क्रेन के हाईड्रोलिक पार्ट्स भीगने से हो जाते हैं खराब 
  • 142 टन वजनी है ये क्रेन

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 02:03 PM IST

सूरत. उधना यार्ड में 23 करोड़ रुपए की 142 टन वजनी हैवी रेल क्रेन पिछले चार महीने से खड़ी है। यह क्रेन पिछले एक महीने से बारिश में भीग रही है, लेकिन रेलवे शेड तक नहीं बनवा पा रही है। इसमें ऐसे सेंसटिव हाइड्रोलिक पार्ट्स हैं, जो भीगने से खराब हो जाते हैं। भीगने से बचाने के लिए इसे कपड़े से ढंका गया है। इसकी रोज मरम्मत के लिए मुंबई के परेल वर्कशाप से इंजीनियर अाते हैं। अगर इनका खर्चा जोड़ा जाएगा तो लगभग 25 से 50 हजार रोज पड़ता है।

 

मुंबई मंडल की एकमात्र हैवी क्रेन

यह मुंबई मंडल की एकमात्र हैवी क्रेन है। मुंबई से सूरत, नंदुरबार, जलगांव, भुसावल और रतलाम तक में कहीं भी डिरेलमेंट होने पर इसे राहत कार्य के लिए भेजा जाता है। इन दिनों बरसात में भीग रही इस क्रेन को कर्मचारी जंग से बचाने में जुटे रहते हैं। रोज बारिश निकल जाने के बाद कर्मचारी इसकी मरम्मत में जुट जाते हैं। इसका मेंटेनेंस जटिल काम है, इसलिए मुंबई के परेल लोकोमोटिव वर्क शॉप से टेक्निकल विभाग के स्पेशलिस्ट इंजीनियर बुलाए जाते हैं जो इसकी मरम्मत करते हैं। 


हाइड्रोलिक पार्ट्स पर असर पड़ रहा है 
सूरत स्टेशन के निदेशक सीआर गरुड़ा ने बताया कि पिछले चार महीने से यार्ड की रिमॉडलिंग हो रही है। इससे शेड तोड़ दिया गया है, इसलिए क्रेन बाहर खड़ी है। शेड जल्द ही बना लेंगे फिर इसे अंदर खड़ी करेंगे। इस क्रेन की लगातार देखभाल हो रही है।

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