घोटाला / 3.22 करोड़ से खरीदे 2300 डस्टबिन 10 माह में ही बेकार



बेकार डस्ट बिन बेकार डस्ट बिन
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बेकार डस्ट बिनबेकार डस्ट बिन

  • 1200 डस्टबिन  उखाड़ लिए
  • अधिकारी बोले- ठीक कर फिर लगा देंगे

Dainik Bhaskar

Sep 09, 2019, 01:50 PM IST

सूरत. मनपा ने 3.22 करोड़ रुपए से 2300 डस्टबिन खरीदे, लेकिन ये एक साल में ही बेकार हो गए। 1200 डस्टबिन तो वापस निकालकर मनपा कार्यालयों में रख दिए गए हैं। अधिकारी कह रहे हैं कि इनकी मरम्मत कराकर इन्हें फिर से लगवा दिया जाएगा। एक डस्टबिन लगभग 14 हजार रुपए का है। अब इसकी मरम्मत कराने के लिए अलग से पैसे खर्च करने पड़ेंगे। 
कई स्थानों से गायब हैं डस्ट बिन
शहर के कई इलाकों से डस्टबिन गायब हैं। कई महीने पहले निकाले गए बेकार डस्टबिन अब तक नहीं लगाए गए। 2018 के सर्वेक्षण में पिछड़ने के बाद मनपा के स्वास्थ्य विभाग ने नंबर बढ़ाने के लिए शहर भर में लगभग 2300 डबल डोर डस्टबिन लगवाए थे। इन्हें कचरे के कंटेनरों की जगह पर लगाया गया था।
देखभाल नहीं
मनपा ने इन्हें लगा तो दिया, लेकिन इनकी देखभाल ठीक तरीके से नहीं की। इसकी वजह से 10 महीने में ही ये जर्जर हो गए। कुछ को तो लोगों ने तोड़ दिया। अब सर्वे में नंबर पाने के लिए टूटे-फूटे डस्टबिन को दुरुस्त कराकर फिर से लगाने पर जोर दिया जा रहा है। मनपा अधिकारियों का कहना है कि टूट-फूट चुके कुछ डस्टबिन वारंटी पीरियड में हैं। उन्हें ठेकेदार कंपनी ठीक करके देगी, जबकि अन्य को मनपा अपने वर्कशॉप में ठीक करेगी। अधिकारियों ने कहा कि हमने कुछ जगहों पर कैमरे लगवाए हैं, ताकि उन लोगों पर निगरानी रखी जा सके, जो डस्टबिन को तोड़ देते हैं।


14 हजार में खरीदा था एक डस्टबिन
 अब इनकी मरम्मत कराने पर भी खर्च करेंगे लाखों रुपए
 लिंबायत जोन में लगाए गए 200 डस्टबिन में से 100 टूट चुके थे। इन्हें मनपा कर्मचारियों ने निकालकर जोन कार्यालयों में रख दिया है। ये कई महीने से यहीं रखे हुए हैं, लेकिन मनपा के अधिकारी न तो इनकी मरम्मत करा रहे हैं, न ही दोबारा लगा रहे हैं।  लिंबायत के साथ उधना जोन के पांडेसरा जैसे इलाकों में भी सड़कों पर लगाए गए सभी डस्टबिन निकाल लिए गए हैं। वहां कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की है।


डस्टबिन से रोज कचरा भी नहीं निकालते कर्मचारी
स्थानीय पार्षद कपिला पटेल ने बताया कि लिंबायत में करीब 200 डस्टबिन लगाए गए थे, लेकिन इनकी देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। इसके साथ ही अधिकांश डस्टबिन में से कचरा भी रोज नहीं निकाला जाता है। इससे डस्टबिन कचरे से भरे पड़े रहते हैं। जानवर उनमें से कचरा इधर-उधर सड़क पर बिखरा देते हैं। रोज कचरा साफ नहीं होने पर स्थानीय लोग भी डस्टबिन तोड़ देते हैं। अगर मनपा रोज इनमें से कचरा निकाल ले तो ऐसी दिक्कत नहीं आएगी। सड़क पर कचरा फैल जाने से लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।


सहयोग नहीं मिलने से खराब हो रहे डस्टबिन
हमने मरम्मत कराने के लिए कई जगहों पर टूट चके डस्टबिन को निकाल लिया है। कुछ जगहों पर लोगों ने ही डस्टबिन को तोड़ दिया है। हम लोगों की सहूलियत के लिए डस्टबिन लगाते हैं, लेकिन उनका सहयोग नहीं मिलने के कारण डस्टबिन खराब हो रहे हैं। हम इनकी मरम्मत कराकर फिर से उसी जगह पर लगवा देंगे, जहां से निकाले थे। -डॉ. एसएस दास, स्वास्थ्य अधिकारी, लिंबायत जोन, मनपा


अधिकारी कभी जांच नहीं करते 
महानगर पालिका की लापरवाही से कई इलाकों में लोगों ने डस्टबिन तोड़ दिए। मनपा अधिकारी टूटे डस्टबिन को उठा ले जाते हैं, लेकिन कभी जांच-पड़ताल नहीं करते कि ये कैसे टूटे या किसने तोड़ दिए। लिंबायत जोन में लगाए गए 200 डस्टबिन में लगभग 100 टूटे हुए मिले। मनपा इन्हें निकाल ले गई, लेकिन उनकी जगह पर कचरा डालने के लिए कोई अन्य वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। ऊपर से मनपा धमकी भी देती है कि सड़क पर गंदगी फैलाई तो जुर्माना लगाया जाएगा। मनपा ऐसी कार्यशैली के भरोसे स्वच्छता रैंकिंग बढ़ाना चाहती है।

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