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नवजीवन / 11,000 वोल्ट के करंट से किशोर का दिल झुलसा, डॉक्टर्स ने बचाया



14 वर्षीय दिनेश परिहार 14 वर्षीय दिनेश परिहार
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14 वर्षीय दिनेश परिहार14 वर्षीय दिनेश परिहार

  • सीने में करंट लगने से जल गया था एक हिस्सा
  • अब वह ओलम्पिक दौड़ सकता है
  • डेढ़ महीने तक चला इलाज

Dainik Bhaskar

Nov 06, 2019, 04:18 PM IST

अहमदाबाद. 11 हजार वोल्ट का करंट लगने से किशोर का दिल झुलस गया था, जिसे निजी अस्पताल के डॉक्टर्स ने ऑपरेशन कर नया जीवन दिया। डॉक्टर्स की इस सर्जरी को मेडिकल साइंस में रेरेस्ट ऑफ रेयर कहा गया है।

 

बचने की संभावना नहीं थी

सर्जरी करने वाले डॉक्टर्स का कहना है कि ऐसे मामलों में मरीज के बचने की संभावना बिलकुल भी नहीं होती। अपने तीस साल के कैरियर में ऐसा मामला हमारे सामने नहीं आया। 
किशोर को खेत में 11 हजार वोल्ट का करेंट लगा था
हॉस्पिटल के बर्न्स, प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जन डॉ. विजय भाटिया बताते हैं कि 7 सितम्बर को राजस्थान के जोधपुर के मथणिया गांव के 14 वर्षीय किशोर दिनेश परिहार को जब अस्पताल लाया गया, तब उसके हाथ, खाेपड़ी, दिल और पैर गंभीर रूप से झुलसे हुए थे। उसे खेत में 11 हजार वोल्ट का करंट लगा था। जिससे वह जमीन पर गिर पड़ा था। जमीन गीली होने के कारण वायर उसके सीने से छू गया था, जिससे उसका दिल वाला भाग भी झुलस गया था।


अब ओलम्पिक भी दौड़ सकता है
तुरंत ही  मरीज की कल्चर रिपोर्ट और सीटी स्केन किया गया। यह रिपोर्ट 48 घंटे बाद मिली, जिसमें कहा गया था कि मरीज के सीने के भाग में करंट लगने से दिल के ऊपर स्थित सभी आवरण यानी चमड़़ी, स्नायु, नसें और पसलियाें के अलावा हृदय की रक्षा करने वाले सभी कारक बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। दिल को भी करंट लगा है, इससे उसे काफी नुकसान हुआ है। 


11 सितम्बर को पहला ऑपरेशन
डॉक्टर के अनुसार दिनेश की सर्जरी हमारे लिए एक चुनौती थी। उसके हृदय की रक्षा के लिए तुरंत सर्जरी करना अनिवार्य था। 11 सितम्बर को दिनेश का पहला ऑपरेशन किया गया। इसमें हृदय के आसपास जले हुआ अंग जो पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए थे, को निकाल दिया गया। उसके इलाज के बाद अब वह ओलम्पिक दौड़ सकता है। इस सर्जरी में हृदय रोग सर्जन डॉ. सुकुमार मेहता और अनुभवी क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डाॅ. नीरव विसावड़िया भी शामिल थे।


करंट से फेफड़े का भाग भी जल गया था
सीने के झुलसे हुए भाग को निकालने के बाद पता चला कि फेफड़े का एक हिस्सा भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे मरीज के बाजू से स्वस्थ चमड़ी और स्नायु का एक भाग लेकर दिल को कवर किया गया। दूसरे दो ऑपरेशन में पैर, पीठ, हाथ और खोपड़ी की ग्राफ्टिंग की गई। यही नहीं, उसकी ऊंगलियों में गैंग्रीन हो गया था, जिसे दूर किया गया। पूरे डेढ़ महीने तक उसका इलाज चला, फिर दिनेश को छुट्टी दे दी गई।

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