समर्पण / 400 गरीब बच्चों को नि:शुल्क पढ़ा रहे है मैंगो पीपल के संचालक दंपती

Dainik Bhaskar

Feb 11, 2019, 12:29 PM IST


बच्चों के साथ राठौड़ दम्पति बच्चों के साथ राठौड़ दम्पति
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बच्चों के साथ राठौड़ दम्पतिबच्चों के साथ राठौड़ दम्पति
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  • एक बच्चे पर सालाना 10 हजार रुपए खर्च
  • नौकरी भी करते हैं दम्पति
  • संचालक खुद दसवीं फेल
     

राजकोट. शिक्षक और ज्ञान ये कोई मर्यादा का मोहताज नहीं लेकिन इसके बावजूद आज भी असंख्य गरीब बच्चे शिक्षा प्राप्त नहीं कर सकते। एक जमाने में ऐसी कहावत थी कि विद्या बेची नहीं जा सकती, लेकिन आज तो नर्सरी की फीस भी कई स्कूलों में लाखों रुपयों में है, लेकिन विद्या बेचने से बढ़ती है ऐसा मानकर राजकोट में मैंगो पीपल परिवार के दंपती राजकोट के अलग-अलग झोपड़पट्टियों के 400 से अधिक बच्चों को पढ़ा रहे हैं।


संचालक स्वयं 10 वीं फेल
ऐसा सत्कार्य करने का कारण भी बहुत सराहनीय है। सामाजिक संस्था मैंगो पीपल के संचालक मनीष राठौड़ कक्षा 10वें में फेल हुए थे और इसके कारण उन्हें नौकरी प्राप्त करने में संघर्ष करना पड़ा था। इस दौरान उन्हें विचार आया कि अगर उन्हें खुद इतना संघर्ष करना पड़ा तो गरीबों की क्या हालत होती होगी। बस इसी विचार को लेकर मनीष भाई ने झोपड़पट्टियों के बच्चों के साथ जुड़े। अभी तक मनीष भाई, उनकी पत्नी रुपल बेन और 8 शिक्षकों की टीम ने 50 झोपड़पट्टियों के बच्चों को पढ़ाकर कक्षा 10 पास कराया और उनके लिए रोजगार के द्वार खोल दिए है। आज भी 400 से अधिक झोपड़पट्टियों के बच्चों को पढ़ाने का बीड़ा मैंगो पीपल परिवार ने उठाया है और उन बच्चों के मा-बाप भी इस कार्य से खुश हैं।

 
दंपती नौकरी भी करते है, बच्चों के लिए खर्च होता है एक का वेतन 
झोपड़पट्टियों के बच्चों को पढ़ाने वाले कोई अमीर परिवार से होंगे यहीं सभी को लगता होगा, लेकिन मैंगो पीपल परिवार के संचालक मनीष राठौड़ और उनकी पत्नी दोनों नौकरी करते है। दोनों की तनख्वाह में से एक की तनख्वाह इन बच्चों पर खर्च की जाती है। अभी तक उन्होंने 29 बच्चों को निजी स्कूलों में भी पढ़ाया है। निजी स्कूलों में पढ़ाई करने के लिए इस दंपति ने एक बच्चे का खर्च सालाना एवरेज 10 हजार रुपए होता है। 

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