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गांधीनगर. राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस दो सीटें जीतने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी ने अपने सभी विधायकों को सुरक्षित करने के लिए दूसरे राज्य भेजने का निर्णय लिया है। यहां राज्यसभा की चार सीटों के लिए 26 मार्च को मतदान होना है। भाजपा ने 3 उम्मीदवार उतारे हैं। जबकि कांग्रेस ने 2 प्रत्याशियों को उतारकर मुकाबला रोचक कर दिया है। माना जा रहा है कि कांग्रेस को एक सीट पर जीतना मिलना तय है।
कांग्रेसी विधायकों को राजस्थान भेजा जाएगा
कांग्रेस अपने सभी 72 विधायकों को राजस्थान भेजने की तैयारी में है। कांग्रेस के एक नेता ने बताया कि शक्ति सिंह हाईकमान के अधिक करीब हैं, इससे हाईकमान विधायकों के लिए व्हिप जारी करती है, तो शक्ति सिंह को लाभ मिल सकता है। लेकिन, शक्ति सिंह के समर्थकों की अपेक्षा भरत सिंह सोलंकी के समर्थक अधिक हैं। इससे कांग्रेस में टूट-फूट की पूरी संभावना है। सोलंकी से कंधा से कंधा मिलाने वाले विधायक उन्हें मत देकर विजयी बना सकते हैं।
35 विधायकों की नाराजगी
गुरुवार को भरत सिंह सोलंकी के नाम की घोषणा नहीं हुई थी। तब कांग्रेस के 35 विधायकों ने हाईकमान के सामने अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। इधर भाजपा का कहना है कि पार्टी हर हाल में शक्ति सिंह को राज्यसभा में जाने से रोकेगी। शक्ति सिंह ने ही 2017 में आयोजित राज्यसभा के चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए अहमद पटेल को जीत दिलवाई थी। उन्होंने अमित शाह की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया था।
क्रॉस वोटिंग और विधायकों को अनुपस्थित रखने की राजनीति
भाजपा के बड़े नेताओं का कहना है कि इसके लिए पूरे गुजरात के विभिन्न इलाकों का प्रतिनिधित्व करने वाले कांग्रेस के नेताओं को खींचने का प्रयास किया जाएगा। भाजपा के हिसाब के अनुसार कांग्रेस के दो-तीन विधायक क्राॅस वोटिंग कर सकते हैं। उतने ही विधायक गैरहाजिर भी रह सकते हैं। ऐसे में राज्यसभा के समीकरण के अनुसार भाजपा के तीन प्रत्याशी जीतकर राज्यसभा में जा सकते हैं। संभव है, उसकी यह गिनती उल्टी भी पड़ सकती है।
भाजपा के पास पर्याप्त वोट हैं: रूपाणी
भाजपा के 3 उम्मीदवार के नामांकन भरने के बाद मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने तीनों के जीतने का दावा करते हुए कहा कि भाजपा के पास पर्याप्त संख्या में वोट है। उन्हें सभी विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
जीतने के लिए अमीन को खुद ही मेहनत करनी होगी
2017 के राज्यसभा चुनाव की 3 सीटों के चुनाव के समय अमित शाह, स्मृति ईरानी और बलवंत सिंह राजपूत तीन उम्मीदवार थे। इसमें भाजपा को जीतने के लिए वोट कम पड़ रहे थे। उसके पहले भाजपा ने कांग्रेस में बड़ा गड्ढा कर दिया। इसके बाद भी राजपूत हार गए और कांग्रेस के अहमद पटेल जीत गए थे। इस बार भाजपा ने अपनी तरह से दूसरी ही रणनीति बनाई है। किंतु पुराने जनता दल और कांग्रेस में रह चुके नरहरि अमीन को अपने बल पर ही जीतना होगा। उनका पूरा दारोमदार उनके पुराने साथी ही होंगे।
कांग्रेस के लिए दूसरी सीट जीतना मुश्किल
अहमद पटेल के विश्वासपात्र माने जाने वाले दक्षिण गुजरात के कांग्रेसी नेता गौरव पंड्या ने ट्वीट कर कहा है कि गुजरात में भाजपा ने जिस तरह से नरहरि अमीन को अपना तीसरा उम्मीदवार बनाया है, उससे लगता है कि कांग्रेस को अपनी दूसरी सीट जीतना बहुत ही मुश्किल हो गया है। इसके पहले पाटीदार विधायकों ने पाटीदार प्रत्याशी को खड़ा करने की मांग की थी, किंतु उनकी मांगें पूरी नहीं हो पाई। इससे वे नाराज हो गए हैं, मतदान के समय वही मुश्किलें पैदा कर सकते हैँ।
भाजपा का पटेल फैक्टर सामने आया
पटेल को भाजपा से टिकट मिला, पर कांग्रेस से नहीं मिला। इस घटना को लेकर भाजपा ने भी दांव खेला है। उप मुख्यमंत्री नीतिन पटेल ने बताया कि भाजपा ने पाटीदार नेता को राज्यसभा में भेजने के लिए रास्ता दिया है, परंतु कांग्रेस ने पाटीदार विधायकों की भावना को ठेस पहुंचाई है। उन्हें अनदेखा किया है।
अमीन तुरूप का इक्का साबित हो सकते हैं
भाजपा के तीसरे उम्मीदवार नरहरि अमीन ऐसे नेता हैं, जो पहले कांग्रेस में थे। पटेल विधायकों में उनकी अच्छी पकड़ है। भाजपा का गणित है कि अमीन के लिए कांग्रेस के पटेल विधायक उन्हें वोट दे सकते हैं। दूसरी और कांग्रेस की प्राथमिकता शक्ति सिंह गोहिल हैं। यानी पहले 37 वोट शक्ति सिंह को मिलेंगे, यह तय है। परंतु कांग्रेस के विधायक शक्ति सिंह से अधिक भरत सोलंकी को पसंद करते हैं। ऐसे में विधायक भरत सोलंकी को वोट देंगे, तो शक्ति सिंह से नाराज विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। मतलब कांग्रेस से भरत सोलंकी का जीतना तय है। शक्ति सिंह के लिए मुश्किल होगी। अमीन के लिए कांग्रेस के 4 से 6 विधायक टूट सकते हैं और 2-3 विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।
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