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जन्म दिन के लिए खरीदे कपड़े-बूट मासूम की लाश को पहनाकर दी विदाई

एक वर्ष पहले
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खुशाल के शव को पहनाए गए नए कपड़े और बूट - Dainik Bhaskar
खुशाल के शव को पहनाए गए नए कपड़े और बूट
  • भतीजे की हत्या कर लाश फेंक देने की दर्दनाक घटना
  • हत्या की आरोपी महिला गिरफ्तार
  • ऑटो चालक महत्वपूर्ण गवाह बना

राजकोट. जन्म दिन के केवल 3 दिन पहले अपने 3 साल के भतीजे का अपहरण कर उसकी हत्या कर लाश को फेंक देने वाली महिला को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इधर बच्चे के माता-पिता उसके जन्म दिन की तैयारियां कर रहे थे। उसके लिए नए कपड़े और बूट खरीदे थे, अब लाश मिलने पर उसे वही कपड़े-बूट पहनाकर उसे अंतिम विदाई दी। यह दृश्य देखकर वहां उपस्थित सभी की आंखें सजल हो गई।
 

ईर्ष्या के कारण की हत्या
कोठारिया रोड पर महेश्वरी सोसायटी में रहने वाला 3 साल का खुशाल कमलेश भाई डोबरिया शनिवार की सुबह 9 बजे घर के पास ही आंगनबड़ी गया था। दस बजे नाडोदा नगर में रहने वाली उसकी बड़ी मां यानी पिता के बड़े भाई की पत्नी पारुल उर्फ हकी अल्पेश डोबरिया आंगनबाड़ी पहुंची। वहां उसने माताजी के दर्शन के बहाने बच्चे को अपने साथ ले लिया। उसे ऑटो से अपने घर ले गई। पारुल को इस बात का दु:ख था कि उसके साढ़े 3 साल के बेटे माधव से ज्यादा लोग उसके भतीजे खुशाल से प्यार करते थे। तब उसने ईर्ष्यावश खुशाल को खत्म करने की योजना बनाई। खुशाल को घर लाकर उसने उसका गला दबाकर मार डाला। फिर उसकी लाश को कपड़े से लपेटकर बाहर फेंक दिया।
 

रिक्शा चालक महत्वपूर्ण गवाह बना
खुशाल की लाश मिलने पर उसके घर में कोहराम मच गया। मां जशोदा बेन और पिता कमलेश भाई पर मानों आसमान टूट पड़ा। 3 दिन बाद जिस बच्चे का जन्म दिन हो, उसकी लाश मिलने पर दोनों की हालत बहुत ही ज्यादा खराब हो गई। उसके लिए नए कपड़े और बूट खरीदे गए थे। जिसे उसकी लाश को पहनाकर अंतिम विदाई दी। भास्कर से बात करते हुए खुशाल के पिता कमलेश भाई ने कहा-मेरे बेटे खुशाल की हत्या करने के पहले मेरी भाभी को जरा भी दया नहीं आई। आखिर मेरे बेटे ने उसका क्या बिगाड़ा था? पारुल खुशाल को लेकर जिस ऑटो में बैठी थी, उस ऑटो चालक को पुलिस ने तलाश लिया, उससे पूछताछ के बाद कुछ ही घंटों में पारुल को गिरफ्तार कर लिया गया।
 

चीखें न सुनाई दे, इसलिए दरवाजा बंद कर दिया था
पारुल ने अपने भतीजे खुशाल की हत्या करने के पहले घर के दरवाजे-खिड़कियां बंद कर दी थी,ताकि उसकी चीखें बाहर न जा सके। हत्या के दौरान खुशाल चीख रहा था, उसे उल्टी भी हुई थी। इससे पारुल और अधिक गुस्से में आ गई। तब उसने अपना दुपट्‌टा उसके गले पर कसकर बांध दिया, जिससे खुशाल की मौत हो गई। हत्या के बाद खुशाल की लाश को घर के बाहर रास्ते में फेंक दिया था। उधर पारुल को खुशाल के जन्म दिन 31 दिसम्बर को निमंत्रण भी उसके पिता कमलेश भाई ने दिया था। तब पारुल ने आने से इंकार कर दिया था। उसके बाद उसे न जाने क्या सूझी, जो उसने मासूम खुशाल की हत्या कर दी।

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