लोकसभा  / गुजरात में कांग्रेस 13 चेहरे खोज नहीं पाई, भाजपा अपने गढ़ में 3 चेहरों की तलाश में



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गुजरात कांग्रेस भवनगुजरात कांग्रेस भवन

  • राज्य में नामांकन भरने में केवल 3 दिन बाकी
  • बगावत की चिंता में कांग्रेस प्रत्याशी तय करने में पीछे
  • छोटा उदेपुर में पहली बार महिला भाजपा प्रत्याशी

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2019, 05:20 PM IST

गांधीनगर. लोकसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के फार्म भरने की आखिरी तारीख 4 अप्रैल है। पर अभी तक कांग्रेस 13 सीटों पर अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा नहीं कर पाई है। वहीं भाजपा के केवल 3 नाम ही शेष हैं। रविवार को भाजपा ने 4 प्रत्याशियों के नामों की घोषणा की। इसमें वर्तमान सांसदों का टिकट काटा गया है। छोटा उदेपुर से पहली बार किसी महिला प्रत्याशी गीता राठवा को टिकट दिया गया है।


कांग्रेस को बगावत का डर
कांग्रेस को इस समय बगावत का डर है। इसलिए नामों की घोषणा में देर हो रही है। गुजरात में 23 अप्रैल को मतदान होना है। पाटीदार बहुसंख्यक वाली गांधीनगर से अमित शाह मैदान में हैं। कांग्रेस ने यहां के विधायक सी.के. चावड़ा को मैदान में उतारना तय किया है। शाह के रोड शो के बाद अब यह माना जा रहा है कि यहां से किसी पटेल को ही टिकट दिया जाएगा।

 

अमरेली से कांग्रेस के प्रत्याशी की घोषणा नहीं
विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान पहुंचाने वाली अमरेली सीट के लिए कांग्रेस अभी तक कोई उम्मीदवार तय नहीं कर पाई है। यहां से कई दावेदार मैदान में हैं। यहीं से कांग्रेस को बगावत का डर अधिक है। इससे यहां कांग्रेस को किसी मजबूत प्रत्याशी की तलाश है। जामनगर से कांग्रेस हार्दिक पटेल को उतारना चाहती है। परंतु हाईकोर्ट की मंजूरी न मिल पाने के कारण यह सीट अभी लटकी हुई है। भाजपा ने यहां से वर्तमान सांसद पूनम माडम को उतारा है। यहां भी कांग्रेस को एक मजबूत प्रत्याशी की तलाश है।


छोटे सरदार का इंकार 
खेड़ा में छोटे सरदार के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले दिनशा पटेल एक मजबूत प्रत्याशी हैं। पर उन्होंने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है। इससे कांग्रेस यहां मुश्किल में है। अहमदाबाद पूर्व की सीट 2008 से अस्तित्व में आई है। दो बार चुनाव हुए हैं, दोनों बार भाजपा ने यहां से विजय प्राप्त की है। पिछली बार यहां से फिल्म अभिनेता परेश रावल जीते थे, पर इस बार वहां से उन्हें टिकट नहीं दिया गया है। कांग्रेस यहां से किसी को खड़ा करने के पहले भाजपा की सूची का इंतजार कर रही है। सूरत 1984 से भाजपा का गढ़ है। यहां से वर्तमान सांसद दर्शना बेन टिकट की दौड़ में सबसे आगे है। पर एक चर्चा यह है कि यहां से मूल सौराष्ट्र के ही किसी नेता को टिकट दिया जाएगा। यदि भाजपा यहां से सौराष्ट्र के किसी नेता को उतारती है, तो कांग्रेस भी ऐसा ही दांव खेल सकती है।

 

भावनगर में भाजपा ने प्रत्याशी रिपीट किया
भावनगर में भाजपा ने भारती बेन शियाण को रिपीट किया है। कांग्रेस कोली समाज के किसी मजबूत नेता की तलाश में है। यही हालत सुरेंद्रनगर सीट की भी है। भरुच से यह खबर है कि यहां से अहमद पटेल 28 साल बाद चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। भाजपा ने वर्तमान सांसद मनसुख वसावा को उतारा है। पर कांग्रेस अभी उलझन में है। पहले इसी सीट से जीत चुके राज्य सभा सांसद और कांग्रेस के खजांची अहमद पटेल को उतारा जा सकता है। यदि अहमद पटेल यहां से चुनाव लड़ते हैं, तो इस सीट से बीटीपी के छाेटू वसावा उन्हें अपना समर्थन दे सकते हैं। यदि वे चुनाव नहीं लड़ते हैं, तो  छोटू वसावा अपना उम्मीदवार खड़ा कर सकते हैं। 1991 में अहमद पटेल ने भरुच सीट से चुनाव जीता था, तब छोटू वसावा हार गए थे।


