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  • 34% of students think of dying because of less communication with parents, stress in relationships

अहमदाबाद / रिलेशनशिप में स्ट्रेस के कारण मरने का विचार आता है



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  • 1400 स्टूडेंट्स से बातचीत कर किया सर्वेक्षण
  • 34% स्टूडेंट्स अपने माता-पिता से कम बातचीत करते हैं 
  • कक्षा10-12 विद्यार्थी तनाव, चिंता, हताशा देखने को मिली

Dainik Bhaskar

Oct 11, 2019, 01:37 PM IST

अनिरुद्ध सिंह परमार, अहमदाबाद. रूरल डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट (रूडमी) के सर्वे में यह सामने आया है कि 34 प्रतिशत छात्र-छात्राएं यह मानते हैं कि तनाव,चिंता, हताशा के कारण कई बार उन्हें मरने का विचार आता है। इस सर्वे में 10-12 वीं के ही बच्चों को शामिल किया गया। बच्चों ने यह भी माना है कि माता-पिता से उनकी बहुत ही कम बातचीत होती है।
 

पढ़ाई से ज्यादा रिलेशन के कारण तनाव
सर्वे के दौरान रूडमी के काउंसलर्स ने विद्यार्थियों से बात की। उनके अनुसार वे पढ़ाई से ज्यादा रिलेशनशिप के कारण अधिक तनाव में होते हैं। उन्होंने यह भी माना कि यह सच है कि यह उम्र पढ़ाई पर केंद्रित करने की है। इसके अलावा पेरेंट्स से बातचीत कम होने के कारण उनसे उचित सलाह नहीं मिल पाती। इसलिए वे अपना रास्ता खुद चुनते हैं।
 

जब छात्रा ने अपनी रिंग फिंगर ही काट ली
एक छात्रा ने बताया कि पढ़ाई के दौरान उसके एक खास दोस्त ने उससे बातचीत बंद कर दी। इससे वह तनाव में आ गई। इस तनाव में आकर उसने अपनी रिंग फिंगर ही काट ली। वह कहती हैै- मैंने अपना दु:ख किसी को बता नहीं पाई। इसलिए मैं उलझन में पड़ गई। इसके अलावा एक अन्य छात्र ने बताया कि मेरे पेरेंट्स मेरी छोटी-छोटी बात कर दखलंदाजी करते हैं। जो मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है। उनकी इस दखलंजादी के कारण मेरा कई बार उनसे विवाद हो चुका है। 
 

स्कूल में एक बॉक्स रखा था
रूडमी के लोगों ने बताया कि इस सर्वे के लिए उन्होंने विभिन्न स्कूलों में बॉक्स रखा था, जिसमें वे अपने सवाल लिखकर डाल सकते थे। हमें 1400 स्टूडेंट्स ने अपने सवाल भेजे। इन सवालों से बच्चों की मानसिक स्थिति का पता चलता है। बॉक्स में डाले गए सवालों के आधार पर पता चला कि बच्चे किस तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैँ। इस तरह का काम हम पिछले 4 सालों से कर रहे हैं। डॉ.प्रीति तिवारी, साइकोलॉजिस्ट, काउंसलर रूडमी
 

सोशल मीडिया, ब्रांड का प्रेशन जवाबदार
हमारे देश में 15 से 29 साल के युवा अधिक खुदकुशी करते हैं। इसका कारण स्ट्रेस और सोशल मीडिया, सोशल रिलेशन, ब्रांड का प्रेशर जवाबदार है। युवाओं में बढ़ता व्यसन भी चिंताजनक है। इसके लिए हर स्कूल में काउंसलर सेंटर होना ही चाहिए। डॉ. प्रशांत भिमाणी, सीनियर साइकोलाॅजिस्ट
 

सर्वे का परिणाम

  • 21% को पढ़ाई का बोझ और 42 % को याद न रहने का बीमारी
  • 34% चिंता,तनाव, हताशा के बीच मरने की बात सोचते हैं
  • 42% का ध्यान पढ़ने में नहीं लगता
  • 21%पढ़ाई को बोझ समझते हैं
  • 17% पर पेरेंट्स का दबाव होता है
  • 17% को स्वास्थ्य संबंधी चिंता
  • 42% को परीक्षा का डर लगा रहता है
  • 17% घर से भाग जाने की सोचते हैं
  • 17% विद्यार्थियों को रिलेशनशिप की चिंता
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