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जेटली और गुजरात / गुजरात के सांसद होने के अलावा वे यहां के समधी भी थे



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली की फाइल तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली की फाइल तस्वीर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली की फाइल तस्वीरप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली की फाइल तस्वीर

  • 18 साल तक राज्य सभा से गुजरात का प्रतिनिधित्व किया
  • मोदी सरकार के सबसे पॉवर फुल मंत्री थे जेटली

Dainik Bhaskar

Aug 24, 2019, 03:49 PM IST

अहमदाबाद. 9 अगस्त को सांस लेने में तकलीफ और फेफड़ों में पानी भरने की बीमारी के चलते पूर्व केद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने एम्स में भर्ती कराया गया था। जहां 15 दिनों बाद शनिवार को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। जेटली ने राज्य सभा ने 18 साल तक गुजरात का प्रतिनिधित्व किया। दूसरी ओर वे गुजरात के समधी भी थे। इस तरह से गुजरात से उनका अनोखा नाता था।


प्रधानमंत्री मोदी के ट्रबल शूटर
जेटली मोदी सरकार के पहले टर्म में सबसे पॉवरफुल नेताओं में से एक थे। मुश्किल हालात में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्रबल शूटर बन जाते। अरुण जेटली का गुजरात और मोदी के साथ करीब दो दशकों का गाढ़ा संबंध था। इसके अलावा जेटली गुजरात के समधी भी थे। जेटली की पत्नी की भतीजी की शादी भाजपा नेता परिंदु भगत उर्फ काकू भाई के बेटे मौलिक के साथ हुई है।


18 साल तक गुजरात का प्रतिनिधित्व
अरुण जेटली पहले राज्यसभा का चुनाव भी गुजरात से ही लड़ा और राज्यसभा सांसद बने। इसके बाद वे 2006 से 20012 और 2012 से 2018 तक राज्य सभा में गुजरात का प्रतिनिधित्व किया। 2002 में जब हालात मोदी के खिलाफ थे, तब वे उनके कट्टर समर्थकों में गिने जाते थे। अरुण जेटली और लालकृष्ण आडवाणी ने मोदी को नैतिक समर्थन दिया। जिससे मोदी का मुख्यमंत्री पद बचा रह गया। इस घटना के बाद मोदी जेटली के और करीब आ गए।


मोदी-शाह को कानूनी मदद दी
वर्ष 2002 से 2013 तक गुजरात में अनेक घटनाएं हुई। जिसमें सोहराबुद्दीन और इशरत जहां के फर्जी एनकाउंटर केस में जेटली ने अमित शाह और मोदी को कानूनी मदद की। उन्होंने मीडिया में भी कई बार दोनों नेताओं का बचाव किया। मोदी-शाह को फंसाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र भी लिखा था।


2014 में मोदी को दिल्ली में जेटली मिले
वर्ष 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने गुजरात छोड़कर दिल्ली की गद्दी संभाली, तो दिल्ली के लिए वे आउटसाइडर थे। मोदी भले ही गुजरात के 3 बार मुख्यमंत्री रह चुके हों, पर वे यह बात अच्छी तरह से जानते थे कि दिल्ली किसी भी तरह से गांधीनगर नहीं हो सकता। यहां के रीति-रिवाज और रंग कुछ अलग ही हैं। इससे मोदी ने अपनी केबिनेट में एक ऐसे व्यक्ति को तलाश रहे थे, जो दिल्ली और लुटियंस जोन की रग-रग से वाकिफ हो। यह तलाश जेटली के रूप में पूरी हुई। जेटली ही एक ऐसे व्यक्ति थे, जो अमित शाह और मोदी के सबसे विश्वसनीय लोगों में से थे।

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