साबरकांठा से अल्पेश, महेसाणा से जयश्री बेन
कोर्ट के फैसले के कारण हार्दिक पटेल का चुनाव लड़ना मुश्किल हो रहा है, तो कांग्रेस एक बार फिर अल्पेश पर दांव लगा सकती है। चर्चा है कि अल्पेश ठाकोर को कांग्रेस साबरकांठा से मैदान में उतार सकती है। दूसरी तरफ भाजपा महेसाणा से अभी तक किसी का नाम तय नहीं कर पाई है। इससे लगता है कि वहां से जयश्री बेन को एक बार फिर अवसर मिल सकता है। दूसरी ओर एमएस पटेल का नाम भी यहां चर्चा में है।


वे 3 सीटें, जहां भाजपा-कांग्रेस को चेहरों की तलाश
मोरारजी देसाई की सीट सूरत अब भाजपा का गढ़ है। पाटीदार आंदोलन और जीएसटी के गुस्से के बाद भी 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की एकतरफा जीत हुई थी। मोरारजी देसाई यहां से 5 बार सांसद बने थे। 1984 में श्री पटेल कांग्रेस के आखिरी सांसद थे। इसके बाद कांशीराम राणा से लेकर दर्शना जरदोश तक भाजपा ही जीतती रही है। बहरहाल दोनों को यही इंतजार है कि कौन पहले अपना प्रत्याशी घोषित करे, उसी के बाद आगे की रणनीति तैयार होगी।


महेसाणा से इंदिरा लहर में भी भाजपा
महेसाणा की सीट सबसे अधिक चर्चित है। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भी भाजपा ने यहां से जीत हासिल की थी। पीएम नरेंद्र मोदी भी महेसाणा जिले के वडनगर के रहने वाले हैं। पाटीदार आरक्षण आंदोलन का जन्म भी यहीं हुआ था। 1984 से 2014 तक भाजपा ही जीतती रही है।


भाजपा का नया गढ़ अहमदाबाद पूर्व
साबरमती नदी के किनारे बसे राज्य के सबसे बड़े शहर अहमदाबाद की सीट 2008 में सीमांकन के बाद अस्तित्व में आई। 2009 की विधानसभा चुनाव में इस सीट से सबसे पहले भाजपा के हरीन पाठक ने चुनाव लड़ा। वे जीते भी। उन्होंने दीपक बाबरिया को हराया था। 2014 में यहां से परेश रावल ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था। इस बार वे मैदान में नहीं हैं।

 

यहां से कांग्रेस उलझन में

 

सीट

कांग्रेस

भाजपा

साबरकांठा

-

दीपसिंह राठौड़

गांधीनगर

-

अमित शाह

सुरेंद्रनगर

-

डॉ. मुंजपरा

जामनगर

-

पूनम माडम

अमरेली

-

नारण काछड़िया

भावनगर

-

भारती बेन शियाण

खेड़ा

-

देव सिंह चौहान

दाहोद

-

जसवंत सिंह भाभोर

भरुच

-

मनसुख वसावा

बनासकांठा

-

परबत पटेल

 

13 सीटें, जहां दोनों के प्रत्याशियों के स्पष्ट चित्र, क्योंकि यहां विवाद की बात ही नहीं थी

 

सीट

कांग्रेस

भाजपा

अहमदाबाद पश्चिम

राजू परमार

किरीट सोलंकी

वडोदरा

प्रशांत पटेल

रंजन भट्ट

राजकोट

ललित कगथरा

मोहन कुंडारिया

नवसारी

धर्मेश पटेल

सीआर पाटिल

पोरबंदर

ललित वसोया

रमेश धड़़ुक

जूनागढ़

पूंजा वंश

राजेश चूड़ासमा

कच्छ

नरेश महेश्वरी

विनोद चावड़ा

छोटा उदेपुर

रणजीत राठवा

गीता राठवा

बारडोली

तुषार चौधरी

प्रभु वसावा

वलसाड

जीतू चौधरी

के सी पटेल

आणंद

भरतसिंह सोलंकी

मितेश पटेल

पंचमहाल

वी के खांट

रतन सिंह

पाटण

जगदीश ठाकोर

भरत डाभी

 

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